मृदा स्वास्थ्य बचाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जन-आंदोलन बनेगा ‘खेत बचाओ अभियान’

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने लखनऊ में किया अभियान का शुभारंभ, मूंगफली और तिल की 1.29 लाख मीट्रिक टन खरीद के प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी

हर्षिता यादव  Picture
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लखनऊ। खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, जल संरक्षण और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मंगलवार को भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), तेलीबाग में आयोजित कार्यक्रम में अभियान का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

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इस अवसर पर कृषि मंत्री ने प्रदेश के किसानों के लिए केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत उत्तर प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 86,500 मीट्रिक टन मूंगफली और 43,250 मीट्रिक टन तिल की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। कुल 1,29,750 मीट्रिक टन खरीद के इस प्रस्ताव से प्रदेश के मूंगफली और तिल उत्पादक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने पर जोर

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सूर्य प्रताप शाही ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का प्रदेश के किसानों की ओर से आभार जताया। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी। साथ ही उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने की स्थिति से बचाया जा सकेगा।

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मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाने का अभियान

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कृषि मंत्री ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा, जल संरक्षण और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने का प्रयास है। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल को कम करना और किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना है।

उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए किसानों को जैविक खाद, गोबर की खाद और हरी खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही नैनो उर्वरकों का भी संतुलित और आवश्यकतानुसार उपयोग करना चाहिए, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके।

किसान कल्याण को बताया सरकार की प्राथमिकता

शाही ने कहा कि अन्नदाता का सम्मान राष्ट्र के सम्मान से जुड़ा है। केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आय, कृषि उत्पादन और खेती की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। उन्होंने किसानों से मिट्टी की सेहत को प्राथमिकता देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

कार्यक्रम में भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. एस.एन. सुशील, केंद्र सरकार के कृषि संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल, आईसीएआर-अटारी कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह, कृषि वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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