स्वतंत्र विचार
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उद्योगपतियों का बोल बाला हरियाली पर चल रही आरा
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By Swatantra Prabhat UP
संपादक/लेखक: राजीव शुक्लाभारत में हरियाली संरक्षण की बातें सरकारी योजनाओं, पौधारोपण अभियानों और जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में खूब होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी भिन्न है। देश के कई हिस्सों में उद्योगपतियों और लकड़ी माफिया के...
भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और हाइपरसोनिक युग की ओर निर्णायक कदम
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By Swatantra Prabhat UP
भारत तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटा है। पारंपरिक युद्ध रणनीतियों का स्थान अब अत्याधुनिक तकनीक ले रही है। इसी दिशा में भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक...
गुजरा एक और मजदूर दिवस : लेकिन समस्याओं से ग्रस्त ,खुशियों से दूर ,आज भी मजदूर
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By Swatantra Prabhat UP
हर साल की तरह इस बार भी एक मई यानी मजदूर दिवस मनाया गया। रैलियां निकल गई। सभाएं हुई। समस्याओं के खिलाफ संघर्ष का ऐलान किया गया। ठीक सब कुछ वैसा ही जैसा मई यानी मजदूर दिवस पर हर साल...
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस से सूरत के उज्ज्वल भविष्य की नई दिशा
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By Swatantra Prabhat UP
गुजरात ने एक बार फिर अपने विकास मॉडल की ताकत और दूरदर्शिता को साबित करते हुए तीसरी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया। सूरत में आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन ने न केवल दक्षिण गुजरात बल्कि पूरे राज्य के...
तबाही का इंतजाम- बारूद के ढेर पर खड़ी है दुनिया
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By Swatantra Prabhat UP
मनोज कुमार अग्रवाल क्या दुनिया बारूद के ढेर पर खड़ी हो गई है? क्या तमाम विज्ञान की तरक्की तबाही का सामान जुटाने के लिए है? अब तो दुनिया के ताकतवर देशों ने कथित सामरिक संतुलन की आड़ में परमाणु हथियारों...
आनंद और अवसाद और सुख और पीड़ा, जीवन के अलग-अलग सोपान
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By Swatantra Prabhat UP
सुख और दुख दो ऐसे सोपान हैं जिन पर चलकर ही मनुष्य अपनी संपूर्णता को समझ पाता है। जीवन कभी एक सीधी रेखा की तरह नहीं चलता, उसमें उतार-चढ़ाव, सुख-दुःख, आशा-निराशा, संभावनाएं और आशंकाएं निरंतर एक-दूसरे में गुंथी रहती हैं।...
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता की वैश्विक चुनौतिया
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By Swatantra Prabhat UP
महेन्द्र तिवारी अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 3 मई को मनाया जाता है और यह दिन लोकतंत्र की उस मूल भावना को उजागर करता है, जिसमें नागरिकों को स्वतंत्र रूप से जानकारी प्राप्त करने और अपनी बात रखने का...
बढ़ती महंगाई, बढ़ते खर्चे कर रहे आम आदमी की जेब ढीली
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By Swatantra Prabhat UP
संपादक/लेखक: राजीव शुक्ला मजदूर दिवस के मौके पर देश के करोड़ों आम नागरिकों को महंगाई का नया झटका लगा है। आज से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में औसतन ₹993 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। दिल्ली में19...
तेल कंपनियों का रिकॉर्ड मुनाफा और उपभोक्ताओं पर बढ़ता बोझ
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By Swatantra Prabhat UP
भारत में पेट्रोलियम क्षेत्र एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान देश की प्रमुख तेल कंपनियों ने जिस तरह से मुनाफा कमाया है, उसने आम जनता, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच नई बहस...
जलवायु परिवर्तन का गहराता संकट: युद्ध, समुद्री तापमान और ‘वेस्टर्न वेव्स’ का भारत पर प्रभाव
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By Swatantra Prabhat UP
प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और...
भारत में बढ़ती हृदय रोग महामारी
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By Swatantra Prabhat UP
भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी हालिया तस्वीर चिंताजनक होती जा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन के ताजा सर्वे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह तेजी...
हर मिनट उजड़ते ग्यारह फुटबॉल मैदान जितने जंगल—मानव विकास या विनाश ?
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By Swatantra Prabhat UP
जल, जंगल और जमीन—प्रकृति के ये तीनों आधार स्तंभ समस्त जीव-जगत के जीवन की धुरी हैं। किंतु विडंबना यह है कि आधुनिक और शिक्षित मानव ने अपने तथाकथित विकास की अंधी दौड़ में इन्हीं आधारों का निर्मम दोहन किया...

