स्वतंत्र विचार

स्वतन्त्रता का दिवस सुहाना, विकृतियों से मुक्त बने भारत

पन्द्रह अगस्त केवल ध्वजारोहण करने, राष्ट्रगान गाने और स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करने का दिन नहीं है। यह आत्ममंथन का अवसर भी है कि जिस स्वतंत्रता के लिए असंख्य देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया, उस स्वतंत्रता को हमने कितना...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

स्वतंत्रता से विकसित भारत की ओर

15 अगस्त भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है जिसने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया। यह केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, कर्तव्यबोध और भविष्य के संकल्प का...
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आजादी का अमृत और आम आदमी

राजीव शुक्ला देश 79वें स्वतंत्रता दिवस की दहलीज पर खड़ा है। तिरंगा हर तरफ दिखाई दे रहा है, देशभक्ति के गीत वातावरण में गूंज रहे हैं और आजादी के संघर्ष की स्मृतियां फिर से हमारे सामने हैं। इन...
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विदेशी अंशदान कानून पर क्यों मचा है घमासान?

महेन्द्र तिवारी भारत में विदेशी धन प्राप्त करने वाली सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और जन कल्याणकारी संस्थाओं को नियंत्रित करने वाला विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। अब विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन...
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हर घर तिरंगा से हर हृदय तिरंगा तक

प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश    हर भारतीय के लिए यह समझना आवश्यक है कि तिरंगा केवल तीन रंगों से बना एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता, अखंडता, लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता का जीवंत प्रतीक है। इसके प्रत्येक...
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प्रकृति, पितरों और महादेव की आराधना का पावन संगम

सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। वर्षा ऋतु में जब धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, खेतों में नई फसलें लहलहाने लगती हैं और पेड़-पौधे नई ऊर्जा से भर उठते हैं, तब...
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AI का दौर और इंसान का रोजगार

राजीव शुक्ला तकनीक ने हमेशा इंसान की जिंदगी को बदलने का काम किया है। पहिए से लेकर इंटरनेट तक और कंप्यूटर से लेकर स्मार्टफोन तक, हर बड़ी तकनीकी क्रांति ने काम करने का तरीका बदला है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस...
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सोशल मीडिया का शोर और लोकतंत्र की खामोशी

राजीव शुक्ला लोकतंत्र केवल चुनाव कराने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ है जनता की आवाज सुनी जाए, सत्ता से सवाल पूछे जाएं, असहमति का सम्मान हो और नागरिकों को सही जानकारी के आधार पर अपना...
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डिजिटल भारत और साइबर अपराध

राजीव शुक्ला  भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान...
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बाईस वर्षों की कैद, एक निर्दोष की चीख और न्याय का मौन

भारत की न्याय व्यवस्था का एक मूल सिद्धांत है कि सौ अपराधी छूट जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष व्यक्ति को दंड नहीं मिलना चाहिए। यह सिद्धांत केवल कानून की किताबों में लिखी गई पंक्ति नहीं, बल्कि सभ्य समाज की आत्मा...
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यूजीसी नियमों का विवाद, करणी सेना का आंदोलन और राजस्थान की चुनावी राजनीति

राजस्थान की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां शिक्षा से जुड़ा एक प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षण...
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यात्री कतारों में खड़े रहे, सुरक्षा के रखवाले सौदों में खड़े मिले

सुरक्षा का तमाशा अजीब है—कटघरे में यात्री खड़ा होता है, चूक भीतर होती है। वह चुपचाप बैग खोलता है, जूते-बेल्ट उतारता है, पानी की बोतल छोड़ता है, लैपटॉप अलग ट्रे में रखता है। उसे भरोसा रहता...
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