स्वतंत्र विचार

देश के आर्थिक विकास को भ्रमित करती वर्ग विषमताएं

देश की सामाजिक विषमताओं ने समाज में कई समस्याओं को जन्म दिया है एवं आर्थिक प्रगति पर विभिन्न सोपानों में लगाम लगाई है। भारतीय समाज में विषमता एवं विविधता भारत के लिए एक बड़ी समस्या बनकर सामने खड़ी है। स्वतंत्रता...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

मोबाइल, नेटवर्क और सपने: लेकिन महिलाएं अब भी बाहर क्यों?

कृति आरके जैन हर सुबह घर में रोशनी से पहले जिम्मेदारियां जाग जाती हैं, और उसी के साथ एक महिला भी। मोबाइल की चमक दीवारों तक पहुंचती है, लेकिन उसकी हथेली तक नहीं। वह चूल्हे की आग में...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

जब हार ने रच दी पहचान: टी20 विश्व कप में नेपाल का उदय

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” जब इतिहास करवट बदलता है, तो वह शोर मचाकर नहीं आता, बल्कि मैदान पर उतरकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। 8 फरवरी 2026 की शाम वानखेड़े स्टेडियम में कुछ ऐसा ही देखने को मिला।...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

क्या था एपस्टीन का बेबी रैंच प्लान?

- महेन्द्र तिवारी जेफ्री एपस्टीन का तथाकथित बेबी रैंच विचार आधुनिक समय के सबसे डरावने और विचलित करने वाले प्रसंगों में से एक माना जाता है। यह कोई औपचारिक योजना या लिखित परियोजना नहीं थी, बल्कि उसकी निजी बातचीतों...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

कृषि से समृद्धि की राह पर बिहार दुग्ध उत्पादन में नई क्रांति का निश्चय

बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार ने जिस तेज़ी और स्पष्टता के साथ काम शुरू किया है, उसने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छूने वाला है। सड़क, स्वास्थ्य,...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

ए आई के दुरुपयोग का शिकार होते दुनियाभर के मासूम बच्चे

मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए विकसित की गई वैज्ञानिक तकनीक जहाँ एक ओर वरदान सिद्ध हुई है, वहीं इसके दुरुपयोग ने अनेक नई चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं। संचार क्षेत्र में आई मोबाइल क्रांति...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

घूसखोर पंडत - चलचित्र, समाज और संवेदनशीलता का द्वंद्व

महेन्द्र तिवारी हाल ही में अभिनेता मनोज बाजपेयी की आने वाली चलचित्र कृति ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर देश में व्यापक विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद उस समय प्रारम्भ हुआ जब चार फरवरी दो हजार छब्बीस को...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

मानव चेतना का उत्कर्ष: आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक समरसता

प्रो.(डा) मनमोहन प्रकाश     वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भौतिक संपदा की प्रचुरता के बीच मानवीय संवेदनाओं का अकाल एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। आज की महती आवश्यकता केवल सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि नहीं, बल्कि व्यक्ति को प्रबुद्ध मनुष्य,...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

भारत के लिए निर्गुट आर्थिक सामरिक केंद्र होने की क्षमता

स्वतंत्रता के बाद भारत के परंपरागत रूप से रुस से बड़े ही प्रगाढ़ संबंध रहे हैं, जो कालांतर में लगातार सामरिक एवं आर्थिक संबंधों के चलते मजबूत होते गए हैं। वर्तमान में भारत का सबसे विश्वसनीय साथी और ट्रेड पार्टनर...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

सस्ती शिक्षा की महंगी कीमत: भारतीय छात्रों की त्रासदी

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” छात्रावास की शांत गलियों में अचानक गूंजती चीखें, फर्श पर बहता खून और भय से जमी आंखें—7 फरवरी 2026 की वह रात रूस के ऊफा शहर स्थित बश्कीर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के इतिहास पर...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

खून से सनी इबादतगाहें और टूटता समाज आतंक की आग में झुलसता पाकिस्तान और इंसानियत पर उठते सवाल

इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान हुआ आत्मघाती हमला केवल एक सुरक्षा चूक या एक और आतंकी घटना नहीं है, बल्कि वह आईना है जिसमें पाकिस्तान के भीतर गहराते सामाजिक, वैचारिक और राजनीतिक संकट साफ दिखाई...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

राष्ट्रवाद का समावेषी चरित्र,चेतना, लोकतांत्रिक अधिनायकवाद के परहेज की आवश्यकता

राष्ट्रवाद आधुनिक राष्ट्र-राज्य की वैचारिक आधारशिला है। यह केवल भौगोलिक सीमाओं या राजनीतिक सत्ता से संबद्ध अवधारणा नहीं है, बल्कि साझा इतिहास, सांस्कृतिक स्मृति, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक उत्तरदायित्वों का समन्वित स्वरूप है। राष्ट्रवाद का मूल चरित्र सार्वभौमिक और समावेशी...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार