कविता/कहानी
कविता/कहानी  साहित्य/ज्योतिष 

संजीव-नी।

संजीव-नी। अपने स्वयं को पहचानो lपरिश्रम और बलिदान।महान राष्ट्र की पहचान,युवा उठो जागोअपने स्वयं को पहचानो,श्रम शक्ति और लगन,देश के विकास के लिएतुम्हें पैदा करनी है अगन। भारत है युवाओं का देशअनेक है...
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संजीवनी।

संजीवनी।    तुम मुस्कुराने में इजाफा तो करो।।धूप है बहुत चलने का वादा तो करो।भीड़ से निकल आने का इरादा तो करो।।सो जाऊगा गहरी नींद पल दो पल।ख्वाबों में आने का वादा तो करो।दुनिया ऐसी ही है,...
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वोटवा हम काहे के डालीं

वोटवा हम काहे के डालीं पालटी आपन जीतत वा तौ, वोटवा हम काहे के डालीं।एक वोट से फरक क पड़िहै, ई सोचके हम परवाह न कइलीं। पालटी आपन जीतत वा तौ, वोटवा हम काहे के डालीं।अबकी नेतवा घर न अइले, न हम ऊके...
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संजीव-नी।

संजीव-नी। जिंदगी भी एक ख्वाब की तरह ही तो है ,मन कहता रिश्ता दुनियादारों से बनाए रखना,दिल कहता ताल्लुक फकीरों से बनाए रखनाlलोग सफलता को पचा नहीं पाते है ।बस दूरी तुम अमीरों से बनाए रखनाlबहुत...
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लोकतंत्र के खातिर भैया चलो चले मतदान करें

लोकतंत्र के खातिर भैया चलो चले मतदान करें लोकतंत्र के खातिर भैया चलो चले मतदान करें सारे कामों से पहले अपना यह पहला काम करे लोकतंत्र की जड़ को पानी वोट से अपनी से दे आए  लोकतंत्र के मीठे फल मिलकर हम सब खाए     लोकतंत्र की रक्षा में...
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संजीव-नी| देख कर भी नही देख पाया ।

संजीव-नी| देख कर भी नही देख पाया । देख कर भी नही देख पाया ।फिर उस बात का जिक्लौटकर भुला नहीं पायाउस पल की याद है उसेजिया नहीं जिसे कभी,भोगा भी नहीं,जीने की जरूर कोशिश कीगहरे नहीं पैठ पाया,फिर भूल...
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संजीव-नी।। तेरे मायके जाने के बाद।

संजीव-नी।। तेरे मायके जाने के बाद। तेरे मायके जाने के बाद।तेरे मायके जाने के बाद,पूरा घर एक कोने मेंसिमट के रह गया है,सीढीया ऊपर जाने वालीऊपर नहीं जाती,नीचे आने वाली,नीचे नहीं आती,यूं तो बिस्तर डबल बेड का है,...
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संजीव-नी। आप जग जाहिर होने लगे हो।

 संजीव-नी। आप जग जाहिर होने लगे हो। संजीव-नी।आप जग जाहिर होने लगे हो।आप अपने हो या बेगाने हो,आप जग जाहिर होने लगे हो।जालिम ये जमाना,ना-समझ नही ।रंजिशों में आप भी माहिर होने लगे हो।न जाने किस की सोहबत में रहते हो,...
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संजीव-नी। आकाश की अनंत ऊंचाई दो l

संजीव-नी। आकाश की अनंत ऊंचाई दो l संजीव-नी। आकाश की अनंत ऊंचाई दो l    इनकी छोटी-छोटी हथेलियों में, पूरे ब्रह्मांड को समा जाने दो, संपूर्ण संभावना के साथ  पैदा हुआ नवजात, एक नन्हा पंछी तो है। आंखों में भविष्य के सपने  जल की निश्छलता, सूरज की किरणों...
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संजीव-नी।

संजीव-नी। आकृती ऐसी बनाना चाहता हूं।    आकृती ऐसी बनाना चाहता हूं जो सीधी भी, सादी भी, बोल दे सारी मन की व्यथा भी।    फूलों की दीपमाला सी धूप दीप सी मंत्रोचार सी।    जिसे चाह ना हो माया की, खुली हर पीड़ित...
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लघु नाटक '" छोटी बातें, लेकिन अच्छी बातें " का मंचन कर बच्चों को किया जागरूक।

लघु नाटक ' स्वतंत्र प्रभात  प्रयागराज।     संस्था द थर्ड बेल समय समय पर विद्यालयों में जाकर विभिन्न सामाजिक विषयों को लेकर जागरूकता का प्रयास करती रही है इसी क्रम में संस्था द थर्ड बेल की पहल पर  मंगलवार को नगर क्षेत्र स्थित डी....
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संजीव-नी।।

संजीव-नी।। संजीव-नी।। आनंद तो जीवन में चलते जाना ही हैंl    मुझे फेके गए पत्थर अपार मिले, फक्तियाँ,ताने बन कर हार मिले।    शौक रखता हूं सब के साथ चलने का, कही ठोकरे,कही जम कर प्यार मिले।    जीवन बीता आपा-धापी में ही यारों,...
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