दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों एवं पर्यटकों के संरक्षण से पर्यटन और स्थानीय आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

ऐसे में संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है।

हर्षिता यादव  Picture
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उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। प्रदेश सरकार ने दुधवा टाइगर रिजर्व में सफारी और प्रवेश शुल्क में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की है। वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय समुदायों को रोजगार से जोड़ने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार ने बल दिया है।

दुधवा टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां बाघ, गैंडा सहित अनेक वन्यजीवों की मौजूदगी इसे देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल करती है। ऐसे में संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है।

पर्यटकों को बड़ी राहत, शुल्क में नहीं होगी बढ़ोतरी
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन ने देश और प्रदेश के प्रकृति प्रेमियों और दुधवा आने वाले पर्यटकों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि इस वर्ष टाइगर रिजर्व में सफारी और प्रवेश शुल्क में वृद्धि नहीं की जाएगी। शुल्क को यथावत रखने के निर्णय से दुधवा आने वाले पर्यटकों के लिए पर्यटन का खर्च नियंत्रित रहेगा और अधिक से अधिक लोग प्राकृतिक सौंदर्य तथा वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे। दुधवा में पर्यटन गतिविधियों में लगातार वृद्धि हो रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में पर्यटन से प्राप्त राजस्व 2.15 करोड़ रुपये था, जो 49 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3.20 करोड़ रुपये हो गया। यह वृद्धि दुधवा में पर्यटकों की बढ़ती रुचि और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार का संकेत है। पर्यटन से होने वाली आय वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर होटल, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं।

ऑनलाइन बुकिंग के लिए बनेगा एकीकृत पोर्टल
पर्यटन सुविधाओं को आधुनिक, सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों के लिए सफारी और आवास की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक एकीकृत पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इस व्यवस्था में टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारण्य और प्राणि उद्यान यानी चिड़ियाघर भी शामिल होंगे। एकीकृत पोर्टल तैयार होने के बाद पर्यटकों को अलग-अलग स्थानों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो जायेगी। यह व्यवस्था पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ ही वन्यजीव क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या और गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित करने में भी सहायक होगी। इससे संवेदनशील वन क्षेत्रों पर अनावश्यक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

‘बफर में सफर’ से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
वन्यजीव क्षेत्रों के मुख्य हिस्सों पर पर्यटन का दबाव कम करने और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ‘बफर में सफर’ योजना भी शुरू की जा रही है। योजना के तहत बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए पंजीकृत वाहनों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से मुख्य वन क्षेत्रों पर पर्यटकीय दबाव कम किया जा सकेगा। साथ ही स्थानीय लोगों को पर्यटन से सीधे आर्थिक लाभ प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे। स्थानीय समुदाय जब वन और वन्यजीव संरक्षण से अपनी आजीविका को जोड़ता है तो संरक्षण की भावना और मजबूत होती है। इस दृष्टि से ‘बफर में सफर’ को समुदाय आधारित पर्यटन की दिशा में एक उपयोगी पहल के रूप में देखा जा सकता है।

गैंडों के संरक्षण पर बल
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रयासों में दुधवा नेशनल पार्क में ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो यानी एक सींग वाले भारतीय गैंडों की स्थिति और उनकी निगरानी से संबंधित एक पुस्तिका भी जारी की गई है। राइनो आईडी पुस्तिका के माध्यम से दुधवा में गैंडों की पहचान, निगरानी और संरक्षण से जुड़े प्रयासों को दस्तावेज के रूप में सामने लाया गया है। गैंडों का संरक्षण दुधवा की विशिष्ट पहचान से जुड़ा हुआ है और उनकी निगरानी के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रयास वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत करने में सहायक होंगे। इसके साथ ही भरथपुर गांव के विस्थापन और पुनर्वास पर आधारित एक लघु फिल्म के ट्रेलर का लोकार्पण भी किया गया है। यह फिल्म समुदायों के पुनर्वास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संबंधों को सामने लाने वाली पहल है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना प्राथमिकता
दुधवा क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना भी बड़ी चुनौती है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए आवश्यक संसाधन और आधुनिक तकनीक प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही है।

वन विभाग हर हाल में संघर्ष की घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रभावी प्रयास कर रहा है। इसके लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, आवश्यक तकनीकी संसाधनों का उपयोग करने और प्रभावित क्षेत्रों में समय से कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है। मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा के लिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की रक्षा के साथ उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और समस्याओं का समाधान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश का दुधवा नेशनल पार्क केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का हिस्सा है। यहां वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जिम्मेदार पर्यटन के बीच संतुलन बनाया जा रहा है। आने वाले समय में इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन से दुधवा में संरक्षण और पर्यटन दोनों को नई गति मिलेगी।

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-रवि यादव, सूचना अधिकारी

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