संपादकीय

बेहतर हो आत्मचिंतन करें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 

मनोज कुमार अग्रवाल      सदाचार और धर्म का आधार मर्यादा है। आचरण व्यवहार और नैतिकता की निर्धारित सीमाएं मनुष्य को अनुशासित सभ्य और सुसंस्कृत बनाती है मर्यादा व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में संतुलन रखतीं है। धर्म की मर्यादा का पालन करना...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

कुष्ठ रोग के खिलाफ सरकार की निर्णायक लड़ाई, जागरूकता, इलाज और सम्मान की ओर भारत

कुष्ठ रोग जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, मानव इतिहास की सबसे पुरानी बीमारियों में से एक है, लेकिन दुर्भाग्यवश आज भी यह बीमारी केवल स्वास्थ्य की नहीं बल्कि सामाजिक सोच की भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। कुष्ठ...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

राष्ट्र की आत्मा  शहीदों में बसती है

30 जनवरी भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर में केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह वह दिन है जो हमें हमारे राष्ट्र की आत्मा, उसके संघर्ष, उसके नैतिक मूल्यों और उन अनगिनत बलिदानों की याद दिलाता है जिनकी नींव पर आज़ाद...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

विकासशील देशों में संसाधनों की कमी, पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन

वर्तमान में पृथ्वी तथा प्राकृतिक संसाधनों के विनाशकारी जलवायु परिवर्तन की गति तथा उसके प्रभाव में गति की तीव्रता तेजी से महसूस की जाती रही है। इसका और कोई कारण ना होकर मानव की  अवांछित गतिविधियां ही हैं। जिनमें मूलतः...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

शब्दों से युद्ध तक: ‘अगला हमला’ और बदलती वैश्विक रणनीति

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” वॉशिंगटन की जमी हुई राजनीतिक हवा में जब यह वाक्य उछला—  “अगला हमला बहुत भयानक होगा”—तो वह महज़ चेतावनी नहीं रहा, बल्कि भविष्य के अंधेरे की ओर फेंका गया एक साया बन...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

युवाओं में बढ़ता मानसिक अवसाद

महेन्द्र तिवारी भारत के युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य आज जिस संकट के दौर से गुजर रहा है, वह केवल व्यक्तिगत पीड़ा की कथा नहीं है, बल्कि राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है। हाल ही...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

भारतीय पत्रकारिता जगत के भीष्म पितामह थे – मार्क टली

आधुनिक भारत की युवा पीढ़ी के अधिकांश लोग भले ही मार्क टली के नाम से परिचित न हों, लेकिन रेडियो और अख़बारों के दौर की पुरानी पीढ़ी के लिए मार्क टली पत्रकारिता जगत का वह निर्भीक नाम थे,...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

एक भाषण, अनेक दरारें: बांग्लादेश संकट का नया अध्याय

  प्रो. आरके जैन “अरिजीत” शेख हसीना का भारत से दिया गया पहला सार्वजनिक संबोधन बांग्लादेश की राजनीति में अचानक आए तूफान की तरह सामने आया है। अगस्त 2024  के छात्र आंदोलन के बाद सत्ता छोड़कर भारत में शरण लेने,...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

यूजीसी के नए इक्विटी नियम, सामाजिक न्याय और आशंकाओं के बीच संतुलन की चुनौती

उच्च शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक समाज की रीढ़ होती है। विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाली संस्थाएं नहीं होते, बल्कि वे ऐसे मंच होते हैं जहां समान अवसर, विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के मूल्य आकार लेते हैं। भारत जैसे...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

वैश्विक भय की चमक: क्यों रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं सोना और चांदी

प्रो. आरके जैन “अरिजीत”वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में सोना और चांदी की ऐतिहासिक ऊंचाइयां केवल बाजार की खबर नहीं बल्कि बदलती हुई वैश्विक चेतना का स्पष्ट संकेत बन चुकी हैं। यह तेजी किसी अचानक उत्साह का परिणाम नहीं बल्कि लंबे...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

भारत का 77 वां गणतंत्र बनाम स्त्री विमर्श

भारत के 77वें गणतंत्र में प्रवेश करते हुए जब हम लोकतांत्रिक व्यवस्था की  पड़ताल करते हैं तो यह स्थिति हमारे सामने खड़ी होती है कि क्या स्वतंत्रता की यह यात्रा स्त्रियों को भी उसी गरिमा, समानता और अधिकार तक पहुँचा...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

कनाडा के प्रधानमंत्री  की स्वदेशी अपनाने की अपील का संदेश

अशोक मधुपकनाडा के प्रधानमंत्री ने अपने देश के नागरिकों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की है। ट्रंप प्रशासन द्वारा कनाडाई उत्पादों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी को देखते हुए ये  अपील की गई  है। अमेरिकी...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय