संपादकीय
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

करोड़पति जन सेवक और अधनंगी जनता

करोड़पति जन सेवक और अधनंगी जनता बात राजनीयति के इर्दगिर्द ही रहती है ।  रहना भी चाहिए,क्योकि मुद्दा है जहाँ ,राजनीति है वहां। आज का मुद्दा है कि दो जून रोटी के लिए सरकार पर निर्भर  85  करोड़ कि आबादी वाले विश्व के सबसे बड़े लोकतनगर...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

  और अब नामांकन भी गया उत्सव ... 

  और अब नामांकन भी गया उत्सव ...    चाहे वह प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह हो, चुनाव प्रचार में रैली या रोड शो करना हो,जी एस टी जैसी नीति लागू करनी हो यहां तक कि कोविड जैसी विश्व की अब तक की सबसे बड़ी आपदा ही क्यों न...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

बसपा की शिखर से शून्य पर वापसी 

बसपा की शिखर से शून्य पर वापसी  बहुजन समाज पार्टी ने अपना सफर शून्य से शुरू किया था और यह शून्य कई चुनावों में उनके आसपास ही घूमता रहा। हालांकि शून्य से शिखर पर लाने की शुरुआत बसपा के सुप्रीमों कांशीराम ने कर दी थी जब उन्होंने...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

हिन्दू विवाह पवित्र संस्कार : सिर्फ नाच गाना पार्टी नहीं ! 

हिन्दू विवाह पवित्र संस्कार : सिर्फ नाच गाना पार्टी नहीं !  देश के अधिकांश हिस्सों में हिन्दू समाज के कुछ वर्गों खासकर एलीट और सम्पन्न समझे जाने वाले लोगों द्वारा विवाह आयोजन में जिस तरह का वैभव प्रदर्शन अनाप शनाप खर्च सैकड़ों तरह के व्यंजन डीजे पार्टी आयोजित की जा रही...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

कामदार से राहुल बनकर भी देखिये कभी

कामदार से राहुल बनकर भी देखिये कभी करोड़ों के सरकारी  विमान में उड़ान भरते हुए, हजारों किलो गुलाब और गेंदे के फूलों की महक को आत्मसात करते हुए चुनाव प्रचार करना, नामांकन भरना आसान है लेकिन आम आदमी की तरह किसी सेलून में जाकर हजामत बनवाना कठिन...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

लोकतंत्र को मजबूत करता है मीडिया तंत्र 

लोकतंत्र को मजबूत करता है मीडिया तंत्र  आज हम बात कर रहे हैं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया यानि कि पत्रकारिता की। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा पिलर इसलिए कहा जाता है कि मीडिया ही है जो सरकार या किसी भी संस्था के गलत कार्य को करने...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

हमारे भगवान के स्वरूप सड़कों पर नचाने के लिए नहीं हैं! 

हमारे भगवान के स्वरूप सड़कों पर नचाने के लिए नहीं हैं!    इन दिनों भगवान के स्वरूपों को पंडालों शोभायात्रा संकीर्तन यात्रा में सड़कों पर नचाने का नया रिवाज चल निकला है क्या यही है हमारे अपने मान बिंदुओं के प्रति आस्था के प्रदर्शन का तरीका? यह क्या हो रहा है   आपको...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

भुखमरी और कुपोषण की सबसे बड़ी वजह आर्थिक असमानता, निर्धनता और महंगाई

भुखमरी और कुपोषण की सबसे बड़ी वजह आर्थिक असमानता, निर्धनता और महंगाई आज जब पूरी दुनिया में तकनीकी, समृद्धि और आधुनिकता कुलांचे भर रही है, विभाजित आर्थिकी वाले मानव समाज में भूख और कुपोषण समस्या बना हुआ है। हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (संयुक्त राष्ट्र) के महानिदेशक गिल्बर्ट हुंगबो ने इस...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

मोदी के आत्मविश्वास को हल्के में न ले विपक्ष

मोदी के आत्मविश्वास को हल्के में न ले विपक्ष तीसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने से श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी को जनता जनार्दन के अलावा कोई दूसरा नहीं रोक  सकत। अठारहवीं लोकसभा के लिए अभी मतदान के चार चरण ही पूरे हुए हैं किन्तु मोदी...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

 स्त्रियां की राष्ट्र निर्माण की सशक्त सूत्रधार होती है। राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में नारी विधाता की सर्वोत्तम और उत्कृष्ट कृति है।

 स्त्रियां की राष्ट्र निर्माण की सशक्त सूत्रधार होती है। राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में नारी विधाता की सर्वोत्तम और उत्कृष्ट कृति है। भारतीय ऋषियों ने अथर्व वेद में माताओं को "माता भूमिह पुत्र अहं पृथ्च्या" अर्थात भूमि मेरी माता है और हम इस धरा के पुत्र हैं, कहकर प्रतिष्ठित किया है,तभी से विश्व में नारी महिमा का उद्घोष हो गया था। महान...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

आखिर कथित शाहजादे का इतना खौफ क्यों है ?

आखिर कथित शाहजादे का इतना खौफ क्यों है ? देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी चुनाव का चौथा चरण आते-आते तक एकदम अमर्यादित हो गए हैं।  वे जिस जबान का इस्तेमाल अस्सी साल के बूढ़े डॉ मनमोहन सिंह के लिए करते थे उसी जबान का इस्तेमाल...
Read More...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से ऐतिहासिक महत्व को बढ़ाना 

प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से ऐतिहासिक महत्व को बढ़ाना  प्रकाश व्यवस्था भारत की स्थापत्य विरासत को बहुत बढ़ाती है, ऐतिहासिक स्थलों को मनोरम दृश्यों में बदल देती है भारत की स्थापत्य विरासत इतिहास, संस्कृति और परंपरा के मिश्रण को दर्शाती है। हलचल भरे शहरी वातावरण में, हमारे विरासत स्मारक...
Read More...