महेशपुर के प्राचीन शिव मन्दिर का अस्तित्व खतरे में, कथित स्वामी ने  मन्दिर की भूमि दूसरे समुदाय के व्यक्ति को बेंच दी

ग्रामीणो में आक्रोश कार्यवाही की मांग वरिष्ठ अधिकारियों मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी

हर्षिता यादव  Picture
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बरेली /नवाबगंज- महेशपुर के प्राचीन सिद्ध शिव मन्दिर व मन्दिर की सौ बीघा भूमि मन्दिर के कथित स्वामी द्वारा दूसरे समुदाय के व्यक्ति को बेंचे जाने का आरोप क्षेत्र के ग्रामीणों ने लगाते हुए अधिकारियों के साथ ही सीएम पोर्टल पर इसकी शिकायत की है। ग्रामीणों का आरोप है कि मन्दिर की देखरेख करने वाले पुजारी के वंशजों ने राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी करा इसका स्वामित्व अपने नाम दर्ज कराने के बाद इसका बैनामा कर दिया । 
 
एसडीएम ने नायब तहसीलदार को सारे मामले की जांच कर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। भदपुरा क्षेत्र के ग्राम महेशपुर स्थित शिव मन्दिर का इतिहास काफी पुराना है , बताते हैं कि महानगर के गुलाबनगर वासी रानी लक्ष्मीबाई वेवा गनपत गोपाल द्वारा वर्ष 1938 में 105 बीघा भूमि महेशपुर शिव मन्दिर को दान दी गई थी । जिसके बाद से इसकी व्यवस्था विक्रमगिरी नामक पुजारी देख रहे थे और उनका नाम राजस्व रिकार्ड में बतौर इन्तजामिया दर्ज चला आ रहा था, छः दशक पूर्व विकमगिरी के गोलोकवास के बाद इस भूमि के इन्तजामिया के तौर पर छेदागिरी चेला विक्रमगिरी का नाम दर्ज हो गया ।
 
इसी दौरान छेदागिरी के भाई हीरागिरी ने राजस्व रिकार्ड मे अपना नाम भी जुड़वा लिया और राजस्व कर्मियों से सांठ गांठ कर चेला के स्थान पर हीरागिरी पुत्र छेदागिरी दर्ज करा लिया । चेला के स्थान पर पिता का नाम दर्ज़ होने के बाद हीरागिरी की मृत्यु के बाद उसके पुत्र नत्थू गिरी ने अपने नाम की विरासत दर्ज कराने के बाद दो सप्ताह पूर्व इस सारी भूमि का बैनामा कुंवरपुर वंजरिया वासी शब्बीर हुसेन के पुत्र नन्हे अली के पक्ष में कर दिया ।
 
जिसकी जानकारी होते क्षेत्र के ग्रामीणो में आकोश फैल गया और ग्रामीणो ने इस सारी हेराफेरी की शिकायत उच्च - अधिकारियों के साथ ही मुख्य मंत्री से कर मन्दिर का अस्तित्व बचाने की मांग की है। किशनपुर के पूर्व प्रधान पुत्र पुष्पेन्द्र कुमार के नेतृत्व में नरहरपुर गौरीखेड़ा के सर्वेश सिंह , रामेश्वर दयाल, तजपुरा के राजू, अंकित शर्मा अम्बरपुर, दयासिंह , योगेन्द्र पाल व प्रमोद कुमार आदि ने एसडीएम से शिकायत कर सारे प्रकरण की जांच कर कार्यवाही की मांग की , जिस पर एस डी एम सचिन यादव ने नायब तहसीलदार को जांच कर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
 
प्राचीनता के साथ* *सिद्ध मन्दिर भी माना जाता है महेशपुर का ये मन्दिरमहेशपुर स्थित इस शिव मन्दिर का इतिहास तो पुराना है ही , इस मन्दिर की महत्ता से कई मामले भी जुड़े हैं । बताते है कि तीन दशक पूर्व क्योलडिया थाने में तैनात तत्कालीन थानाध्यक्ष सूबेदार सिंह ने सन्तान की मनौती पूरी होने पर मन्दिर में एक कक्ष बनवाने के साथ ही भारी दान दिया था।
 
इसके अलावा बिथरी चैनपुर के तत्कालीन विधायक वीरेन्द्र सिंह ने भी मन्दिर तक जाने का रास्ता सीसी रोड बनवाया था। सबसे अहम बात ये है कि शिव रात्रि पर इस मन्दिर पर तहसील के साथ ही आस पास के क्षेत्रों में सबसे बड़ा मेला भी लगता है जिसमें लाखो श्रद्धालु भाग लेते हैं ।

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