त्रिवेणीगंज नगर परिषद में 16 करोड़ की 91 सड़क योजनाओं में कथित तौर पर कमीशनखोरी का आरोप
टेंडर मैनेज करने और घटिया निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जन सुराज पार्टी के नेता गजेंद्र यादव ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
त्रिवेणीगंज नगर परिषद में 16 करोड़ की 91 सड़कों पर घमासान: टेंडर मैनेज और 23% कमीशनखोरी का सनसनीखेज आरोप
बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज नगर परिषद क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान स्वीकृत 91 सड़क निर्माण योजनाओं में टेंडर मैनेज करने से लेकर घटिया सामग्री के इस्तेमाल तक के गंभीर आरोप लगे हैं।
मुख्य बातें
विवादास्पद योजनाएं: त्रिवेणीगंज नगर परिषद के माध्यम से लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 91 सड़क निर्माण योजनाओं पर सवाल उठे हैं।
इनपर पर लगे हैं आरोप दर्ज शिकायत में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी राज साहिल, नगर विकास प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अर्जुन प्रसाद सिन्हा, सहायक अभियंता सैफ अली और कनीय अभियंता सचिन कुमार मिश्रा पर आरोप लगे हैं।आरोप है कि पहली बार निकाली गई निविदा को रद्द कर दोबारा टेंडर निकाला गया, जिसमें मिलीभगत कर चुनिंदा संवेदकों (मात्र दो ठेकेदारों) को ही फायदा पहुंचाया गया और अधिकांश कार्य प्राक्कलन दर पर ही स्वीकृत करा लिए गए।
23% कमीशन का अंक गणित
शिकायतकर्ता गजेंद्र यादव द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए आवेदन में कमीशन के कथित बंटवारे का पूरा हिसाब दिया गया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।आरोप के मुताबिक,
कनीय अभियंता: 3%
सहायक अभियंता: 1.5%
कार्यपालक अभियंता: 1.5%
कार्यपालक पदाधिकारी: 5%
नगर परिषद कार्यालय: 1%
ऊपर के स्तर पर: 11%
पदस्थापन और गुणवत्ता को लेकर भी उठ रहे हैं सवाल
शिकायत में गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि सहायक अभियंता सैफ अली का पदस्थापना सुपौल नगर परिषद में है, लेकिन वे बिना किसी सक्षम प्राधिकार के आदेश त्रिवेणीगंज नगर परिषद के कार्यों (जैसे एमबी जांच और भुगतान की अनुशंसा) को भी संभाल रहे हैं।साथ ही कहा गया है कि सड़कों के निर्माण में मानकों की अनदेखी करने और प्राक्कलन के अनुसार पर्याप्त सामग्री न लगाने का भी आरोप है, जिससे सरकारी पैसा बर्बाद हो रहा है।
कार्रवाई हो जन सुराज नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक जिलास्तरीय जांच दल गठित करने और दोषी अधिकारियों व अभियंताओं के खिलाफ कड़ी विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
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