अग्निपथ पर नई उम्मीदों का उजाला,छह साल की सेवा के बाद अग्निवीरों के लिए खुलेगा स्थायी सैनिक बनने का मार्ग*

"सरकार ने अनुभव और परिस्थितियों के अनुरूप बदली व्यवस्था 75 प्रतिशत अग्निवीरों को मिला दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का अवसर"

हर्षिता यादव  Picture
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भारतीय सेना में भर्ती होना किसी सामान्य नौकरी को प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र की संप्रभुता, सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाना है। सेना की वर्दी पहनने वाला प्रत्येक युवा अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करता है। इसी भावना के साथ अग्निपथ योजना के अंतर्गत सेना में भर्ती हुए युवाओं के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। चार वर्ष की सेवा के बाद भविष्य को लेकर बनी रहने वाली अनिश्चितता को कम करने के लिए अब 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया जाएगा। छह वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद निर्धारित योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर उन्हें नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। यह बदलाव अग्निवीरों के लिए नई उम्मीद और सैन्य जीवन में आगे बढ़ने की अतिरिक्त संभावना लेकर आया है।
 
किसी भी देश की सैन्य शक्ति केवल आधुनिक हथियारों, मिसाइलों और तकनीक से नहीं बनती, बल्कि उसकी असली ताकत उन जवानों में होती है, जो कठिन परिस्थितियों में भी देश की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। भारतीय सेना में युवा शक्ति का महत्व हमेशा रहा है। बदलते समय में युद्ध की प्रकृति भी बदल रही है। अब पारंपरिक सैन्य क्षमता के साथ तकनीकी दक्षता, तेजी से निर्णय लेने की क्षमता, शारीरिक मजबूती और मानसिक दृढ़ता भी उतनी ही आवश्यक हो गई है। अग्निपथ योजना की परिकल्पना इसी बदलती सैन्य आवश्यकता को ध्यान में रखकर की गई थी।
 
जब अग्निपथ योजना लागू हुई, तब इसके प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी चर्चा हुई। विशेष रूप से चार वर्ष की सेवा के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में रखने तथा शेष 75 प्रतिशत को बाहर करने की व्यवस्था पर सवाल उठे। विपक्षी दलों ने इस विषय को लेकर सरकार की आलोचना की और युवाओं के बीच भी भविष्य की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं सामने आईं। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। उस समय योजना के समर्थकों का तर्क था कि इससे सेना की आयु संरचना युवा होगी और प्रशिक्षित युवाओं की नई पीढ़ी तैयार होगी। वहीं आलोचकों की चिंता चार वर्ष बाद रोजगार और स्थायी भविष्य को लेकर थी।
 
समय के साथ योजना के परिणाम सामने आने लगे। अग्निवीरों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, सैन्य अनुशासन सीखा और विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इस दौरान सेना को भी उनके कार्य, क्षमता और व्यवहार का प्रत्यक्ष अनुभव मिला। अब सरकार ने इसी अनुभव के आधार पर व्यवस्था में बदलाव करते हुए दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का विकल्प उपलब्ध कराया है। यह इस बात का संकेत है कि शासन व्यवस्था में किसी योजना को लागू करने के बाद उसके परिणामों की समीक्षा और आवश्यक सुधार भी महत्वपूर्ण होते हैं।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इस बदलाव में पहले से निर्धारित 25 प्रतिशत नियमित भर्ती की व्यवस्था बरकरार रखी गई है। शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद नियमित सैनिक बनने के इच्छुक युवाओं का मूल्यांकन उनकी योग्यता, शारीरिक क्षमता, अनुशासन, मनोबल और कार्यकुशलता के आधार पर होगा। इस प्रकार अग्निवीरों को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए पहले की तुलना में अधिक समय और एक अतिरिक्त अवसर प्राप्त होगा।
 
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने भी स्पष्ट किया है कि अग्निवीरों के प्रदर्शन का समय-समय पर आकलन किया जाता रहा है। सैन्य नेतृत्व को उनके कार्य और प्रशिक्षण के संबंध में सकारात्मक अनुभव मिले हैं। उनके अनुसार सेना में नियमित सेवा के लिए चयन करते समय शारीरिक फिटनेस, मनोबल, प्रेरणा और अनुशासन जैसे मानदंड महत्वपूर्ण रहेंगे। यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि सेना में स्थायी स्थान केवल सेवा अवधि के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर मिलना चाहिए।
 
नई व्यवस्था में आर्थिक पक्ष को भी महत्व दिया गया है। पांचवें वर्ष में अग्निवीरों को 43,500 रुपये तथा छठे वर्ष में 47,500 रुपये मासिक पारिश्रमिक मिलने का प्रावधान है। अतिरिक्त सेवा से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ सैन्य अनुभव बढ़ाने का भी अवसर मिलेगा। नियमित सैनिक के रूप में चयनित होने पर उन्हें नियमानुसार सैन्य सेवा से जुड़े लाभ प्राप्त होंगे।
 
केंद्रीय गृह मंत्री ने भी अग्निवीरों के भविष्य को लेकर भरोसा दिलाया है। सरकार का यह संदेश महत्वपूर्ण है कि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले युवाओं की प्रतिभा और प्रशिक्षण का समुचित उपयोग होना चाहिए। अग्निवीरों को केवल चार वर्ष की सेवा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना उनके आत्मविश्वास और सैन्य अनुभव दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।
 
यह भी समझना आवश्यक है कि छह वर्ष पूरे करने पर प्रत्येक अग्निवीर स्वतः नियमित सैनिक नहीं बन जाएगा। इसके लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया और योग्यता की कसौटी पर खरा उतरना होगा। लेकिन अब उनके सामने नियमित सैन्य सेवा में पहुंचने के दो अवसर उपलब्ध होंगे। यही इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
 
राजनीति में किसी भी योजना पर मतभेद होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। विपक्ष का काम सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना है और सरकार की जिम्मेदारी उन सवालों का जवाब अपने काम तथा नीतिगत सुधारों से देना है। अग्निपथ योजना में किया गया संशोधन इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है। युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सकारात्मक समाधान पर ध्यान देना आवश्यक है।
 
अंततः अग्निवीरों के सामने अब एक नई राह खुली है। उनके पास अपने प्रशिक्षण, अनुशासन और क्षमता के माध्यम से सेना में लंबी सेवा का अवसर प्राप्त करने की संभावना है। सरकार के इस निर्णय की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चयन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है और योग्य युवाओं को कितने प्रभावी ढंग से अवसर मिलता है। देश की सुरक्षा मजबूत करने के साथ युवाओं के सपनों को सम्मान देना भी आवश्यक है। अग्निपथ में आया यह बदलाव इसी दिशा में एक नई शुरुआत है, जहां युवा शक्ति, सैन्य अनुभव और राष्ट्रसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
 
कांतिलाल मांडोत

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