‘दुग्ध शक्ति’ से आत्मनिर्भर बन रहीं ग्रामीण महिलाएं, 72 हजार से अधिक बनीं लखपति दीदी

31 जिलों के 7,298 गांवों में महिला दुग्ध उत्पादकों का नेटवर्क, पांच कंपनियों ने अब तक किया 5,839 करोड़ रुपये का कारोबार : केशव मौर्य

हर्षिता यादव  Picture
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महिला नेतृत्व वाली दुग्ध उत्पादक कंपनियां अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रदेश में इन कंपनियों से करीब 4.12 लाख महिला दुग्ध उत्पादक जुड़ी हैं। इनकी पहुंच 31 जिलों के 7,298 गांवों तक हो चुकी है। स्थापना से अब तक इन कंपनियों ने लगभग 5,839 करोड़ रुपये का कारोबार किया है और 132 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। इनके माध्यम से 72,669 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला दुग्ध मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार कर रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

पांच कंपनियों से जुड़ीं लाखों महिलाएं

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत पांच महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियां गठित की गई हैं। इनमें बलिनी, काशी, सामर्थ्य, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी शामिल हैं। ये कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में महिला दुग्ध उत्पादकों को संगठित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और नियमित भुगतान की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं।

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कंपनियों का प्रदर्शन एक नजर में

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  • बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी: बुंदेलखंड के सात जिलों के 1,445 गांवों में कार्यरत इस कंपनी से 96,320 महिलाएं जुड़ी हैं। कंपनी ने अब तक 2,295 करोड़ रुपये का कारोबार और 58.75 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। इससे जुड़ी 26,189 महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं।

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  • काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी: पूर्वांचल के सात जिलों के 1,198 गांवों में सक्रिय इस कंपनी से 56,280 महिला सदस्य जुड़ी हैं। कंपनी का कुल कारोबार 855 करोड़ रुपये और लाभ करीब 16 करोड़ रुपये रहा है। इससे 13,219 महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं।

  • सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी: मध्य क्षेत्र के सात जिलों के 1,560 गांवों में संचालित इस कंपनी से करीब 1.12 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। कंपनी ने 1,841 करोड़ रुपये का कारोबार और 45 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। इससे 18 हजार महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं।

  • श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी: गोरखपुर क्षेत्र के चार जिलों के 1,170 गांवों में कार्यरत इस कंपनी से 74,350 महिलाएं जुड़ी हैं। कंपनी ने 370.07 करोड़ रुपये का कारोबार और 4.46 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। इससे 6,269 महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं।

  • सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी: तराई क्षेत्र के छह जिलों के 1,925 गांवों में संचालित इस कंपनी से 72,670 महिला सदस्य जुड़ी हैं। कंपनी ने 477.89 करोड़ रुपये का कारोबार और 8.16 करोड़ रुपये का लाभ कमाया है। इससे जुड़ी 8,992 महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं।

दूध की गुणवत्ता के आधार पर तय होती है कीमत

इन कंपनियों के माध्यम से महिलाओं को दूध की गुणवत्ता के आधार पर फैट और एसएनएफ के अनुसार पारदर्शी मूल्य दिया जाता है। दूध का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाता है। इसके लिए प्रत्येक माह की 3, 13 और 23 तारीख निर्धारित की गई है। नियमित भुगतान से महिलाओं को अपनी उपज का उचित मूल्य और सुनिश्चित आय मिल रही है।

बलिनी और सामर्थ्य कंपनियां दूध की खरीद के साथ घी और पनीर जैसे उत्पादों का प्रसंस्करण भी कर रही हैं। वहीं काशी, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा और सृजनी कंपनियां दूध का संग्रह कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत मदर डेयरी को उपलब्ध कराती हैं। इससे उत्पादन से लेकर विपणन तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पारदर्शी मूल्य निर्धारण, नियमित बैंक भुगतान और संगठित दुग्ध बाजार ने इस मॉडल को ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बनाया है। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व वाली ये कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने और प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में योगदान कर रही हैं।

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