निष्पक्ष चयन से मिली नौकरी, अब ईमानदारी से पीड़ितों को दिलाएं न्याय : योगी

28 नवचयनित वैज्ञानिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र, कहा- फॉरेंसिक साक्ष्यों की शुद्धता और समयबद्ध जांच से मजबूत होगी न्याय व्यवस्था

हर्षिता यादव  Picture
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से कहा कि जिस निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ उन्हें नौकरी मिली है, उसी ईमानदारी से पीड़ितों को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं। उनके पास आने वाले प्रत्येक फॉरेंसिक साक्ष्य की जांच पूरी शुद्धता, विश्वसनीयता और समयबद्धता के साथ होनी चाहिए। साक्ष्यों की प्रमाणिकता ही अपराधियों को सजा दिलाने और निर्दोषों के सम्मान व अधिकारों की रक्षा का मजबूत आधार बनेगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून से बचने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। वहीं, किसी निर्दोष को गलत तरीके से दंडित होने से बचाना भी न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है। वैज्ञानिक अधिकारियों को इस दोहरी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्पक्षता से करना होगा।

मेरिट के आधार पर हुआ चयन, अब जिम्मेदारी निभाने की बारी

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सीएम योगी ने कहा कि नियुक्ति पत्र केवल एक व्यक्ति के हाथ में नहीं आता, बल्कि इससे पूरे परिवार की खुशियां जुड़ी होती हैं। इन अधिकारियों का चयन शासन की शुचिता और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता का उदाहरण है। अभ्यर्थियों ने बताया कि उनका साक्षात्कार हुआ और उसी दिन शाम तक परिणाम घोषित कर दिया गया।

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न किसी सिफारिश की जरूरत पड़ी, न लेनदेन हुआ और न ही किसी अनुचित तरीके का सहारा लेना पड़ा। चयन केवल योग्यता और मेरिट के आधार पर हुआ। अब अधिकारियों से भी अपेक्षा है कि वे इसी ईमानदारी के साथ अपने दायित्व निभाएं।

पारदर्शी भर्ती से बदली पुलिस व्यवस्था की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस में 2.30 लाख से अधिक कार्मिकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और शुचिता के साथ संपन्न कराई गई है। आज उत्तर प्रदेश पुलिस दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में स्थापित है।

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उन्होंने कहा कि एक समय प्रदेश में अराजकता, उपद्रव और कर्फ्यू आम बात थी तथा अपराधियों के मन में कानून का भय नहीं था। सरकार ने पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार किए, जिसके परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। कानून-व्यवस्था की चर्चा में आज उत्तर प्रदेश का उल्लेख प्रमुखता से होता है।

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उन्होंने कहा कि कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में गिना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज आर्थिक रूप से देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। यह इच्छाशक्ति, सक्षम मानव संसाधन और समर्पण भाव से किए गए कार्यों का परिणाम है।

साक्ष्यों की कमी से अदालत में कमजोर पड़ता है मामला

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का ध्येय वाक्य 'सत्यमेव जयते' है। न्याय के मंदिर में सत्य की विजय तभी संभव है, जब पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं। भारतीय न्याय दर्शन में महर्षि गौतम ने प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण के चार प्रकार बताए हैं। हजारों वर्ष पहले प्रतिपादित यह ज्ञान आज की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था में भी प्रासंगिक है।

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उन्होंने कहा कि कई बार पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद विवेचना में कमियों के चलते अपराधी कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं। एक दुर्दांत माफिया का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उसके खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद थे, लेकिन उन्हें अदालत में प्रभावी ढंग से स्थापित नहीं किया जा सका और वह बरी हो गया।

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उस मामले में यूपी एसटीएफ ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, लेकिन उन्हें प्रमाणित करने की प्रक्रिया में कमी रह गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल साक्ष्य जुटाने तक सीमित नहीं है। उन्हें साक्ष्यों की प्रमाणिकता बनाए रखने और उन्हें इस तरह प्रस्तुत करने योग्य बनाने की जरूरत है, जिससे अपराधियों को सजा दिलाने में वे निर्णायक साबित हों।

वैज्ञानिक जांच से अपराध की गुत्थी सुलझाने में मिलेगी मदद

मुख्यमंत्री ने सहारनपुर में एक बालिका के जले हुए अवशेषों से मिले साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक अपराधी तक पहुंचने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि रक्त के नमूने, उंगलियों के निशान, बाल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभाते हैं। फॉरेंसिक विशेषज्ञ न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण सारथी हैं। पुलिस जब न्याय दिलाने की दिशा में आगे बढ़ती है तो वैज्ञानिक अधिकारियों को साक्ष्यों के माध्यम से उसका मार्ग प्रशस्त करना होगा। इससे अपराधियों को सजा दिलाने के साथ न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी भी कम होगी।

नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप तैयार हो रही विशेषज्ञ मानवशक्ति

योगी ने कहा कि जुलाई 2024 में देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए। ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों की जगह भारतीय भावना के अनुरूप बनाए गए इन कानूनों के तहत सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन अनिवार्य किया गया है।

निष्पक्ष चयन से मिली नौकरी, अब ईमानदारी से पीड़ितों को दिलाएं न्याय : योगी

इसके लिए प्रशिक्षित मानवशक्ति की जरूरत थी। प्रदेश में 500 फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन करने वाले पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता के मुकाबले 600 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। ये अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भू-माफिया से मुक्त जमीन पर स्थापित हुआ फॉरेंसिक संस्थान

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले जिस भूमि पर भू-माफिया का कब्जा था, उसे मुक्त कराकर वहां यह संस्थान स्थापित किया गया। आज यह प्रदेश में वैज्ञानिक जांच और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने का केंद्र बन रहा है। संस्थान में फॉरेंसिक साइंस के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक जैसी आधुनिक विधाओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की गई है। यहां डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक जैसे नए क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने को भी समय की आवश्यकता बताया।

हर जिले में दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन, प्रयोगशालाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वैज्ञानिक जांच की क्षमता बढ़ाने के लिए नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। प्रत्येक जिले में दो-दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन उपलब्ध कराई गई हैं। पर्याप्त मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक के जरिए घटनास्थल पर समय से पहुंचकर साक्ष्य जुटाने की व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

निष्पक्ष चयन से मिली नौकरी, अब ईमानदारी से पीड़ितों को दिलाएं न्याय : योगी

उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से कहा कि सरकार जिस उद्देश्य से यह आधारभूत ढांचा तैयार कर रही है, उसकी सफलता उनकी ईमानदारी और कार्यकुशलता पर निर्भर करेगी। उनका दायित्व है कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज शासन तक पहुंचे और उसे न्याय मिले।

साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली से ठीक पहले नियुक्ति पत्र मिलना चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के लिए खुशी का अवसर है। प्रदेश सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई है। अगले छह माह में भी एक लाख नियुक्ति पत्र वितरित करने का लक्ष्य घोषित किया गया है। यह कार्यक्रम उसी निरंतर प्रक्रिया की एक कड़ी है। उन्होंने बताया कि यह छठा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है और अगले दिन उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक और बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित होगा।

कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण और अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं भगवान स्वरूप उपस्थित रहे।

28 नवचयनित वैज्ञानिक अधिकारियों को मिले नियुक्ति पत्र

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें डॉ. गरिमा सिंह, डॉ. कुमुदिनी बाला गौतम, पवन कुमार प्रजापति, डॉ. कपिल वर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार तिवारी, रवि गुप्ता, शशांक शेखर तिवारी और डॉ. अतुल कुमार सहित अन्य चयनित अभ्यर्थी शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

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