स्कूल में छह साल की बच्ची पर बेरहमी से हमला

स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज

अमित राघव Picture
Published On

स्कूल में छह साल की बच्ची पर बेरहमी से हमला: फ्री फायर गेम खेलने का शौकीन था आठ वर्षीय छात्र, स्कूल प्रबंधन पर गिरी गाज

स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज, दो शिक्षिकाएं निलंबित; सरकार ने गठित की दो जांच कमेटियां, पीजीआई में बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी हरियाणा सरकार

पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला स्थित एक सरकारी स्कूल में छह वर्षीय विशेष जरूरतों वाली बच्ची पर आठ वर्षीय छात्र द्वारा किए गए गंभीर हमले के मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बच्ची के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शनिवार को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं, शिक्षा विभाग ने लापरवाही के आरोपों के बीच दो शिक्षिकाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, 28 अक्तूबर को स्कूल में आठ वर्षीय छात्र ने छह वर्षीय बच्ची पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। बच्ची के चेहरे और नाक में फ्रैक्चर सहित कई गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद उसे पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। करीब 36 घंटे बाद बच्ची को होश आया। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर, दो शिक्षिकाएं निलंबित

बच्ची के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शनिवार को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। स्कूल पर बच्चों की सुरक्षा और देखभाल में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है। परिजनों का कहना है कि स्कूल परिसर में इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद किसी शिक्षक या कर्मचारी को इसकी जानकारी नहीं मिली और बच्ची काफी समय तक घायल अवस्था में कमरे में पड़ी रही।

 भाजपा जिला कार्यालय पर ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान की तैयारी बैठक हुई  Read More  भाजपा जिला कार्यालय पर ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान की तैयारी बैठक हुई 

मामले में शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए बच्ची की कक्षा इंचार्ज सिमरनजीत और हमला करने वाले छात्र की कक्षा इंचार्ज पूजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा स्कूल के प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शिक्षा निदेशक जितेंद्र दहिया को पत्र भेजा गया है।

विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर केंद्र ने बनाई उच्चस्तरीय बैंकिंग समिति Read More विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर केंद्र ने बनाई उच्चस्तरीय बैंकिंग समिति

शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के निर्देश पर मामले की जांच के लिए दो अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है। शिक्षा विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

भारत में लॉन्च हुई Maserati Grecale Facelift, 530hp इंजन और 285 किमी प्रति घंटे की रफ्तार Read More भारत में लॉन्च हुई Maserati Grecale Facelift, 530hp इंजन और 285 किमी प्रति घंटे की रफ्तार

जांच के दौरान स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की ड्यूटी, कक्षाओं में निगरानी और घटना के समय मौजूद कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

घटना की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर 28 अक्तूबर को हुई घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने स्कूल में बच्चों की निगरानी व्यवस्था, घटना के समय मौजूद शिक्षकों और कर्मचारियों की भूमिका, घटना के बाद उठाए गए तत्काल कदमों, सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता और स्कूल के ड्यूटी रोस्टर का ब्योरा मांगा है।

आयोग की अध्यक्ष त्रिप्ति हरिपाल श्योराण ने शनिवार को पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचकर घायल बच्ची के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार से घटना की जानकारी ली और बच्ची के स्वास्थ्य तथा उपचार की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की।

पीजीआई में उपचाराधीन बच्ची, सरकार उठाएगी इलाज का पूरा खर्च

हमले में बच्ची को चेहरे और नाक में फ्रैक्चर सहित गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद उसे पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, बच्ची को करीब 36 घंटे बाद होश आया। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार जारी है और उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

हरियाणा सरकार ने बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा परिवार की सहायता और उपचार से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाओं के समन्वय के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया गया है, ताकि परिजनों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सवा तीन मिनट का सीसीटीवी फुटेज वायरल, बच्ची पर लगातार किया हमला

28 अक्तूबर को हुई घटना का करीब सवा तीन मिनट का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि आठ वर्षीय छात्र पहले बच्ची का सिर बेंच पर पटकता है। इसके बाद वह उस पर लात-घूंसों से हमला करता है। इस दौरान कई बार बच्ची के बाल पकड़कर उसे घसीटता भी दिखाई देता है।

वीडियो में छात्र द्वारा ईंट और डस्टबीन से बच्ची पर कई बार प्रहार किए जाने की बात भी सामने आई है। बच्ची के अचेत होने के बाद भी हमला जारी रहने की जानकारी फुटेज के आधार पर सामने आई है।

इस घटना ने स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूल परिसर में इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद किसी शिक्षक या कर्मचारी को समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली।

ऑटो चालक बच्ची को लेने पहुंचा तो हुआ घटना का खुलासा

घटना का खुलासा तब हुआ जब स्कूल की छुट्टी के बाद ऑटो चालक बच्ची को लेने पहुंचा, लेकिन बच्ची वहां नहीं मिली। काफी तलाश करने के बावजूद जब उसका पता नहीं चला तो बच्ची के पिता भी स्कूल पहुंचे और उसकी खोजबीन शुरू की।

तलाश के दौरान पहली मंजिल पर स्थित एक कमरे में बच्ची गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। वह खून से लथपथ पड़ी थी। इसके बाद उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

बच्ची के परिजनों के अनुसार, आरोपी छात्र उसे कमरे में ले गया था, जहां उसके सिर और चेहरे पर ईंट से कई वार किए गए। हमले के बाद बच्ची गंभीर रूप से घायल होकर कमरे में ही पड़ी रही।

स्कूल बंद करते समय कमरे की जांच नहीं करने का आरोप

मामले में स्कूल प्रशासन की लापरवाही का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि स्कूल बंद करते समय चौकीदार ने पहली मंजिल के कमरे के अंदर जांच तक नहीं की। दरवाजे की कुंडी लगी देखकर उसने बाहर से ताला लगा दिया और वहां से चला गया।

बच्ची के चाचा के अनुसार, काफी देर बाद जब ऑटो चालक उसे लेने पहुंचा तो वह स्कूल में नहीं मिली। तलाश के दौरान पहली मंजिल के कमरे पर बाहर से ताला लगा मिला। कमरा खुलवाने पर बच्ची अंदर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ी थी।

इस खुलासे के बाद स्कूल में छुट्टी के समय बच्चों की उपस्थिति की जांच, सभी कमरों का निरीक्षण और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि स्कूल बंद करने से पहले सभी कक्षाओं की उचित जांच क्यों नहीं की गई।

दो कक्षाओं के करीब 80 बच्चों को एक साथ पढ़ाने का मामला आया सामने

शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में स्कूल की व्यवस्था से जुड़ी एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच के अनुसार, घटना के समय बाल वाटिका की दो अलग-अलग कक्षाओं के करीब 80 बच्चों को एक साथ पढ़ाया जा रहा था।

इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को एक ही स्थान पर पढ़ाने के दौरान उनकी उचित निगरानी किस प्रकार की जा रही थी, यह भी जांच का विषय है। विभागीय कमेटियां इस बात की पड़ताल करेंगी कि निर्धारित शिक्षकों की उपलब्धता, कक्षाओं के संचालन और बच्चों की देखभाल से संबंधित नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

फ्री फायर गेम खेलने का शौकीन था आठ वर्षीय छात्र

मामले की जांच के दौरान आठ वर्षीय छात्र की मोबाइल गतिविधियों और दिनचर्या से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि बच्चा मोबाइल पर ऑनलाइन बैटल रॉयल गेम फ्री फायर खेलने का शौकीन था। हालांकि, करीब डेढ़ महीने पहले परिजनों ने उसे मोबाइल देना बंद कर दिया था।

इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस बच्चे के व्यवहार और मानसिक स्थिति से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। उसकी मानसिक स्थिति का आकलन कराने के लिए मनोचिकित्सक की राय भी ली जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले बच्चे के व्यवहार में कोई असामान्य बदलाव आया था या नहीं। इसके साथ ही उसके पारिवारिक माहौल, दैनिक गतिविधियों और स्कूल में अन्य बच्चों के साथ उसके व्यवहार की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

वहीं, पड़ोसियों के अनुसार बच्चा सामान्य स्वभाव का था। वह गली में दूसरे बच्चों के साथ खेलता था और पहले कभी उसके व्यवहार में इस तरह की आक्रामकता देखने को नहीं मिली थी।

हालांकि, फिलहाल मोबाइल गेम खेलने और स्कूल में हुई इस घटना के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। बच्चे के व्यवहार को समझने के लिए उसके पारिवारिक और सामाजिक वातावरण की भी पड़ताल की जा रही है।

क्या है फ्री फायर गेम?

फ्री फायर एक लोकप्रिय ऑनलाइन एक्शन और शूटिंग गेम है, जिसे बैटल रॉयल गेम की श्रेणी में रखा जाता है। इस गेम में खिलाड़ी पैराशूट के माध्यम से एक द्वीप पर उतरते हैं और वहां हथियार, गोलियां तथा अन्य जरूरी सामान जुटाते हैं। इसके बाद खिलाड़ियों के बीच मुकाबला होता है। गेम का उद्देश्य अंत तक मुकाबले में बने रहना होता है।

इसमें खिलाड़ी अकेले या दोस्तों के साथ टीम बनाकर भी खेल सकते हैं। गेम में मुकाबले और रणनीति से जुड़े कई पहलू शामिल होते हैं। हालांकि, आठ वर्षीय छात्र के गेम खेलने और इस घटना के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में केवल गेम खेलने की आदत को घटना का कारण मानना उचित नहीं होगा। पुलिस बच्चे की मानसिक स्थिति, पारिवारिक वातावरण और व्यवहार से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पंचकूला के सरकारी स्कूल में हुई यह घटना शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। स्कूलों की जिम्मेदारी केवल बच्चों को शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। ऐसे में स्कूल परिसर में इस तरह की घटना होना और उसके बाद घायल बच्ची का लंबे समय तक कमरे में पड़े रहना बेहद चिंताजनक है।

घटना के दौरान शिक्षकों की निगरानी, स्कूल कर्मचारियों की जिम्मेदारी, छुट्टी के समय कमरों की जांच और बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सवाल उठ रहे हैं। अब शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना के समय स्कूल में कौन-कौन कर्मचारी मौजूद थे और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।

सरकार ने मामले में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया है। फिलहाल घायल बच्ची का पीजीआई चंडीगढ़ में उपचार जारी है और पुलिस के साथ-साथ शिक्षा विभाग भी मामले की जांच में जुटा हुआ है।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें