मंदिर का दानपात्र काटकर चोरी, एक साल से चोरियों का सिलसिला; पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
“मंदिर का दानपात्र भी नहीं बचा! सुखईपुर में एक साल से चोरी का सिलसिला, पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल”
CCTV फुटेज और घटनास्थल के पास मिले सिक्के बने अहम सुराग, 9 अगस्त की चोरी के बाद 7 अक्टूबर को थाने पहुंचा प्रार्थना पत्र”
सुखईपुर में बेखौफ चोरों का आतंक, मंदिर परिसर भी नहीं सुरक्षित; CCTV फुटेज और मौके से मिले सिक्कों के बावजूद कार्रवाई का इंतजार
सुखईपुर -अम्बेडकरनगर।
महरुआ थाना क्षेत्र के ग्राम सुखईपुर में चोरी की लगातार हो रही घटनाओं ने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव और आसपास के क्षेत्र में पिछले करीब एक वर्ष से छोटी-बड़ी चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में चोरों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। अब चोरों ने धार्मिक स्थल को भी निशाना बनाते हुए मंदिर परिसर में रखे लोहे के दानपात्र को काटकर उसमें रखी दानराशि चोरी कर ली।
शिव काली जागरण समिति की ओर से महरुआ थाने में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार यह घटना **9 अगस्त 2026 की रात** सुखईपुर स्थित मंदिर परिसर में हुई। अज्ञात चोरों ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा एवं धार्मिक कार्यों के लिए रखे गए लोहे के दानपात्र को कथित रूप से काट दिया और उसमें मौजूद दानराशि लेकर फरार हो गए।
सुबह हुई चोरी की जानकारी, 112 पर दी गई सूचना
ग्रामीणों को घटना की जानकारी 10 अगस्त की सुबह लगभग सात बजे हुई। मंदिर परिसर में दानपात्र की स्थिति देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। मामले की सूचना तत्काल पुलिस सहायता नंबर 112 पर दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। मंदिर परिसर के आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग भी पुलिस द्वारा अपने कब्जे में लेकर जांच का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है।
लेकिन घटना के बाद अब तक मामले में प्रभावी कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में असंतोष है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब घटना के आसपास CCTV कैमरे मौजूद हैं और पुलिस के पास रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने की बात कही गई है, तो फिर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में क्या कार्रवाई हुई?

एक साल से लगातार चोरी, आखिर पुलिस कर क्या रही है?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि मंदिर में चोरी की यह घटना क्षेत्र में चोरी की कथित घटनाओं की लंबी कड़ी के बीच सामने आई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब एक वर्ष से सुखईपुर और आसपास के इलाकों में लगातार चोरी की घटनाएं हो रही हैं।** खेतों से झटका मशीन और मोटर, बिजली के तार, हैंडपंप की टोटियां, घरों के बाहर खड़े वाहनों से बैटरी और तेल तथा मंदिरों में रखे छोटे-मोटे सामान चोरी किए जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक शुरुआत में इन घटनाओं को छोटी चोरी समझकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन घटनाओं की लगातार पुनरावृत्ति अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
लोगों का कहना है कि यदि एक ही क्षेत्र में लंबे समय से चोरी की घटनाएं लगातार हो रही हैं तो पुलिस को घटनाओं का पैटर्न समझते हुए संदिग्धों की पहचान, रात्रि गश्त और स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ानी चाहिए थी।
मंदिर भी नहीं बचा तो आम आदमी कितना सुरक्षित?

मंदिर को ग्रामीणों की आस्था का केंद्र माना जाता है। ऐसे स्थान पर रखे दानपात्र को काटकर चोरी किए जाने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब चोर मंदिर परिसर तक पहुंचकर दानपात्र काटने का दुस्साहस कर सकते हैं, तो गांव के घर, खेत और सड़क किनारे खड़े वाहन कितने सुरक्षित हैं, यह बड़ा सवाल है।
यह घटना केवल दानराशि की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के अनुसार इससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का विश्वास भी प्रभावित हुआ है।
घटनास्थल के पास मिले सिक्के, CCTV भी मौजूद
शिकायत में एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख किया गया है। मंदिर परिसर के समीप एक घर के पास कुछ सिक्के मिलने की बात कही गई है। इससे ग्रामीणों को आशंका है कि चोरी के बाद आरोपी उस क्षेत्र से होकर गुजरे होंगे।
यदि बरामद सिक्के वास्तव में चोरी हुए दानपात्र की रकम से संबंधित पाए जाते हैं, तो वे जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। इसके साथ ही आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग भी घटना की जांच में अहम भूमिका निभा सकती है।
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अब पुलिस के सामने यह चुनौती है कि CCTV फुटेज में दिखाई देने वाले संदिग्धों की पहचान कैसे की जाती है और घटना के समय क्षेत्र में मौजूद लोगों की गतिविधियों की जांच किस स्तर तक की जाती है।
दो-तीन लोगों के शामिल होने की आशंका
शिकायतकर्ता ने घटना के तरीके और परिस्थितियों के आधार पर आशंका जताई है कि वारदात में **दो से तीन लोग** शामिल हो सकते हैं। यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि यही लोग क्षेत्र में पहले हुई अन्य चोरी की घटनाओं में भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि आरोपियों की वास्तविक पहचान और अन्य घटनाओं से उनका संबंध पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। ऐसे में CCTV फुटेज, घटनास्थल से मिले सामान, बरामद सिक्कों तथा अन्य भौतिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस की कार्रवाई पर ग्रामीणों के सवाल
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है।
यदि 9 अगस्त की रात चोरी हुई, 10 अगस्त की सुबह घटना की जानकारी पुलिस को दी गई, मौके पर पुलिस पहुंची और CCTV फुटेज भी उपलब्ध है, तो दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी मामले में क्या प्रगति हुई?
क्या CCTV फुटेज की जांच पूरी हुई?
क्या संदिग्धों की पहचान की गई?
क्या आसपास के थानों में हुई समान घटनाओं से इस मामले का मिलान कराया गया?
क्या पुराने चोरी के मामलों के आरोपियों या संदिग्धों से पूछताछ की गई?
क्या घटनास्थल से मिले सिक्कों को जांच के लिए भेजा गया?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या इस घटना में FIR दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू की गई?
इन सवालों का जवाब ग्रामीण पुलिस से चाहते हैं।
ग्रामीणों ने थाना प्रभारी को दिया प्रार्थना पत्र
शिव काली जागरण समिति के प्रार्थी ने 7 अक्टूबर 2026 को थाना महरुआ के प्रभारी निरीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर मामले में तत्काल FIR दर्ज करने तथा अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
प्रार्थना पत्र में केवल मंदिर में हुई चोरी की जांच की मांग नहीं की गई है, बल्कि पिछले करीब एक वर्ष से गांव में हो रही चोरी की घटनाओं को भी गंभीरता से लेते हुए उनकी जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस से CCTV फुटेज, बरामद सिक्कों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई करने तथा गांव में रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग की है।
अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
महरुआ पुलिस के सामने अब केवल एक मंदिर चोरी की घटना का खुलासा करने की चुनौती नहीं है, बल्कि ग्रामीणों द्वारा पिछले एक वर्ष से लगाए जा रहे लगातार चोरी के आरोपों की भी जांच करना जरूरी है। यदि अलग-अलग चोरी की घटनाओं के पीछे एक ही गिरोह या कुछ समान संदिग्धों की भूमिका सामने आती है तो पुलिस को इन घटनाओं को आपस में जोड़कर जांच करनी होगी।
वहीं यदि घटनाएं अलग-अलग हैं तो भी लगातार चोरी की शिकायतों के बावजूद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से गांव और आसपास के क्षेत्र में रात्रि गश्त बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने तथा मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की सक्रिय गश्त से न केवल चोरी की घटनाओं पर रोक लग सकती है बल्कि लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी कायम होगा।
बड़ा सवाल: कार्रवाई कब?
सुखईपुर की इस घटना ने स्थानीय कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ ग्रामीण पिछले करीब एक वर्ष से चोरी की घटनाओं से परेशान होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मंदिर के दानपात्र को काटकर चोरी किए जाने की घटना ने स्थिति की गंभीरता और बढ़ा दी है।
अब देखना यह है कि महरुआ पुलिस CCTV फुटेज, घटनास्थल से मिले संभावित साक्ष्यों और ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर कब तक आरोपियों तक पहुंचती है।
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—चोरी की घटनाओं पर तत्काल रोक लगे, मंदिर चोरी का खुलासा हो और यदि किसी स्तर पर पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जिम्मेदारी तय की जाए।


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