दिल्ली में फर्जी जॉब कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले दो फर्जी जॉब-प्लेसमेंट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ, साइबर पुलिस स्टेशन और रंजीत नगर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने दोनों ठिकानों से 13 कंप्यूटर सिस्टम, पांच मोबाइल फोन, कॉलिंग सॉफ्टवेयर, नौकरी तलाशने वाले लोगों का डेटा और कई डिजिटल व वित्तीय साक्ष्य बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, दोनों कॉल सेंटर रंजीत नगर इलाके में शादीपुर मेट्रो स्टेशन के पास लाल रतन बिल्डिंग से संचालित किए जा रहे थे। यहां आरोपी खुद को नौकरी दिलाने वाली एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर बेरोजगारों से संपर्क करते थे और उन्हें आकर्षक नौकरी का ऑफर देते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अलग-अलग रकम वसूली जाती थी।
तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने मारा छापा
पुलिस को 3 सितंबर को रंजीत नगर इलाके में संदिग्ध जॉब-प्लेसमेंट कॉल सेंटर चलाए जाने की सूचना मिली थी। सूचना की पुष्टि और आवश्यक कार्रवाई के लिए पुलिस ने टीमें गठित कीं। रंजीत नगर थाना और स्पेशल स्टाफ की टीम ने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की जांच शुरू की।
तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नौकरी से जुड़ी बड़ी संख्या में कॉल एक ही स्थान से की जा रही थीं। इसके बाद तकनीकी जानकारी और मौके पर किए गए सत्यापन के आधार पर संदिग्ध परिसर पर छापा मारा गया।
Read More मंधना स्टेशन बनेगा बड़ा टर्मिनल! एलिवेटेड कॉरिडोर से पहले पार्किंग-ट्रांसपोर्ट की तैयारी तेजपहले कॉल सेंटर में पुलिस को चार महिलाएं और दो पुरुष मिले। पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। कार्यालय की तलाशी के दौरान नौकरी तलाशने वालों से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कंप्यूटर सिस्टम, कॉलिंग एप्लिकेशन और अन्य डिजिटल सामग्री बरामद की गई।
नौकरी का झांसा देकर पहले भरोसा जीतते थे
जांच में सामने आया कि आरोपी ऑनलाइन जॉब-सर्च और रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म से नौकरी तलाशने वाले लोगों का डेटा हासिल करते थे। इसके बाद कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को रिक्रूटर बताकर संभावित उम्मीदवारों से फोन पर संपर्क करते थे।
कॉल के दौरान बेरोजगारों को आकर्षक नौकरी और बेहतर पैकेज का लालच दिया जाता था। उम्मीदवारों को अपने जाल में फंसाने के बाद उनसे अलग-अलग पैकेज के नाम पर रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस जमा कराई जाती थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने 3,500 रुपये, 1,400 रुपये और 1,200 रुपये तक की अलग-अलग रकम मांगी। पैसे जमा होने के बाद कॉल सेंटर के कर्मचारी कुछ दिनों तक उम्मीदवारों से संपर्क में रहते और नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ने का भरोसा दिलाते थे। इसके बाद अचानक उनसे संपर्क बंद कर दिया जाता था और नौकरी नहीं दी जाती थी।
दूसरे कॉल सेंटर पर भी पुलिस की कार्रवाई
इसी दौरान स्पेशल स्टाफ और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन की संयुक्त टीम को उसी बिल्डिंग से संचालित एक अन्य संदिग्ध जॉब-प्लेसमेंट कॉल सेंटर की जानकारी मिली। पुलिस ने वहां भी छापा मारा।
दूसरे कार्यालय में पांच पुरुष कर्मचारी कॉलिंग क्यूबिकल्स में काम करते हुए मिले। पुलिस ने जब उनसे कंपनी की वैधता से संबंधित कॉर्पोरेट ऑथराइजेशन लेटर, प्लेसमेंट एग्रीमेंट और वास्तविक रूप से नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों के रिकॉर्ड मांगे तो वे कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके।
कार्यालय में रखे कंप्यूटरों की जांच के दौरान कॉलिंग सॉफ्टवेयर और नौकरी तलाशने वालों का डेटा मिला। इसके बाद पांचों कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने लाया गया।
11 आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने दोनों फर्जी कॉल सेंटरों से कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। पहले कॉल सेंटर से अर्पित, सकीना, करिश्मा, मीनाक्षी, चंचल और अशोक को पकड़ा गया। वहीं, दूसरे कॉल सेंटर से आसिम, संदीप, गौरव मलिक, ज्ञान सिंह और रोहित को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अब इस नेटवर्क के पीछे काम कर रहे मुख्य आरोपियों और मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
डेटा कहां से मिला, पैसों का लेन-देन भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नौकरी तलाशने वाले लोगों का डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचा। पुलिस जब्त किए गए कंप्यूटर और मोबाइल फोन की तकनीकी जांच कर रही है। साथ ही, उम्मीदवारों से वसूली गई रकम के लेन-देन और उससे जुड़े बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित फर्जी जॉब-प्लेसमेंट नेटवर्क में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कितने लोग शामिल हैं। दोनों कॉल सेंटरों के संचालन, डेटा के स्रोत और ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।
पुलिस के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं से भी ऐसे किसी ऑफर पर पैसे जमा करने से पहले कंपनी और नौकरी की पूरी जानकारी की पुष्टि करने की अपील की गई है।


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