अयोध्या में जलने वाला हर दीप प्रदेश की समृद्धि और विकास का प्रतीक: योगी

पीलीभीत में श्रीराम कथा महोत्सव में बोले मुख्यमंत्री, आस्था को बताया भारत की सबसे बड़ी ताकत; कहा- बिना भेदभाव हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचना ही रामराज्य

हर्षिता यादव  Picture
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पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में प्रज्ज्वलित होने वाला एक-एक दीप पूरे उत्तर प्रदेश की समृद्धि और विकास का कारण बनता है। दीपोत्सव में जलने वाले दीप केवल भगवान श्रीराम के आगमन की स्मृति नहीं, बल्कि प्रदेश की खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य के प्रतीक भी हैं। आस्था भारत की सबसे बड़ी ताकत है, जिसने विविधताओं से भरे देश को एकता के सूत्र में बांध रखा है।

मुख्यमंत्री मंगलवार को पीलीभीत के निरानपुर गांव में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की और विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ पर विराजमान संत अंजनी शरण जी को वस्त्र एवं फल भेंटकर सम्मानित किया और रामकथा का श्रवण भी किया।

आस्था ने विविधताओं के बावजूद देश को एक सूत्र में बांधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के करीब 200 देशों की अपनी अलग पहचान और विशेषताएं हैं, लेकिन भारत की विशेषता यह है कि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भाषा, वेशभूषा और रहन-सहन में विविधता होने के बावजूद पूरा देश एक भाव से जुड़ा हुआ है। इस एकता का सबसे बड़ा आधार हमारी आस्था और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। यही शक्ति आज लाखों लोगों को श्रीराम कथा जैसे आयोजनों से जोड़ती है।

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उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत और श्रीराम कथा की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। गोस्वामी तुलसीदास ने गुलामी के दौर में रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाया, जो आज भी गांव-गांव में उत्साह के साथ आयोजित होती है। अखंड रामायण पाठ और धार्मिक आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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पांच सौ वर्षों के संघर्ष के बाद साकार हुआ राम मंदिर का संकल्प

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मुख्यमंत्री ने कहा कि रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए पांच सौ वर्षों तक संघर्ष चला। अंततः जब पूरा देश एक स्वर में खड़ा हुआ तो अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने दो नवंबर 1990 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। उस दौर में अयोध्या में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। संकरी गलियां, खराब सड़कें और अव्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के सामने बड़ी चुनौती थीं।

उन्होंने कहा कि आज अयोध्या का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर रहे हैं, जबकि पर्वों और त्योहारों पर यह संख्या कई लाख तक पहुंच जाती है। अयोध्या में चारों दिशाओं से बेहतर सड़क संपर्क, रेल सुविधाओं और हवाई सेवा का विस्तार हुआ है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलती थीं, आज उनका स्वागत पुष्पवर्षा से होता है।

सकारात्मक सोच से ही खुलता है विकास और समृद्धि का मार्ग

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामकथा का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना है। श्रद्धा और आस्था से ज्ञान प्राप्त होता है। जहां नकारात्मकता होती है, वहां अराजकता, अव्यवस्था, अशांति और असंतोष पैदा होता है। इसके विपरीत सकारात्मक सोच से श्रद्धा, विश्वास और प्रकाश का संचार होता है। यही भाव विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ पहुंचना ही रामराज्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामराज्य की वास्तविक अवधारणा यह है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचे। गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, युवाओं को रोजगार, किसानों को सम्मान निधि और बेटियों तथा व्यापारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराना सुशासन का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में लोगों को राशन, बिजली, सड़क और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता था। त्योहारों के दौरान उपद्रव और दंगों की स्थिति बनती थी। आज प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया है और विकास योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

तुष्टीकरण नहीं, संतुष्टीकरण से मजबूत हो रहा देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति से आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद को बढ़ावा मिला, जबकि संतुष्टीकरण का भाव प्रत्येक नागरिक तक बिना भेदभाव सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का माध्यम बना है। इसी सोच से एक भारत-श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या के साथ काशी, मथुरा-वृंदावन और विंध्यवासिनी धाम सहित प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार हुआ है। मथुरा-वृंदावन में विकास कार्य हो रहे हैं, जबकि मां विंध्यवासिनी धाम में भी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। गोला गोकर्णनाथ में कॉरिडोर का निर्माण और बरेली की नाथ नगरी के रूप में पहचान को आगे बढ़ाने का काम हो रहा है।

महर्षि वाल्मीकि ने दुनिया को दिया श्रीराम के आदर्शों का संदेश

मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आदि रामायण की रचना कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को पूरी दुनिया तक पहुंचाया। आज दुनिया की अनेक भाषाओं में रामायण लिखी जा चुकी है, लेकिन इसका मूल आधार महर्षि वाल्मीकि की रचना है। उन्होंने कहा कि 'रामो विग्रहवान धर्मः' का संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। पुत्र, भाई, गुरु, शिष्य और समाज के महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में मर्यादित आचरण की सीख प्रभु श्रीराम के जीवन से मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भक्ति का भाव देखना हो तो मथुरा-वृंदावन जाइए, जहां श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं और वातावरण कृष्णमय रहता है। वहीं जीवन की मर्यादा का सर्वोच्च आदर्श अयोध्या में प्रभु श्रीराम के चरित्र में दिखाई देता है।

ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी को किया याद

मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे सहज स्वभाव के फक्कड़ और निराले संत थे। अच्छे कार्यों में उनका सदैव सहयोग रहता था। जीवन नश्वर है और प्रत्येक व्यक्ति को एक दिन इस सत्य को स्वीकार करना पड़ता है।

इस अवसर पर शक्तिपीठ देवीपाटन के महंत मिथिलेश महाराज, हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत राजूदास, प्रदेश सरकार के मंत्री एवं पीलीभीत के प्रभारी मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, मंत्री संजय गंगवार, विधान परिषद सदस्य एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता, सहसंयोजक संजीव प्रताप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, विधायक विवेक वर्मा, बाबूराम पासवान, स्वामी प्रवक्तानंद, जिला पंचायत प्रशासक दलजीत कौर सहित संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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