स्पेशल टीईटी में शिक्षामित्रों को मौका नहीं

हाई कोर्ट ने खारिज की 221 याचिकाएं

हर्षिता यादव  Picture
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में शिक्षामित्रों को शामिल किए जाने की मांग को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने वसीम अहमद समेत 220 अन्य शिक्षामित्रों की याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सामान्य टीईटी में बैठने की पात्रता मात्र से स्पेशल टीईटी में शामिल होने का अधिकार नहीं बनता। कोर्ट ने शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति को सेवारत शिक्षकों से अलग माना और कहा कि वैध उद्देश्य पर आधारित वर्गीकरण को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता।

तीन सितंबर को जारी हुआ था परीक्षा का विज्ञापन

राज्य सरकार ने दो सितंबर 2026 को शासनादेश जारी कर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को स्पेशल टीईटी आयोजित कराने के निर्देश दिए थे। इसके अगले दिन यानी तीन सितंबर को परीक्षा का विज्ञापन जारी किया गया। परीक्षा तीन नवंबर 2026 से प्रस्तावित है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे करीब 26 वर्षों से परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें भी इस परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए।

शिक्षामित्रों ने समान अवसर की मांग उठाई

याचियों की ओर से दलील दी गई कि स्पेशल टीईटी में स्थानीय निकायों के शिक्षक, राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक, सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए कार्यरत संविदा और दैनिक वेतनभोगी विशेष शिक्षकों को अवसर दिया गया है। ऐसे में लंबे समय से विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को इससे अलग रखना उचित नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र मामले में टीईटी को लेकर दिए गए निर्देशों का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि जब सेवारत शिक्षकों को निर्धारित अवधि में टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर दिया गया है तो शिक्षामित्रों को भी स्पेशल टीईटी में बैठने की अनुमति मिलनी चाहिए।

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सरकार और आयोग ने बताया कानूनी अंतर

राज्य सरकार और शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से अदालत में कहा गया कि स्पेशल टीईटी का प्रावधान शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 23 तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में किया गया है। इसका उद्देश्य पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत शिक्षकों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक पात्रता हासिल करने का अवसर देना है।

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सरकार का तर्क था कि शिक्षामित्र नियमित शिक्षक के समान कानूनी श्रेणी में नहीं आते। सामान्य टीईटी दो, तीन और चार जुलाई 2026 को आयोजित हो चुका है, जिसमें करीब 19.95 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इसका परिणाम 26 अगस्त को जारी किया गया। सरकार के अनुसार याचिकाकर्ता सामान्य टीईटी में शामिल हो सकते थे, लेकिन उन्होंने उसमें हिस्सा नहीं लिया।

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कोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने माना कि दो सितंबर का शासनादेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 23 और सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों के अनुरूप जारी किया गया है। अदालत के अनुसार सेवारत शिक्षकों और अन्य श्रेणी के लोगों के बीच किया गया वर्गीकरण स्पष्ट कानूनी आधार पर है और इसका उद्देश्य भी वैध है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्पेशल टीईटी किसी व्यक्ति को नियुक्ति का अधिकार नहीं देता, बल्कि पहले से सेवारत पात्र शिक्षकों को निर्धारित अवधि में आवश्यक योग्यता पूरी करने का अवसर प्रदान करता है। इसलिए शिक्षामित्र सामान्य टीईटी के लिए पात्र होने के आधार पर स्पेशल टीईटी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते।

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