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योगी सरकार में पहली बार निकली मां कौशल्या की शोभायात्रा
अक्षय तृतीया पर कौशल्या महिला मंडल ने की पहल, माता कौशल्या के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का उद्देश्य
अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिल रही है। राम मंदिर निर्माण और दीपोत्सव जैसे भव्य आयोजनों के साथ अब रामायण कालीन परंपराओं और उनसे जुड़े पात्रों के गौरव को भी सामने लाने की पहल हो रही है। इसी कड़ी में अक्षय तृतीया पर पहली बार माता कौशल्या और रामलला को समर्पित शोभायात्रा निकाली गई। कौशल्या महिला मंडल की ओर से आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य भगवान श्रीराम की जननी माता कौशल्या के गौरव और उनके धार्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है।
महिला संत डॉ. सुनीता शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया से त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। इसी युग में भगवान श्रीराम ने माता कौशल्या के गर्भ से अवतार लिया। इस धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए शोभायात्रा निकालने का संकल्प लिया गया, ताकि माता कौशल्या के योगदान और उनके गौरव को व्यापक पहचान मिल सके।
माता कौशल्या के गौरव को सामने लाने की पहल
डॉ. सुनीता शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के साथ उनकी जननी माता कौशल्या के गौरव को भी समाज के सामने लाना जरूरी है। इसी सोच के साथ कौशल्या महिला मंडल ने अक्षय तृतीया पर पहली बार शोभायात्रा का आयोजन किया। इसके माध्यम से माता कौशल्या के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से लोगों को परिचित कराने का प्रयास किया गया।
धार्मिक आयोजनों को मिल रहा नया मंच
महिला संत ने बताया कि शोभायात्रा के आयोजन में डॉ. अनिल मिश्र और राम जन्मभूमि से जुड़े नरेंद्र जी का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, दीपोत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों ने सांस्कृतिक विरासत को नया मंच दिया है। इसी वातावरण में रामायण से जुड़े पात्रों और परंपराओं को भी व्यापक पहचान मिल रही है।


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