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शिकागो में सुनी अयोध्या की महिमा, सरयू तट पर जलाए आस्था के दीप
माता-पिता से रामनगरी की कहानी सुनकर पहुंचे पॉल, दोस्तों की प्रशंसा ने शेल्बे को किया आकर्षित
अयोध्या। अमेरिका के शिकागो में अयोध्या की महिमा सुनने वाले पॉल और उनकी दोस्त शेल्बे के लिए दीपोत्सव-2026 यादगार अनुभव बन गया। रामनगरी पहुंचे दोनों अमेरिकी मित्रों ने सरयू आरती में भाग लिया और राम की पैड़ी पर स्थानीय लोगों के साथ दीप जलाकर उत्सव मनाया। जिस अयोध्या की चर्चा उन्होंने अपने देश में सुनी थी, उसी नगरी में दीपोत्सव का हिस्सा बनकर उन्होंने यहां की आस्था, संस्कृति और परंपराओं को करीब से जाना।
पॉल ने बताया कि उनके माता-पिता अक्सर अयोध्या के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में बताते थे। उनसे रामनगरी की महिमा सुनकर उनके मन में इस पावन नगरी को देखने की इच्छा जागी। इस बार अयोध्या पहुंचकर उन्हें उन बातों को अपनी आंखों से देखने और अनुभव करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि अब तक अयोध्या के बारे में केवल सुना था, लेकिन यहां आकर उसकी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण को महसूस किया।
वहीं, शेल्बे ने बताया कि उनके दोस्तों ने अयोध्या की खूब प्रशंसा की थी। रामनगरी के प्राचीन इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे में सुनकर उनकी भी यहां आने की इच्छा हुई। इसी के बाद उन्होंने अपने दोस्त पॉल के साथ अयोध्या आने का निर्णय लिया।
सरयू आरती में शामिल होकर जलाए दीप
दोनों मित्रों की यात्रा का खास आकर्षण सरयू आरती रही। आरती में शामिल होने के बाद वे राम की पैड़ी पहुंचे, जहां स्थानीय लोगों के साथ दीप जलाकर दीपोत्सव की खुशियां साझा कीं। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को नजदीक से महसूस किया। अमेरिका में अयोध्या के बारे में सुनी बातें यहां आकर उनके लिए जीवंत अनुभव बन गईं।
पॉल और शेल्बे ने बताया कि उन्हें अमेरिका में अयोध्या के दीपोत्सव के बारे में भी जानकारी मिली थी। उन्होंने सुना था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य स्वरूप देने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाए जाने वाले इस आयोजन को देखने की उत्सुकता भी उनकी यात्रा की वजह बनी।
शेल्बे ने अयोध्या के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को अपनी यात्रा का प्रमुख आकर्षण बताया। पॉल के लिए माता-पिता से सुनी बातें यहां आकर अनुभव में बदल गईं, जबकि शेल्बे दोस्तों से मिली जानकारी के आधार पर रामनगरी पहुंचीं। अलग-अलग माध्यमों से अयोध्या की महिमा जानने वाले दोनों मित्रों ने दीपोत्सव में साथ हिस्सा लिया। उनके लिए इस बार अयोध्या केवल सुना हुआ नाम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और अपनत्व से जुड़ी यादगार यात्रा बन गई।


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