नवीनतम
फीचर्ड
राजनीति
भारत
श्रीरामजन्मभूमि मंदिर संपूर्ण हिंदू स्वाभिमान का स्मारक : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
दीपोत्सव के दसवें संस्करण में बोले उपराष्ट्रपति- रामभक्तों के त्याग और बलिदान से साकार हुआ मंदिर निर्माण का संकल्प
अयोध्या। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने श्रीरामजन्मभूमि मंदिर को संपूर्ण हिंदू स्वाभिमान का स्मारक बताते हुए कहा कि करीब 500 वर्षों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद आखिरकार श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है। रामभक्तों के महान त्याग और बलिदान के कारण ही नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री, योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और वह स्वयं भारत के उपराष्ट्रपति बने हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या आंदोलन से जुड़ा रामभक्तों का संघर्ष और साधु-संतों का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उपराष्ट्रपति शनिवार को अयोध्या धाम में दीपोत्सव के दसवें संस्करण के अवसर पर रामकथा पार्क में आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्री और बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि मंदिर और हिंदू स्वाभिमान की पुनर्स्थापना में साधु-संतों तथा संन्यासियों ने महान त्याग किया है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि धर्म, करुणा, सदाचार और आदर्श आचरण के शाश्वत प्रतीक हैं। उनका जीवन सिखाता है कि सच्ची महानता सत्ता और पद में नहीं, बल्कि चरित्र की दृढ़ता तथा कर्तव्य के प्रति समर्पण में होती है। श्रीराम ने व्यक्तिगत सुख से ऊपर कर्तव्य, निजी हित से ऊपर धर्म और हर परिस्थिति में प्रजा के कल्याण को प्राथमिकता दी।
जन्मभूमि पर मंदिर नहीं बनता तो फिर कहां बनता
राम मंदिर निर्माण के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्रीराम के जन्मस्थान पर मंदिर बनने में सदियां लग गईं। यदि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर नहीं बनता तो फिर कहां बनता? लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद आखिरकार श्रीराम की विजय हुई और आज उनकी जन्मभूमि पर भव्य मंदिर स्थापित है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि सभी के पूजनीय हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदू समाज में जन्म के आधार पर कोई बड़ा नहीं होता, बल्कि व्यक्ति की श्रेष्ठता उसके चरित्र से तय होती है। महर्षि वाल्मीकि साधारण परिवार से थे, लेकिन रामायण की रचना कर उन्होंने पूरी मानवता का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना, एक संत का मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना और छोटे किसान परिवार से आने वाले व्यक्ति का उपराष्ट्रपति बनना, रामभक्तों के त्याग और संघर्ष से जुड़े व्यापक सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण है।
मां के शिलापूजन की स्मृतियां कीं साझा
श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी पुरानी यादें साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि जब अशोक सिंघल ने देशभर में शिलापूजन का आह्वान किया था, तब उनके गृहक्षेत्र में उनकी मां पूजा समिति की प्रमुख बनी थीं। वह सिर पर ईंट रखकर पूरे क्षेत्र में गई थीं और अंत में अपने गृहनगर के गणेश मंदिर में शिलापूजन संपन्न कराया था। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी मां ने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका बेटा एक दिन भारत का उपराष्ट्रपति बनेगा और अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव समारोह में शामिल होगा।
देश की एकता और विविधता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल गुजरात से हैं, जबकि वह स्वयं दक्षिण भारत में रामेश्वरम के निकट से अयोध्या आए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संसद में बिताए दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि करीब 30 वर्ष पहले दोनों युवा सांसद थे और सदन में पास-पास बैठते थे। उस समय योगी आदित्यनाथ के भाषणों में जो ओज और प्रभाव था, वह आज भी कायम है।
योगी के नेतृत्व में बदली उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था
उपराष्ट्रपति ने केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ने मिलकर कई ऐसे कार्य किए हैं, जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं था और कानून-व्यवस्था पर गुंडों तथा उपद्रवियों का प्रभाव था। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था मजबूत हुई है और बेटियां आधी रात को भी सुरक्षित महसूस कर रही हैं।
उन्होंने वाराणसी के एक छोटे दुकानदार से हुई बातचीत का प्रसंग साझा किया। उपराष्ट्रपति के मुताबिक, दुकानदार ने उनसे कहा कि अब प्रदेश में किसी को डर नहीं है और बेटियां रात में भी निडर होकर सड़कों पर चल सकती हैं। दुकानदार ने बताया कि योगी सरकार से पहले वह खुद उपद्रवी गतिविधियों में शामिल था, लेकिन अब ऐसी गतिविधियों की गुंजाइश नहीं है। उसने अपनी पुरानी गतिविधियां छोड़कर छोटी दुकान खोल ली है और परिवार का भरण-पोषण कर रहा है। उपराष्ट्रपति ने इसे प्रदेश में आए बदलाव का उदाहरण बताया।
वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा प्रदेश
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या आज ‘विकास भी, विरासत भी’ के दृष्टिकोण का उदाहरण बन रही है। आध्यात्मिक नगरी को स्मार्ट सिटी और सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से अयोध्या को वैश्विक पहचान मिली है। पंचकोसी परिक्रमा मार्ग और रामकथा पार्क जैसे बुनियादी ढांचे के विकास से आध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में शांति और बेहतर कानून-व्यवस्था से विकास को गति मिली है। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई और कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में करीब नौ प्रतिशत योगदान दे रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजटीय प्रावधान प्रदेश सरकार के विकास संबंधी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि रामभक्तों और प्रदेश की जनता के सहयोग से उत्तर प्रदेश का एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य जल्द साकार होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख विकास वाहकों में शामिल होगा।
दुनिया में आगे बढ़ने के साथ सबका कल्याण भी हो लक्ष्य
दीपोत्सव के महत्व पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आयोजन केवल प्रतीकात्मक उत्सव नहीं, बल्कि हर भारतीय परिवार के लिए विशेष महत्व रखता है। दीपावली अंधकार को दूर कर प्रत्येक घर में खुशहाली और आशा का प्रकाश फैलाने का संदेश देती है। उन्होंने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्श समाज और राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्यों का मार्गदर्शन करते रहें।
उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य विश्व में अग्रणी बनना है, लेकिन यह किसी पर अपनी शर्तें थोपने या प्रभुत्व स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को साथ लेकर सबके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए होना चाहिए।


Comments