गांव-गांव तक पहुंचेगा ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ अभियान, स्थानीय पकवानों को मिलेगा वैश्विक बाजार : योगी
तहसील, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर होगी पारंपरिक व्यंजनों की पहचान; कारीगरों, हलवाइयों और महिलाओं को 20 लाख रुपये तक के ऋण से उद्यम शुरू करने का मिलेगा अवसर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और समृद्ध पाक कला को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ (ओडीओसी) अभियान का विस्तार अब तहसील, ब्लॉक और गांव स्तर तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के हर जिले की अपनी विशिष्ट खानपान परंपरा है। ऐसे अनेक स्थानीय व्यंजन हैं, जिन्हें अभी तक व्यापक पहचान और बाजार नहीं मिल सका है। सरकार का प्रयास है कि इन व्यंजनों की पहचान कर उन्हें आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए।
मुख्यमंत्री गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दैनिक जागरण की ओर से आयोजित ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बलिया का बाटी-चोखा, जौनपुर की इमरती समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों के पारंपरिक पकवानों में बड़े ब्रांड बनने की क्षमता है। जरूरत इनकी गुणवत्ता, शुद्धता और पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की है। जब उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होगी तो दुनिया खुद उत्तर प्रदेश के व्यंजनों की ओर आकर्षित होगी।
स्थानीय हुनर को सम्मान और बाजार से जोड़ना उद्देश्य
सीएम योगी ने आयोजन के लिए दैनिक जागरण परिवार का आभार जताते हुए कहा कि इस मंच ने प्रदेश के हलवाइयों, कारीगरों और घरों में पारंपरिक व्यंजन तैयार करने वाली महिलाओं को अपनी पाक कला प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि आगे वही संस्थान और व्यवस्था आगे बढ़ती है, जो जनता की नब्ज पहचानकर उसकी भावनाओं का सम्मान करती है। ओडीओसी का उद्देश्य भी कारीगरों, हलवाइयों और माताओं-बहनों के हुनर को पहचान और सम्मान दिलाना है। यह स्वदेशी और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न को ब्रह्म का स्वरूप माना गया है। शास्त्रों में ‘अन्नम ब्रह्म’ कहा गया है। जैसा अन्न हम खाते हैं, वैसा ही हमारा मन और स्वास्थ्य बनता है। अन्न को अलग-अलग रूपों में तैयार करना और उसमें मूल्य संवर्धन करना हमारी प्राचीन परंपरा रही है। मथुरा-वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाने वाले 56 भोग हमारी समृद्ध पाक कला का उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा और स्वादिष्ट भोजन तैयार करने के लिए मन और अंतःकरण की शुद्धता भी जरूरी है।
ओडीओपी की सफलता से ओडीओसी को मिला प्रोत्साहन
Read More छठ महापर्व की लोक आस्था व संस्कृति के रंग में रंगे उच्च माध्यमिक विद्यालय नवादा के छात्र-छात्राएंमुख्यमंत्री ने ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना की शुरुआत से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की पहचान के लिए अधिकारियों की समिति गठित की गई थी। सर्वेक्षण में पहले 58 जिलों के विशिष्ट उत्पाद सामने आए, इसके बाद शेष जिलों के उत्पादों की भी पहचान की गई। इस तरह प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए एक-एक विशिष्ट उत्पाद तय कर वर्ष 2018 में ओडीओपी योजना शुरू की गई।
उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से पारंपरिक उत्पादों को तकनीक, बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ा गया। आज ओडीओपी के जरिए उत्तर प्रदेश करीब दो लाख करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात कर रहा है। प्रदेश के लगभग 80 उत्पादों को जीआई टैग भी मिल चुका है, जिससे उनकी विशिष्ट पहचान और वैश्विक बाजार में विश्वसनीयता बढ़ी है। इसी सफलता से प्रेरित होकर पिछले तीन-चार वर्षों से ओडीओसी की संभावनाओं पर काम किया जा रहा था।
योगी ने बताया कि अलग-अलग जिलों में खानपान की विशिष्टता को देखते हुए एक टीम को पारंपरिक व्यंजनों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई। सर्वेक्षण में कई ऐसे पकवान सामने आए, जिन्हें अभी व्यापक पहचान नहीं मिली है। पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों ओडीओसी अभियान की शुरुआत की गई थी। अब इसे और व्यापक स्तर पर ले जाने की जरूरत है।
घरों में बनने वाले व्यंजन भी बन सकते हैं बड़े ब्रांड
मुख्यमंत्री ने खाद्य उत्पादों की व्यावसायिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी खाद्य कंपनियों में शामिल नेस्ले का कारोबार करीब नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक है। जब एक कंपनी खाद्य उत्पादों के जरिए इतना बड़ा कारोबार कर सकती है तो बलिया का बाटी-चोखा और जौनपुर की इमरती भी बड़े ब्रांड क्यों नहीं बन सकते?
उन्होंने एक बच्ची का उदाहरण दिया, जिसने अपनी मां के हाथों से बनी मूंग दाल की नमकीन का पैकेट उन्हें भेंट किया। बच्ची ने बताया कि उसकी मां घर पर नमकीन बनाकर बेचती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे घरेलू उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़कर बड़े व्यवसाय में बदला जा सकता है। उन्होंने विभाग और दैनिक जागरण परिवार से इस दिशा में सहयोग करने की अपील की।
पीढ़ियों से आगे बढ़ रही पारंपरिक पाक कला
मुख्यमंत्री ने जापान में शुरू की गई ‘वन विलेज वन प्रोडक्ट’ की अवधारणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1980 में वहां एक गवर्नर ने इस पहल की शुरुआत की थी। इसके तहत 300 गांवों को उनके विशिष्ट उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया और उत्पादों को जीआई टैग भी दिलाया गया। इससे गांवों के कारीगरों और उत्पादकों को बड़ा लाभ मिला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी और खानपान की विविधता को देखते हुए यहां इस क्षेत्र में इससे भी व्यापक संभावनाएं हैं।
योगी ने कहा कि प्रदेश के घरों में सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के भोजन तक अलग-अलग तरह के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। समोसा, जलेबी और रबड़ी जैसे पकवानों की अपनी खास पहचान है। पर्व-त्योहारों पर घरों में अनेक प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं। यह हुनर पीढ़ियों से परिवारों में आगे बढ़ रहा है। महिलाएं मां, दादी, नानी और मौसी से व्यंजन बनाना सीखती हैं और फिर इस परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।
उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर बनने वाले व्यंजनों की गुणवत्ता और शुद्धता का व्यावसायिक स्तर पर भी पूरा ध्यान रखना होगा। खाद्य पदार्थों में मिलावट या ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़े। अधिक मुनाफे के लिए शॉर्टकट अपनाने से बचना होगा। उन्होंने काशी की पारंपरिक मिठाई और व्यंजनों की दुकानों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई दुकानें दिन में केवल एक-दो घंटे खुलती हैं और इसी दौरान उनकी अच्छी बिक्री हो जाती है। यह पारंपरिक व्यंजनों की लोकप्रियता और बाजार की क्षमता को दर्शाता है।
महिला समूहों के जरिए बढ़ेंगे स्वरोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओसी अभियान को गांव स्तर तक पहुंचाने से छूटे हुए पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों की पहचान हो सकेगी। पात्र उत्पादों को जीआई टैग दिलाने, बाजार उपलब्ध कराने और आगे बढ़ने के लिए जरूरी सहयोग देने का प्रयास किया जाएगा। इससे हलवाइयों, कारीगरों और उन परिवारों को रोजगार मिलेगा, जिनके पास आय का स्थायी साधन नहीं है। महिलाएं समूह बनाकर भी घरेलू खाद्य उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आमदनी कर सकती हैं।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक कारीगरों, हलवाइयों और घरेलू स्तर पर खाद्य उत्पाद बनाने वाले परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत पात्र लोगों को पांच लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त ऋण दिया जा रहा है। साथ ही निर्धारित सब्सिडी का लाभ भी मिलता है। इस सहायता को आगे 7.5 लाख और 10 लाख रुपये तक बढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है। बड़े व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों को 20 लाख रुपये तक की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रयास है।
500 रुपये से शुरू किया कारोबार, आज 500 महिलाओं को रोजगार
मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर की एक महिला उद्यमी का उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश दिवस पर उन्हें यूपी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 500 रुपये उधार लेकर दिल्ली में अचार बनाने का काम शुरू किया था। आज वह ‘अचार वाली दीदी’ के नाम से प्रसिद्ध हैं और बुलंदशहर की करीब 500 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।
योगी ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए इच्छाशक्ति और मेहनत जरूरी है। काम करने का संकल्प हो तो मंच और अवसर भी मिल सकते हैं। ओडीओसी अभियान ऐसे ही हुनरमंद लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देगा। उन्होंने दैनिक जागरण परिवार को इस पहल और आयोजन के लिए बधाई देते हुए प्रदेश के हलवाइयों, कारीगरों और पारंपरिक पाक कला को पीढ़ियों से आगे बढ़ा रहे परिवारों का अभिनंदन किया। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश सरकार और दैनिक जागरण मिलकर इस अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।


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