युवा सृजन संवाद, इलाहाबाद के डिजिटल मंच का आयोजन 

महात्मा गांधी जी के जयंती के अवसर पर युवा सृजन संवाद, इलाहाबाद के डिजिटल मंच द्वारा विशेष व्याख्यान " गांधी की महिला ब्रिगेड " का आयोजन किया गया जिसमें आमंत्रित मुख्य वक्ता के रूप में जाने-माने पत्रकार और लेखक श्री अरविंद मोहन  मौजूद रहे।

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 स्वतंत्र प्रभात।

 ब्यूरो प्रयागराज 


महात्मा गांधी जी के जयंती के अवसर पर युवा सृजन संवाद, इलाहाबाद के डिजिटल मंच द्वारा विशेष व्याख्यान " गांधी की महिला ब्रिगेड " का आयोजन किया गया जिसमें आमंत्रित मुख्य वक्ता के रूप में जाने-माने पत्रकार और लेखक श्री अरविंद मोहन  मौजूद रहे।

 अपने व्याख्यान की शुरुआत में अरविंद मोहन ने कहा कि आजादी के आंदोलन में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। गांधी जी जब दक्षिण अफ्रीका से हिंदुस्तान आए तो उन्होंने देखा कि देश की आधी आबादी घरों में पर्दे के पीछे है। इस स्थिति ने गांधी जी को बहुत विचलित किया। गांधी जी ने हिंदुस्तान में जगह-जगह घूमने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि जब तक महिलाओं को पर्दे से बाहर नहीं निकाला जाएगा तब तक वास्तविक आजादी नहीं मिल सकती। 

 उन्होंने महिलाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से कई संस्थाएं खोलीं और उनके नेतृत्व महिला हाथों में दे दिए। चंपारण के आंदोलन के दौरान उन्होंने एक नर्स अवंतिका गोखले को प्रेरित किया और उनको सूत काटना , समाज सेवा और  राजनीति के लिए प्रेरित किया।

गांधी जी ने इस तरह से देश में जगह-जगह घूम-घूम कर औरतों को भिन्न-भिन्न कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया। चार-पांच सालों में स्थिति यह हो गई की गया अधिवेशन 1922 में औरतें भी कांग्रेस के अधिवेशन में श्रोता के रूप में पहुंचीं । अधिवेशन में पुरुष और औरतों के बीच में पर्दा लगा था। पहले दिन यह रहा दूसरे दिन इसे महिलाओं ने स्वयं हटा दिया. उस दौर में पच्चीस हजार औरतें जेल गईं। दुनिया के किसी भी इतिहास में ऐसा उदाहरण देखना दुर्लभ है। 

गांधी जी मानते थे कि महिलाओं को गृहस्थी, समाज और परिवार में बराबर का हक और अधिकार मिलना चाहिए। पुणे अधिवेशन के दौरान  महिला दर्शकों की उपस्थिति पैतीस हजार तक पहुंच गई.तब गांधी जी इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने सुचेता कृपलानी को महिला कांग्रेस का गठन करने का निर्देश दिया।।

उनकी महिला टीम की सक्रिय सदस्य सुचेता कृपलानी जो बाद में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने सिंचाई योजनाओं ऐसा जाल बिछाया कि उत्तर प्रदेश अनाज के मामले में बहुत समृद्ध हुआ।दुर्गाबाई देशमुख ने देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कोई स्थाई वैवाहिक जीवन न जीकर ,अपना पूरा जीवन आजादी के आंदोलन में समर्पित कर दिया और हजारों महिलाओं - लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनीं। 

अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने बताया कि नेहरू जी की मां ने भी आजादी के आंदोलन में भाग लिया जिसके कारण एक बार पुलिस ने उन्हें इतनी बुरी तरह पीटा था कि कुछ दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई। मणि बेन (सरदार वल्लभभाई पटेल की बहन ) ने देश सेवा के लिए शादी ही नहीं की । वे अनेक बार सांसद रहीं लेकिन हमेशा रेलवे की तृतीय श्रेणी में यात्रा की और उनका कोई निजी घर नहीं बन पाया।

इसी क्रम में उन्होंने यह भी बताया कि अनेक विदेशी युवतियां और महिलाओं ने भी गांधी जी के आंदोलनों में शामिल होकर आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया। जानकी देवी बजाज ,मीरा बेन, सरलाबेन (जो उत्तराखंड में क्रांतिकारी आंदोलन चलाती थीं ), अमालू जगन्नाथन ( केरल में दलितों के कल्याण के लिए समर्पित महिला ) , कुमारी लज्जावती (नेहरू परिवार से संबंधित, जिन्होंने महिला हॉकी टीम बनाने में मदद की और भगत सिंह की फांसी का विरोध किया था) आदि अनेक उदाहरण हैं जिन्होंने उच्च समर्पण से देश सेवा की।

महिलाओं की भागीदारी से स्वतंत्रता आंदोलन का चरित्र पूरी तरह से बदल गया था। गांधी जी के द्वारा प्रशिक्षित लड़कियों- महिलाओं का प्रदर्शन समाज सेवा हो या राजनीति, वे पुरुषों के मुकाबले बेहतर रहीं। आजादी के बाद भी उन महिलाओं ने शिक्षा, राजनीति और समाज सेवा में बेहतर कार्य किया। गांधी ने लड़कियों एवं महिलाओं को हर क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित किया। उनकी हर तरह से मदद की। गाँधी द्वारा महिलाओं को लिखे तकरीबन दस हजार पत्रों से यह बात पता चलती है की छोटी बात हो या बड़ी बात, खाने - पीने से संबंधित हो या छोटी-मोटी बीमारी से संबंधित हो , पढ़ाई से संबंधित हो आदि ; गांधी हर मामले में अनेक प्रकार से महिलाओं की मदद करते थे। 

अपने व्याख्यान के अंत में उन्होंने एनी बेसेंट के द्वारा आजादी के आंदोलन में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया और कहा कि हर तरह के परिवारों की लड़कियों ने गांधी जी से प्रेरणा प्राप्त कर आंदोलनों को बड़े स्तर पर प्रभावित किया। 

गांधी ने स्त्रियों को राजनीति में जो प्रतिनिधित्व दिया वह बेमिसाल है। उन्होंने युवा सृजन संवाद , प्रयागराज के संस्थापक प्रोफेसर संतोष भदौरिया  के गांधी जयंती के अवसर पर ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर कार्यक्रम रखने पर हर्ष व्यक्त किया। व्याख्यान के बाद श्रोताओं के जिज्ञासाओं और प्रश्नों का अरविंद जी ने बहुत ही धैर्य पूर्वक समाधान प्रस्तुत किया। 

कार्यक्रम के अंत में युवा सृजन संवाद की ओर से धन्यवाद ज्ञापन विधि तिवारी ने किया । कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कवि एवं लेखक सुभाष राय, प्रोफ़ेसर बलभद्र,असरार गाँधी, संजय पांडेय, प्रो. सुरेश शर्मा, प्रो. आनंद शुक्ल,, डॉ. चित्रा माली, वसुन्दरा पांडेय, प्रो. पद्मा शर्मा, डॉ भारतेन्दु कुमार शुक्ल, डॉ. अविचल गौतम डॉ. गीता दुबे, डॉ. धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ.इंद्र कुमार यादव, डॉ. भगवान सिंह निरंजन,डॉ. मिथलेश गर्ग,डॉ. बृजेश यादव, रिया सोम, शुभम, जया, धर्मवीर सहित अनेक शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।


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