दीपावली और छठ पर अलर्ट मोड में रहेंगे मेडिकल कॉलेज, 24 घंटे चालू रहेंगी इमरजेंसी सेवाएं

आगजनी, सड़क हादसों और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश, दवाओं व जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता भी होगी सुनिश्चित

हर्षिता यादव  Picture
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लखनऊ। दीपावली और छठ पूजा के दौरान संभावित आगजनी, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आपात स्थितियों को देखते हुए प्रदेश के सभी राजकीय एवं स्वशासी मेडिकल कॉलेजों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता के अनुरूप चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में 24 घंटे आपात चिकित्सा सेवाएं सक्रिय रखने की व्यवस्था की है। उद्देश्य है कि त्योहारों के दौरान किसी भी व्यक्ति को आपात उपचार के लिए भटकना न पड़े और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।

महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण नेहा शर्मा ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, ऑक्सीजन आपूर्ति तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा करने को कहा गया है।

24 घंटे सक्रिय रहेंगे इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर

सभी मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में इमरजेंसी विभाग, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू, बर्न यूनिट, एनेस्थीसिया, सर्जरी और ऑपरेशन थिएटर सहित जीवनरक्षक सेवाएं चौबीसों घंटे चालू रहेंगी। आपात स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों का तत्काल परीक्षण और प्राथमिक उपचार किया जाएगा। मरीजों की गंभीरता के अनुसार उपचार की प्राथमिकता तय करने के साथ अतिरिक्त बेड और चिकित्सा संसाधन भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी तय

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त्योहारों के दौरान इमरजेंसी, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू, बर्न यूनिट, एनेस्थीसिया, सर्जरी, हड्डी रोग, मेडिसिन और रेडियोलॉजी विभागों में डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों की ड्यूटी का रोस्टर तैयार किया जाएगा। सभी की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी।

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दवाओं और जीवनरक्षक उपकरणों की होगी जांच

मेडिकल कॉलेजों को आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं, इंजेक्शन, ड्रेसिंग सामग्री, टांके लगाने की सामग्री और आपातकालीन उपचार किट का पर्याप्त भंडार रखने को कहा गया है। ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर और सक्शन मशीन सहित सभी जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और क्रियाशीलता की जांच कराई जाएगी। ब्लड बैंक के साथ समन्वय बनाकर रक्त और रक्त अवयवों की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।

गंभीर मरीजों के लिए प्रभावी होगी रेफरल व्यवस्था

गंभीर मरीजों को उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थानों में भेजने की जरूरत पड़ने पर पहले से समन्वय स्थापित किया जाएगा। मरीज को एंबुलेंस और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ रेफरल प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होने देने के निर्देश दिए गए हैं।

आगजनी और सामूहिक दुर्घटनाओं से निपटने की तैयारी

मेडिकल कॉलेजों के इमरजेंसी विभाग, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, ऑक्सीजन प्लांट, विद्युत पैनल, प्रयोगशालाओं और छात्रावासों सहित संवेदनशील स्थानों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण कराया जाएगा। फायर अलार्म और अग्निशमन उपकरणों की कार्यशीलता जांचने के साथ अस्पतालों के निकास मार्गों और सीढ़ियों को अवरोधमुक्त रखने को कहा गया है।

इसके अलावा प्रत्येक मेडिकल कॉलेज को अपनी आपदा प्रबंधन योजना की समीक्षा कर उसे अद्यतन करना होगा। बड़ी संख्या में घायलों के एक साथ पहुंचने, सड़क हादसों, आगजनी और भगदड़ जैसी स्थितियों से निपटने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। ट्रायेज व्यवस्था के तहत घायलों की गंभीरता के अनुसार उपचार की प्राथमिकता तय होगी।

स्वच्छता और ऑक्सीजन आपूर्ति पर भी नजर

अस्पतालों में साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण, पेयजल, बिजली, बैकअप पावर और ऑक्सीजन आपूर्ति की नियमित निगरानी की जाएगी। बर्न यूनिट, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। ऑक्सीजन प्लांट और पाइपलाइन प्रणाली की भी जांच कराई जाएगी।

नोडल अधिकारी करेंगे व्यवस्थाओं की निगरानी

महानिदेशक ने मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, निदेशकों और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों को सभी तैयारियों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत के अनुसार वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा, जो ड्यूटी रोस्टर, संसाधनों और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर नजर रखेगा। निर्देशों के पालन में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

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