आपदा में मौत पर अब आठ लाख रुपये की सहायता, फसल नुकसान का मुआवजा भी बढ़ा
नए मानकों के तहत किसानों को 30 फीसदी तक अधिक मुआवजा, राहत शिविरों में 30 दिन तक भोजन और आवास की सुविधा
लखनऊ। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राहत सहायता के मानकों में बदलाव किया है। राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) के तहत मिलने वाली सहायता राशि बढ़ा दी गई है। अब प्राकृतिक आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को चार लाख के बजाय आठ लाख रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी। इसके अलावा फसल, पशुधन और मकान के नुकसान पर भी मुआवजे की राशि बढ़ाई गई है। नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे। सरकार का उद्देश्य आपदा प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी आजीविका को फिर से पटरी पर लाना है।
मृतकों के परिजनों को दोगुनी सहायता
राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि प्राकृतिक आपदा में मृत्यु होने पर परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि चार लाख से बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दी गई है। इसी तरह गाय, भैंस, घोड़े और ऊंट जैसे बड़े पशुओं की मृत्यु पर सहायता 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए यह राशि चार हजार से बढ़ाकर 5,500 रुपये की गई है। मुर्गीपालकों को अब प्रति मुर्गी 100 के बजाय 130 रुपये मिलेंगे। भार ढोने वाले पशुओं की क्षति पर सहायता 20 हजार से बढ़ाकर 25,400 रुपये कर दी गई है।
फसल नुकसान पर 30 फीसदी तक बढ़ा मुआवजा
किसानों को राहत देने के लिए फसल क्षति पर मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। सिंचित क्षेत्र में नुकसान पर अब 17 हजार के बजाय 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे। वर्षा आधारित क्षेत्रों में यह सहायता 8,500 से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। बागवानी और कृषि वानिकी की फसलों के नुकसान पर मुआवजा 22,500 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर किया गया है। रेशम उत्पादन से जुड़ी फसलों के लिए सहायता छह हजार से बढ़ाकर 7,800 रुपये और गन्ने की फसल के लिए 7,500 से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। कृषि भूमि के कटान और भूस्खलन से होने वाले नुकसान पर भी सहायता के मानकों में वृद्धि की गई है।
10 लाख से अधिक किसानों की फसल प्रभावित
राहत आयुक्त के अनुसार, एक अप्रैल से चार नवंबर 2026 तक प्रदेश के 10,02,684 किसानों की करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार सहायता दी जा रही है। मुआवजे की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी करने के लिए सभी जिलाधिकारियों से इस अवधि में हुए नुकसान का ब्योरा मांगा गया है।
मकानों और सार्वजनिक संस्थानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी सहायता राशि निर्धारित की गई है। मैदानी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए 1.85 लाख रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 2.06 लाख रुपये दिए जाएंगे। पक्के मकान के आंशिक नुकसान पर मैदानी क्षेत्रों में 93 हजार और पहाड़ी क्षेत्रों में 1.03 लाख रुपये की सहायता मिलेगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त प्राथमिक विद्यालयों के लिए 15.50 लाख रुपये, जबकि माध्यमिक विद्यालयों, छात्रावासों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के नुकसान पर 26 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए भी अलग-अलग मानक तय किए गए हैं।
राहत शिविरों में 30 दिन तक भोजन और आवास
आपदा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में सामान्य परिस्थितियों में 30 दिनों तक भोजन, कपड़े, अस्थायी आवास और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि 60 दिन या जरूरत के अनुसार बढ़ाई जा सकती है। पेयजल की आपात व्यवस्था के लिए सामान्य परिस्थितियों में 30 दिन और सूखे की स्थिति में 90 दिनों तक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग, विस्फोट या दुर्घटना से होने वाले नुकसान को इस सहायता के दायरे से बाहर रखा गया है।
सरकार ने सहायता वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत लाभार्थियों को मिलने वाली राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से भेजने की व्यवस्था अनिवार्य की है। साथ ही लाभार्थियों की सूची और पात्रता का आधार सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि सहायता वास्तविक प्रभावितों तक पहुंच सके।


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