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डिस्लेक्सिया से प्रभावित 71 हजार बच्चों के भविष्य को संवारने की तैयारी, शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
समावेशी शिक्षा और समय पर पहचान पर जोर, राज्य आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा बोले- बच्चों की बौद्धिक क्षमता होती है अच्छी
लखनऊ, 30 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में डिस्लेक्सिया (विशिष्ट अधिगम अक्षमता) से प्रभावित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से राजधानी लखनऊ में राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य बच्चों में डिस्लेक्सिया की शुरुआती पहचान, उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए राज्य आयुक्त (दिव्यांगजन) प्रो. हिमांशु शेखर झा ने कहा कि डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की बौद्धिक क्षमता सामान्यतः अच्छी होती है। यह एक अदृश्य दिव्यांगता है, जिसके प्रति समाज में अभी भी जागरूकता की कमी है। ऐसे बच्चों की सीखने की अलग शैली और जरूरतों को समझना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों से मिलकर बच्चों को शिक्षा एवं सामाजिक जीवन की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील की।
विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित राय ने कहा कि सरकार प्रभावित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुगम दिव्यांगता प्रमाणपत्र और आवश्यक शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है। इसके लिए बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण सत्र में चेंजइंक फाउंडेशन के कंसल्टेंट अमरेश चंद्र ने यू-डायस के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में कक्षा एक से आठ तक के लगभग 71 हजार बच्चे विशिष्ट अधिगम अक्षमता से प्रभावित के रूप में चिह्नित हैं। उन्होंने समय पर स्क्रीनिंग, शिक्षक प्रशिक्षण और उपचारात्मक शैक्षिक सहयोग को जरूरी बताया।
कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए विशेष एवं सामान्य शिक्षकों को डिस्लेक्सिया के लक्षण पहचानने और बच्चों की सीखने की क्षमता के अनुसार शिक्षण पद्धतियां अपनाने का प्रशिक्षण दिया गया। आयोजन में दीपक जायसवाल और संजय कुमार का विशेष योगदान रहा।


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