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डीएम जिले में 'सर्वशक्तिमान' की तरह काम नहीं कर सकते: 

हाईकोर्ट ने 'गोगाजी नवमी' मेले पर बिजनौर डीएम का आदेश निलंबित किया 

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स्वतंत्र प्रभात।
 
ब्यूरो प्रयागराज ।
 
 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को बिजनौर के जिलाधिकारी (DM) द्वारा पारंपरिक वार्षिक 'जाहर दीवान' (गोगा नवमी) मेले के प्रबंधन को लेकर जारी किए गए आदेश को निलंबित किया। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश प्रथम दृष्टया अधिकार क्षेत्र से बाहर है और ऐसा लगता है कि डीएम ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया। 
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बिजनौर की चांदपुर तहसील के फियोना गांव में मेला आयोजित करने की अनुमति भी दी, बशर्ते वे संबंधित अधिकारियों से जरूरी अनुमतियां प्राप्त कर लें।
 
 
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिलाधिकारियों को अपने जिले में इस तरह से शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए मानो वे 'सर्वशक्तिमान' (Plenipotentiaries) हों। कोर्ट ने कहा, "इस अदालत ने बार-बार जिलाधिकारियों को चेतावनी दी कि वे अपने जिले में 'सर्वशक्तिमान' की तरह व्यवहार न करें—यानी ऐसे आदेश न दें जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, बल्कि किसी अन्य जिला स्तरीय अधिकारी या न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यह मामला भी प्रथम दृष्टया अधिकार क्षेत्र के अतिक्रमण का एक और उदाहरण है।"
 
गौरतलब है कि DM के इस आदेश के तहत पारंपरिक मेले का प्रबंधन 'गांव सभा' को सौंप दिया गया और राजस्व अधिकारियों की 3 सदस्यीय समिति के जरिए मेले से होने वाली कमाई भी गांव सभा को दी गई। 
 
यह आदेश 29 अगस्त, 2025 को जारी किया गया, जब IAS अधिकारी जसजीत कौर बिजनौर की जिलाधिकारी थीं। अगले ही महीने उनका तबादला हो गया और उनकी जगह IAS अधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने ले ली, जो अब जिले के डीएम हैं। 
 
इस आदेश को चुनौती देते हुए 'सार्वजनिक आर्य इंटर कॉलेज' की प्रबंधन समिति और एक अन्य पक्ष ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
 
 
 
 

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