एक समय था... जब इतिहास एक साथ खड़ा होता था

सीतापुर ये तस्वीर आज की नहीं है - ये उस दौर की है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति दिल्ली तक बक्शी का तालाब से तय होती थी

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सीतापुर ये तस्वीर आज की नहीं है - ये उस दौर की है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति दिल्ली तक बक्शी का तालाब से तय होती थी। इस एक फ्रेम में खड़े हैं - चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय के सामने* वो लोग, जिनके नाम से एक युग जाना गया।
 
बीच में हरे स्वेटर में खड़े हैं *समाजवादी पार्टी के संस्थापक श्रद्धेय नेताजी मुलायम सिंह यादव जी, उनके साथ हैं डॉ. अशोक बाजपेई जी, श्री राजेन्द्र चौधरी जी, और महाविद्यालय के उस समय के नायक डॉ. वीरेन्द्र बहादुर सिंह जी जैसे दिग्गज। और इन सबको एक मंच पर लाने वाले थे - श्रद्धेय बाबू भगवती सिंह जी।
 
इतिहास का सच:1992 में जब श्रद्धेय नेताजी ने समाजवादी जनता पार्टी से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाने का निर्णय लिया, तो वह निर्णय श्रद्धेय बाबू भगवती सिंह जी की सलाह पर ही लिया गया था। उसी सलाह ने 4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी को जन्म दिया। उस समय नेताजी के साथ जो लोग खड़े थे  जनेश्वर मिश्र, बेनी प्रसाद वर्मा, आजम खान, कपिलदेव सिंह, बृजभूषण तिवारी, मोहन सिंह, शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव  उन्हीं में एक मजबूत स्तंभ के रूप में बाबू भगवती सिंह जी का नाम आज भी समाजवादी इतिहास में बड़े सम्मान से लिया जाता है।
 
जो सपने बाबूजी ने इस महाविद्यालय के लिए देखे थे, वही सपने आज सच हो रहे हैं। उसी विरासत को *वर्तमान सफल प्रबंधक डॉ. टी.पी. सिंह साहब, बाबू भगवती सिंह जी के ही पदचिन्हों पर चलते हुए* और उनके *निजी सलाहकार श्री अजय सिंह भदौरिया जी* के निरंतर प्रयासों से आगे बढ़ाया जा रहा है।
 
 
 

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