पुलिस से अदालत तक डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेगी न्याय व्यवस्था
आईसीजेएस 2.0 के तहत थानों, फॉरेंसिक लैब, अभियोजन, जेल और न्यायालयों के बीच बेहतर होगा समन्वय; एनसीएल डैशबोर्ड पर प्रदेश का स्कोर 85.99 अंक पहुंचा
लखनऊ। प्रदेश में अपराधों की जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक को तकनीक आधारित बनाने के लिए योगी सरकार ने डिजिटल आधुनिकीकरण की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत पुलिस थानों, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, अभियोजन, कारागार और न्यायालयों को एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस 2.0) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) के प्रभावी क्रियान्वयन से जांच, साक्ष्य संकलन और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने का लक्ष्य है।
एनसीएल डैशबोर्ड पर स्कोर में 7.86 अंकों का सुधार
नए आपराधिक कानूनों (एनसीएल) के क्रियान्वयन से जुड़े डैशबोर्ड के अनुसार उत्तर प्रदेश का कुल स्कोर 25 जून 2026 को 78.13 अंक था, जो 12 सितंबर 2026 तक बढ़कर 85.99 अंक हो गया। इस अवधि में प्रदेश के स्कोर में 7.86 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इससे पहले 20 जुलाई को स्कोर 82.05, 19 अगस्त को 84.92 और एक सितंबर को 85.47 अंक था।
डैशबोर्ड के अनुसार अधिसूचना जारी करने, मॉडल नियम लागू करने, आईसीजेएस एकीकरण और मेडलीपार (MedLEaPR) पोर्टल के क्रियान्वयन में प्रदेश को निर्धारित मानकों पर पूरे अंक मिले हैं। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) के उपयोग में भी पांच में से पांच अंक प्राप्त हुए हैं। वहीं, ई-साक्ष्य में 10 में से 6.57 और ई-समन में 10 में से 6.74 अंक दर्ज किए गए हैं। न्याय श्रुति के उपयोग में भी प्रदेश को पांच में से पांच अंक मिले हैं।
इन मानकों की नियमित समीक्षा के लिए हर माह अपराध समीक्षा बैठक की जा रही है। ई-साक्ष्य के उपयोग और 60 व 90 दिनों में जांच पूरी करने की प्रगति पर नजर रखने के लिए अलग डैशबोर्ड विकसित किया गया है। न्यायालयों से जुड़े मानकों की समीक्षा के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी एनसीएल डैशबोर्ड का एक्सेस उपलब्ध कराया गया है।
ई-फॉरेंसिक 2.0 से ऑनलाइन होगी जांच प्रक्रिया
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधों की जांच को गति देने के लिए प्रदेश में ई-फॉरेंसिक 2.0 व्यवस्था लागू की गई है। जुलाई 2026 से अब तक इस प्रणाली के तहत 6,334 मामले प्राप्त हुए हैं, जबकि 535 मामलों की रिपोर्टिंग की जा चुकी है। इसके माध्यम से केस पंजीकरण, आवंटन, रिपोर्ट तैयार करने और रिपोर्ट भेजने की प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है।
फॉरेंसिक जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश की 12 विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के आठ-आठ अनुभागों में दो-दो हाई-एंड डेस्कटॉप उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसके तहत कुल 192 कंप्यूटरों की मांग रखी गई है। केस से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल आंकड़ों को सुरक्षित रखने के लिए नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (एनएएस) या क्लाउड स्टोरेज की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसके अलावा सीसीटीएनएस के माध्यम से थानों से फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं तक सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाने के लिए डाटा एंट्री और क्यूआर कोड जनरेशन की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
1,982 थानों और 18 फॉरेंसिक लैब में नेटवर्क सुविधा का विस्तार
आईसीजेएस 2.0 के तहत प्रदेश के 1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहतर करने की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए एसडी-वैन आधारित नेटवर्क और जरूरी तकनीकी उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
पुलिस विभाग को डेस्कटॉप, यूपीएस, टैबलेट, मल्टीफंक्शन प्रिंटर, वेबकैम और क्यूआर कोड रीडर सहित अन्य उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी है। कारागार विभाग में भी डेस्कटॉप, बायोमेट्रिक उपस्थिति उपकरण, स्कैनर और वेबकैम जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
जेलों और न्यायालयों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 535 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट की खरीद के बाद उनकी आपूर्ति और स्थापना की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। इस डिजिटल एकीकरण से पुलिस, फॉरेंसिक, अभियोजन, कारागार और न्यायालयों के बीच समन्वय बढ़ाने के साथ आपराधिक मामलों की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


Comments