राजा पिता की गोदसे बढ़कर होती है परमपिता कीगोद पं अखिलेश शुक्ला 

भागवत कथा के संचालन में आज  कथा वाचक पंडित अखिलेश शुक्ला ने ईश्वर भक्ति पर ध्रुव की कथा का व्याख्यान करते हुए श्रद्धालुओं को अवगत कराया और कहा ध्रुव की कथा का व्याख्यान देते हुए कहा ईश्वर की भक्ति से बड़ा कोई कार्य नहीं होता है

Abhinav Shukla Picture
Published On

स्वतंत्र प्रभात 

बरेली/श्रीमद्

भागवत कथा के संचालन में आज  कथा वाचक पंडित अखिलेश शुक्ला ने ईश्वर भक्ति पर ध्रुव की कथा का व्याख्यान करते हुए श्रद्धालुओं को अवगत कराया और कहा ध्रुव की कथा का व्याख्यान देते हुए कहा ईश्वर की भक्ति से बड़ा कोई कार्य नहीं होता है इसके लिए उम्र का भी कोई बंधन नहीं है ध्रुव ने 5 वर्ष की आयु में ही अपने तप और त्याग का प्रबल प्राप्त कर लिया।

 यह केवल उसकी मां के उपदेश की देन है इसलिए प्रत्येक मनुष्य को ईश्वर की भक्ति करना चाहिए राजा पिता की गोद से भी बढ़ परमपिता परमेश्वर की गोद होती है जी छोटी सी उम्र में ईश्वर भक्ति तपस्या करके प्राप्ति करने वाले ध्रुव को आज संसार अमर मानता है अहंकार व्यक्ति को नष्ट कर देता है ध्रुव की मां का दिया उपदेश उसकी सौतेली मां के लिए अभिशाप साबित हुआ और ध्रुव ने अपनी सौतेली मां के द्वारा पिता की गोद से छीन कर जमीन पर पटक देने का ऐसा संदेश मिला के उसने अपने सब कुछ त्याग कर अपनी मां के एक संदेश को अपना करके उन्होंने अपना जीवन आवा गवन से मुक्त कर लिया।

 और आज भी ध्रुव को पूरा संसार जानता है जो आसमान में चमकने वाला ध्रुव तारा कहलाता है कथावाचक अखिलेश शुक्ला की इस करुणा भरी कहानी को सुनने के बाद श्रद्धालुओं के लिए चेतावनी जैसा व्याख्यान था परंतु जो पल्लू झाड़ कथा सुनाने बैठते हैं उनके लिए तो सुनने के बराबर ही माना जाएगा परंतु श्रद्धा के उद्देश्य से जो भी सुनकर अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेगा उसके लिए एक प्रेरणा साबित होगी इस प्रेरणा पोल पूर्ण करने पर प्राणी अपने जीवन को सफल बना सकता है ।

ऐसे कल्याणकारी व्याख्यान को सुनने के लिए श्रद्धालुओं को अपने जीवन में अनुसरण करके अपनाना चाहिए उन्होंने बड़े ही भक्ति विभोर के साथ यह व्याख्यान देते हुए कई अन्याचार विषयों पर भी चर्चा की जो मनुष्य के जीवन में अत्यंत आवश्यक ही नहीं लाभदायक कभी थी उन्होंने सत्य पर चलने वालों को संकट का सामना करना पड़ता है असत्य पर चलने वाले चंद दिनों का आनंद लेते हैं इस तरह से कई विषयों पर उन्होंने अपने विचार व्यक्त किया ईश्वर हर जगह व्यापक है इस पर भी उन्होंने जोर देते हुए कहा लोग पूछते हैं।

 ईश्वर कहां है ईश्वर जहां देखो वहीं पर मिलता है परंतु इसके लिए ईश्वर भक्ति करना अत्यंत आवश्यक है प्राणी को अपने जीवन में गुरु बनाना भी आवश्यक है परंतु गुरु को जान करके बनाना चाहिए जिस तरह कहते हैं गुरु बनावे जान के और पानी पिए छान के ऐसा व्यक्ति कभी धोखा नहीं खाता है इस तरह का उन्होंने प्राणी को व्याख्यान देते हुए ईश्वर भक्ति करना सर्वश्रेष्ठ बताया यह बात उन्होंने मतदान कल में अपना प्रवचन देते हुए श्रद्धालुओं को बताई।


About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें