वादों और हकीकत के बीच फंसा ‘बेस से स्पेस’ का विजन, पांच महीने बाद भी अधूरी परियोजनाओं पर उठे सवाल जिम्मेदार कौन

डेयरी उद्योग से 10 हजार युवाओं को रोजगार देने का दावा, प्रेस क्लब की तीसरी मंजिल का निर्माण भी अधूरा

Abhinav Shukla Picture
Published On

बस्ती। भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता मनीष मिश्रा के ‘बेस से स्पेस’ (Base to Space) विजन को लेकर जिले में विकास और रोजगार की नई उम्मीदें जगी थीं। दावा किया गया था कि इस पहल के जरिए बस्ती को स्थानीय स्तर से उठाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा। हालांकि, संबंधित परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। पांच महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी डेयरी उद्योग के माध्यम से रोजगार सृजन और बस्ती प्रेस क्लब की तीसरी मंजिल के निर्माण जैसे मुद्दों पर स्पष्ट प्रगति की जानकारी सामने नहीं आने से लोगों में असंतोष की चर्चा है।
 
डेयरी उद्योग से 10 हजार युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य
 
बस्ती की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से डेयरी उत्पाद क्षेत्र में निवेश की योजना का दावा किया गया था। इसके तहत करीब 10 हजार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। इस पहल से दूध संग्रह केंद्रों, प्रसंस्करण इकाइयों और प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई थी।
 
लेकिन परियोजना की वर्तमान स्थिति, निवेश की प्रक्रिया, निर्माण कार्य और रोजगार सृजन की समयसीमा को लेकर अब तक क्या ठोस प्रगति हुई है, यह स्पष्ट होना बाकी है। रोजगार की आस लगाए बैठे युवाओं के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि योजना कब धरातल पर उतरेगी और उन्हें इसका लाभ कब मिलेगा ?
 
प्रेस क्लब की तीसरी मंजिल का निर्माण कब होगा पूरा?
 
पत्रकारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बस्ती प्रेस क्लब की तीसरी मंजिल का निर्माण पूरा कराने का मुद्दा भी चर्चा में है। निर्माण कार्य को लेकर किए गए वादे के पांच महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद परियोजना की प्रगति और उसे पूरा करने की समयसीमा पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रेस क्लब पत्रकारों के लिए आपसी संवाद, बैठक और समाचार संबंधी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में निर्माण कार्य में देरी होने से पत्रकारों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, निर्माण में देरी के वास्तविक कारण, स्वीकृत बजट और जिम्मेदार विभाग की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर सामने आ सकेगी।
 
'ग्लोबल विजन’ को धरातल पर उतारने की चुनौती
 
‘बेस से स्पेस’ का उद्देश्य यदि बस्ती को विकास के नए मुकाम तक पहुंचाना है, तो रोजगार सृजन और स्थानीय स्तर पर आधारभूत सुविधाओं का विकास इसकी प्राथमिकता होनी चाहिए। बड़े विजन की सफलता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्ययोजना, पर्याप्त संसाधनों और धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों से तय होती है।
 
स्थानीय युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों के बीच इन परियोजनाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब यह अपेक्षा की जा रही है कि संबंधित योजनाओं की प्रगति सार्वजनिक की जाए। डेयरी उद्योग परियोजना में निवेश, रोजगार सृजन की समयसीमा और प्रेस क्लब की तीसरी मंजिल के निर्माण को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।
 
अब जवाब का इंतजार
 
बस्ती के विकास को लेकर उठी उम्मीदों को परिणाम में बदलने के लिए जरूरी है कि संबंधित परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो। युवा नेता मनीष मिश्रा और संबंधित जिम्मेदार पक्षों से अपेक्षा है कि वे इन योजनाओं की प्रगति, बजट और आगे की कार्ययोजना के बारे में स्थिति स्पष्ट करें। इससे न केवल लोगों की शंकाएं दूर होंगी, बल्कि ‘बेस से स्पेस’ के विजन की वास्तविक दिशा और गति का भी आकलन हो सकेगा।
 
 

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें

नवीनतम समाचार