लखनऊ विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि; कैंसर के संभावित इलाज की दिशा में शोध को मिला पेटेंट
डॉ. ओम प्रकाश के शोध को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय की मान्यता, कैंसर-रोधी संभावनाओं पर आगे के अनुसंधान का खुलेगा रास्ता
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश के शोध को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने उनके आविष्कार ‘बिस्मथ डाइथायोकार्बामेट कॉम्प्लेक्स, उनके निर्माण की प्रक्रिया और कैंसर-रोधी गतिविधि’ के लिए विश्वविद्यालय को भारतीय पेटेंट संख्या 601484 प्रदान किया है। इसे विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक शोध, नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
यह आविष्कार बिस्मथ डाइथायोकार्बामेट कॉम्प्लेक्स के संश्लेषण और उनकी कैंसर-रोधी गतिविधि से संबंधित है। औषधीय रसायन विज्ञान में धातु आधारित समन्वय यौगिकों का विशेष महत्व है। इनकी रासायनिक संरचना, समन्वय व्यवस्था और भौतिक-रासायनिक गुण जैविक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। डॉ. ओम प्रकाश का शोध इन यौगिकों की संरचना और कैंसर-रोधी गतिविधि के बीच संबंधों के अध्ययन के लिए नया वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराता है।
आगे के शोध की संभावनाएं
इस पेटेंट से संबंधित यौगिकों की कैंसर कोशिकाओं के प्रति चयनात्मकता, जैविक सुरक्षा, विषाक्तता और कार्यप्रणाली का आगे अध्ययन किया जा सकेगा। हालांकि, इनके उपचार में उपयोग की प्रभावशीलता और सुरक्षा प्रमाणित करने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक एवं चिकित्सीय परीक्षण आवश्यक होंगे।
विश्वविद्यालय के लिए यह उपलब्धि बौद्धिक संपदा संरक्षण के साथ ही भविष्य में शोध सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की संभावनाओं को भी बढ़ाएगी। यदि आगामी अध्ययनों में इन यौगिकों की प्रभावशीलता प्रमाणित होती है, तो कैंसर के नए उपचार विकसित करने के प्रयासों में इनका योगदान हो सकता है।


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