नवजात शिशुओं की तस्करी का घिनौना काला कारोबार 

जहां पुलिस ने नवजात बच्चों की डीलिंग करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

हर्षिता यादव  Picture
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मनोज कुमार अग्रवाल 
 
देश में बच्चों की तस्करी खरीद बिक्री के अवैध धंधे को रोकने के लिए बहुत सख्त कानून है इस के बावजूद देश के कई हिस्सों से बच्चों को बेचने की शर्मनाक सूचना आ रहीं हैं हाल ही में महाराष्ट्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है।यह मामला महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) का है, जहां एक लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल ने ऐशो-आराम की जिंदगी जीने, स्मार्टफोन और सोने के गहने खरीदने के लिए अपने महज एक महीने के नवजात शिशु को ₹1.2 लाख में बेच दिया था।
 
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बच्चे को हैदराबाद से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है और जैविक माता-पिता समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।इससे पहले भी इस तरह की वारदात सामने आई है बच्चे की खरीद-फरोख्त के दिल दहला देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के बरेली और शाहजहांपुर से जुड़ा है, जहां पुलिस ने नवजात बच्चों की डीलिंग करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
 
पहले महाराष्ट्र की घटना पर नजर डालिए आपको बता दें कि कपल ने अपने एक महीने के बच्चे को 1.20 लाख रुपये में बेच दिया और उससे मिले पैसों से दो ब्रांडेड स्मार्टफोन और 62,000 रुपये की सोने की ज्वेलरी खरीदी। पुलिस ने बताया कि असली माता-पिता के बच्चे को बेचने के बाद उसके हैदराबाद में मिलने से पहले वह कई लोगों के हाथों से गुजरा। पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे बच्चा बिचौलियों के बीच आगे बढ़ता गया। उसकी कीमत बढ़कर 3.5 लाख रुपये हो गई। 
 
आरोपियों में मुख्य बिचौलियों के तौर पर कौशल्या पवार और उनकी बेटी सीमा रेशवाल (दोनों पास्थिशी, छत्रपति संभाजीनगर की निवासी) की पहचान की गई है। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में संगीता अव्हाड (35, पडगांव निवासी), गुंटुका संगीता, सुरेश राजाराम गुंटुका (44, जगतियाल, तेलंगाना निवासी), जो खुद को डॉक्टर बताते थे और उमा गंगाधर खटकामे (42, तालागाड, हैदराबाद निवासी) शामिल हैं।
 
जांच अधिकारी हरेश्वर घुगे के अनुसार, एक कपल अपने पिछले साथियों से अलग हो चुका था और दो साल से लिव-इन रिलेशनशिप में था। उनके घर 5 जुलाई को एक बेटे का जन्म हुआ। शराब की लत और संवेदनहीनता के कारण कपल ने बच्चे को बेच दिया। कौशल्या पवार ने अपनी बेटी सीमा रेशवाल के साथ मिलकर सौदा पक्का किया और 7 अगस्त को 1.20 लाख रुपये नकद देकर बच्चे को अपनी कस्टडी में ले लिया।इसके बाद सीमा ने बच्चे को अपनी रिश्तेदार संगीता अव्हाड को 2.70 लाख रुपये में बेच दिया।
 
फिर संगीता ने नांदेड़ की यात्रा की और सुरेश गुंटुका (जो डॉक्टर बनकर पेश आया था) के माध्यम से हैदराबाद में उमा खटकामे नाम की महिला को बच्चा 3.50 लाख रुपये में बेच दिया। 48 घंटों के भीतर बच्चा चार लोगों के हाथों से गुजरते हुए तेलंगाना पहुंच गया।जांच अधिकारी हरेश्वर घुगे ने बताया कि 1.5 लाख रुपये के मुनाफे में से कौशल्या ने 1.1 लाख रुपये अपने पास रखे, जबकि सीमा को 40,000 रुपये मिले। कहा जा रहा है कि उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपना कर्ज चुकाने के लिए किया। इस बीच सुरेश ने हैदराबाद में एक महिला रिश्तेदार को बच्चा सौंप दिया।
 
अधिकारी ने बताया कि उसने 3.5 लाख रुपये लिए क्योंकि वह बस एक बिचौलिए की भूमिका निभाना चाहता था। कपड़ों का कारोबार करने वाली वह महिला बच्चे के लिए बहुत बेताब थी, क्योंकि इलाज के बावजूद वह गर्भवती नहीं हो पा रही थीपुलिस ने बताया कि महिला बच्चे को बहुत स्नेह करने लगी। घुगे ने कहा कि उसने बच्चा पाने के लिए बस गलत रास्ता चुना। जब यह पूछा गया कि क्या आरोपी ऐसे ही दूसरे मामलों में भी शामिल थे, तो घुगे ने कहा कि इस मामले से जुड़ी कोई और कड़ी नहीं हैं, और हमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे किसी आरोपी का संबंध ऐसे ही दूसरे मामलों से जुड़ता हो।
 
उन्होंने कहा कि फिलहाल बच्चे को छत्रपति संभाजीनगर के एक अनाथालय में रखा गया है और जिला बाल कल्याण समिति आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला करेगी। दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के बरेली और शाहजहांपुर से जुड़ा है, जहां पुलिस ने नवजात बच्चों की डीलिंग करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस खौफनाक साजिश का मास्टरमाइंड शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज से परास्नातक नर्सिंग कर रहा छात्र योगेश कन्नौजिया निकला।
 
इस रैकेट का मुख्य आरोपी योगेश कन्नौजिया शाहजहांपुर में मेडिकल कॉलेज का छात्र है। उसने इस काम में पवन सिंह नाम के एक वेल्डिंग मिस्त्री को अपने साथ शामिल किया था। पूछताछ के दौरान आरोपी योगेश ने खुलासा किया कि उसने शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज में नौकरी के दौरान लखीमपुर खीरी के एक व्यक्ति से संपर्क किया था। उसे बताया गया था कि पूर्वांचल में एक निसंतान दंपती को नवजात बच्चा चाहिए, जिसके बदले उन्हें 60,000 रुपये मिलेंगे। इसी रकम के लालच में आकर उसने बच्चा चोरी और बिक्री का यह खौफनाक रास्ता चुना।
 
यूपी पुलिस को एक गुमनाम सूचना मिली थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई। पुलिस जब आरोपियों को पकड़ने पहुंची, तो उन्होंने झाड़ियों की आड़ लेकर पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में घायल होने के बाद दोनों आरोपियों (योगेश और पवन) को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की मुस्तैदी की वजह से मासूम बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया। जब बच्चा वापस अपनी मां की गोद में पहुंचा, तो मां की आंखों से आंसू छलक पड़े और उसने हाथ जोड़कर पुलिस और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
 
देश भर में नवजात शिशुओं की चोरी छिपे खरीदारी और बिक्री का अमानवीय सिलसिला जारी है निसंतान दम्पति ऊंची कीमत पर छोटे बच्चों को खरीदने का अवैध और अमानवीय कृत्य कर रहै पुलिस और समाज को इसका विरोध व शिकायत करना चाहिए। भारत में बच्चों की अवैध खरीद-बिक्री को रोकने के लिए कड़े कानून लागू हैं
 
भारतीय न्याय संहिता मानव तस्करी और बच्चों की खरीद-बिक्री के लिए धारा 143 (पहले IPC की धारा 370) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत 7 साल से लेकर आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।किशोर न्याय अधिनियम जेजे एक्ट की धारा 80 और 81 के तहत बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी भी बच्चे को गोद लेना, देना या उसकी खरीद-बिक्री करना पूरी तरह अवैध है। ऐसा करने पर 3 से 5 साल तक की जेल और लाखों रुपये का जुर्माना हो सकता है।
 
अवैध धंधे के मुख्य कारण अवैध गोद लेना कई लोग कानूनी प्रक्रिया की लंबी अवधि से बचने के लिए शॉर्टकट अपनाते हैं।अस्पतालों और बिचौलियों का नेटवर्क: कुछ मामलों में निजी नर्सिंग होम, डॉक्टर, नर्स या आईवीएफ क्लीनिक के बिचौलिए इसमें शामिल पाए जाते हैं। गरीब परिवारों को बहला-फुसलाकर या डराकर उनके बच्चों का सौदा कर दिया जाता है।
 
यदि आपको अपने आस-पास किसी भी प्रकार की शिशु तस्करी, अवैध नर्सिंग होम या बच्चों की खरीद-बिक्री की भनक लगती है, तो आप तुरंत इन नंबरों पर शिकायत कर सकते हैं।  चाइल्डलाइन 1098 यह चौबीसों घंटे चालू रहने वाली मुफ्त राष्ट्रीय हेल्पलाइन है। 112 या 100 पर कॉल करके स्थानीय पुलिस को सूचित करें। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट या राज्य बाल अधिकार आयोग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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