रेंजर बोले- भूमि खाली कराकर बड़े पैमाने पर कराया जाए पौधरोपण

बैगुल डाम क्षेत्र की 426.13 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण की चपेट में

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सितारगंज। लौका क्षेत्र में सरकारी एवं वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर वन विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराने और इसके बाद वहां बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराने की जरूरत बताई है। बाराकोली वन क्षेत्र के वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र सिंह रेकुनी ने शिकायत के जवाब में बताया कि बैगुल डाम क्षेत्र में 426.13 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। इस भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर वन विभाग को वापस किया जाना है। विभागीय विवरण में इस क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले 434 परिवारों का उल्लेख किया गया है।
वन क्षेत्राधिकारी के अनुसार वर्ष 1969 में कोर्ट खर्रा तथा बाराकोली वन क्षेत्र की कुल 1583.50 हेक्टेयर भूमि सिंचाई विभाग को हस्तांतरित की गई थी। इस भूमि में से जो क्षेत्र वर्तमान में अतिक्रमण की चपेट में है, उसे खाली कराकर वन विभाग को वापस किया जाना प्रस्तावित है। हालांकि अभी तक यह अतिक्रमित भूमि वन विभाग को वापस नहीं हुई है। इसके चलते भूमि के उपयोग और भविष्य में इसके संरक्षण को लेकर भी विभाग के सामने चुनौती बनी हुई है।

रेंजर महेंद्र सिंह रेकुनी ने कहा कि सरकारी एवं वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना जरूरी है। भूमि खाली होने के बाद उसे दोबारा अतिक्रमण की चपेट में आने से बचाने के लिए वहां बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि पौधरोपण के साथ ही क्षेत्र में नियमित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी होगी। इससे एक ओर भूमि का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने बताया कि शासन की ओर से वर्ष 1975 में जारी आदेश में भी अतिक्रमित भूमि को खाली कराकर वहां वृक्षारोपण कराने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में अतिक्रमण से मुक्त होने वाली भूमि पर पौधरोपण कराया जाना न केवल पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भूमि को भविष्य में दोबारा कब्जे से बचाने के लिहाज से भी प्रभावी कदम साबित हो सकता है।

वन विभाग का कहना है कि लंबे समय से अतिक्रमण की स्थिति वाली भूमि को मुक्त कराने के बाद उसका संरक्षण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। इसके लिए पौधरोपण के साथ पौधों की देखभाल, नियमित निगरानी और सुरक्षा की व्यवस्था भी आवश्यक है। विभागीय स्तर पर भूमि वापस मिलने के बाद क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

लौका और बैगुल डाम क्षेत्र में बड़ी मात्रा में भूमि अतिक्रमण की चपेट में होने के कारण मामला पर्यावरण और सरकारी भूमि के संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में अतिक्रमण हटने के बाद यदि बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया जाता है तो इससे खाली हुई भूमि का बेहतर उपयोग होने के साथ क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को भी लाभ मिल सकता है।


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