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नवविवाहिता को एक साथ 40 गोलियां खिलाने का आरोप
हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने की मांग
मीरा-भाईंदर में दहेज उत्पीड़न का सनसनीखेज मामला: नवविवाहिता को एक साथ 40 गोलियां खिलाने का आरोप, हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने की मांग
पति, सास, ससुर और ननद पर गंभीर आरोप; पीड़िता और मामा ने डीसीपी राहुल चौहान से मिलकर लगाई न्याय की गुहार, निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
खबर:रामकृष्ण मिश्रा (मुंबई)
मीरा-भाईंदर। महाराष्ट्र के मीरा-भाईंदर से दहेज उत्पीड़न और नवविवाहिता के साथ कथित गंभीर हिंसा का एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। नवघर पुलिस थाना क्षेत्र की रहने वाली 23 वर्षीय आयुषी विशाल पांडे ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग को लेकर लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने तथा कथित तौर पर जानलेवा हरकत करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के परिवार का दावा है कि 17 अक्टूबर 2026 को घरेलू विवाद के दौरान आयुषी को एक साथ करीब 40 गोलियां खिलाई गईं, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इस मामले ने एक बार फिर दहेज प्रथा, विवाहित महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू हिंसा के मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता और उसके परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही आयुषी को दहेज और घरेलू जिम्मेदारियों के नाम पर परेशान किया जा रहा था। परिवार का कहना है कि प्रताड़ना का सिलसिला लगातार बढ़ता गया और आखिरकार मामला एक गंभीर स्वास्थ्य आपातस्थिति तक पहुंच गया।
पीड़िता पक्ष ने अब मामले में हत्या के प्रयास से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 जोड़ने की मांग की है। इस संबंध में पीड़िता और उसके मामा बृजेश मिश्र ने मीरा-भाईंदर के डीसीपी राहुल चौहान से मुलाकात कर अपनी शिकायत और मांगें रखी हैं।
दिसंबर 2025 में हुई थी शादी, शादी के बाद शुरू हुई कथित प्रताड़ना
प्राप्त जानकारी और पीड़िता पक्ष की शिकायत के अनुसार, आयुषी पांडे का विवाह दिसंबर 2025 में वाराणसी में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। शादी के समय परिवार ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार विवाह की सभी रस्में पूरी की थीं। हालांकि, पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल में आयुषी को दहेज और अन्य घरेलू मामलों को लेकर परेशान किया जाने लगा।
परिवार का आरोप है कि आयुषी से कथित तौर पर 50 लाख रुपये की मांग की जा रही थी। मांग पूरी नहीं होने के कारण उसे मानसिक दबाव और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था। पीड़िता पक्ष का कहना है कि आयुषी ने कई बार परिवार को अपनी परेशानियों के बारे में बताया था, लेकिन परिस्थितियों में कोई सुधार नहीं हुआ।
परिजनों के मुताबिक, शादी के बाद एक बेटी के रूप में आयुषी ने अपने वैवाहिक जीवन को सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया, लेकिन कथित तौर पर लगातार होने वाली प्रताड़ना ने उसकी स्थिति और मुश्किल बना दी।
17 अक्टूबर की घटना ने बढ़ाई परिवार की चिंता, 40 गोलियां खिलाने का आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप 17 अक्टूबर 2026 की घटना को लेकर लगाया गया है। पीड़िता पक्ष के अनुसार, उस दिन सुबह करीब 8 बजे घर में किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इस दौरान आयुषी के साथ उसकी सास और ननद ने मारपीट की।
परिजनों का दावा है कि विवाद के दौरान ननद, जिन्हें परिवार डॉक्टर बताता है, ने कथित तौर पर आयुषी को एक साथ करीब 40 गोलियां खिला दीं। परिवार का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में गोलियां दिए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।
पीड़िता के परिवार ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि इसकी पूरी परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए। साथ ही, यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि कथित तौर पर दी गई गोलियां कौन-सी थीं, किस उद्देश्य से दी गई थीं और इस पूरे घटनाक्रम में परिवार के किन-किन सदस्यों की भूमिका रही।
हालांकि, गोलियों की वास्तविक संख्या, दवाओं की प्रकृति और घटना के दौरान अलग-अलग व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि मेडिकल रिकॉर्ड और पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में कराया गया भर्ती, कई अस्पतालों में हुआ उपचार
पीड़िता पक्ष के अनुसार, कथित घटना के बाद आयुषी की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ी। परिवार ने बताया कि आयुषी को पहले मीरा रोड स्थित चिरायु और तुंगा अस्पताल में उपचार के लिए ले जाया गया। इसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए गोरेगांव के एक अन्य निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
परिजनों का कहना है कि इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार की प्राथमिकता फिलहाल आयुषी का स्वास्थ्य, उसकी सुरक्षा और उसे उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
पीड़िता पक्ष चाहता है कि अस्पताल में हुए उपचार, डॉक्टरों की रिपोर्ट, मेडिकल जांच और अन्य संबंधित दस्तावेजों को पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।
पति समेत चार लोगों के खिलाफ नवघर पुलिस थाने में FIR दर्ज
मामले में पुलिस की कार्रवाई के तहत नवघर पुलिस थाना में 20 अक्टूबर 2026 को पति समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85, 316(2), 351(2), 3(5) और 115(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक मुकुंद व्यंकटेश यादव को सौंपी गई है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाना है कि पीड़िता के साथ कथित तौर पर किस प्रकार की प्रताड़ना हुई और 17 अक्टूबर की घटना में किन व्यक्तियों की क्या भूमिका रही।
पीड़िता पक्ष का कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपों की गहराई से जांच होनी चाहिए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पीड़िता के बयान को लेकर परिवार ने उठाए सवाल
पीड़िता के मामा बृजेश मिश्र ने पुलिस जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी भांजी का बयान उचित तरीके से दर्ज नहीं किया और घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया।
इसी मुद्दे को लेकर पीड़िता और उनके मामा ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने डीसीपी राहुल चौहान के समक्ष अपनी बात रखते हुए मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग की।
परिवार की प्रमुख मांग है कि आयुषी का बयान दोबारा दर्ज किया जाए, जिसमें उसके साथ हुई कथित प्रताड़ना, दहेज की मांग, घरेलू विवाद और 17 अक्टूबर की घटना का पूरा विवरण शामिल हो।
परिजनों का कहना है कि पीड़िता की स्थिति और उसके द्वारा बताए गए तथ्यों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को नजरअंदाज किए बिना सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए।
BNS की धारा 109 जोड़ने की मांग, हत्या के प्रयास के पहलू की जांच पर जोर
इस मामले में पीड़िता पक्ष की सबसे महत्वपूर्ण मांग भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 जोड़ने को लेकर है। यह धारा हत्या के प्रयास से संबंधित है।
परिवार का आरोप है कि आयुषी को कथित तौर पर एक साथ करीब 40 गोलियां खिलाने की घटना केवल घरेलू विवाद या मारपीट तक सीमित नहीं मानी जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस घटना की परिस्थितियों को देखते हुए यह जांच आवश्यक है कि क्या पीड़िता की जान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया था।
पीड़िता और उसके मामा चाहते हैं कि पुलिस मेडिकल रिपोर्ट, दवाओं से संबंधित जानकारी, डॉक्टरों के बयान, अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करे।
परिवार की मांग है कि यदि जांच में हत्या के प्रयास से संबंधित कानूनी तत्व प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ BNS की धारा 109 के तहत भी कार्रवाई की जाए।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ इस धारा को लागू करने का निर्णय जांच में सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी आवश्यकताओं के आधार पर पुलिस तथा संबंधित न्यायिक प्रक्रिया द्वारा तय किया जाएगा।
पति, सास, ससुर और ननद की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़िता के परिवार ने पति, सास, ससुर और ननद सहित सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि कथित प्रताड़ना और 17 अक्टूबर की घटना के संबंध में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए।
परिवार चाहता है कि जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाए कि आयुषी को कथित रूप से दहेज के लिए किस प्रकार परेशान किया जाता था, 50 लाख रुपये की मांग किसने की थी और घटना वाले दिन घर में वास्तव में क्या हुआ था।
पीड़िता पक्ष ने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मामले की जांच किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त होकर की जाए। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता साक्ष्यों से सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य जांच के लिए होंगे महत्वपूर्ण
इस मामले में मेडिकल साक्ष्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पीड़िता पक्ष का आरोप है कि आयुषी को बड़ी संख्या में गोलियां दी गई थीं। ऐसे में अस्पतालों की मेडिकल रिपोर्ट, उपचार के दौरान दर्ज किए गए विवरण, दवाओं की पहचान और चिकित्सकों की राय घटना की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इसके अलावा, पीड़िता के बयान, परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान तथा उपलब्ध अन्य दस्तावेजों की भी जांच आवश्यक होगी।
परिवार की मांग है कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो और सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए उनका निष्पक्ष परीक्षण किया जाए।
दहेज उत्पीड़न के खिलाफ फिर उठे गंभीर सवाल
आयुषी पांडे का मामला एक बार फिर समाज के सामने दहेज प्रथा जैसी गंभीर सामाजिक बुराई का मुद्दा लेकर आया है। विवाह को दो परिवारों के बीच विश्वास, सम्मान और नए जीवन की शुरुआत माना जाता है, लेकिन जब उसी रिश्ते में पैसों की मांग, मानसिक दबाव और कथित शारीरिक प्रताड़ना के आरोप सामने आते हैं, तो यह समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
दहेज की मांग करना कानूनन अपराध है। किसी महिला को विवाह के बाद आर्थिक मांगों के लिए प्रताड़ित करना न केवल उसके अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि उसके सम्मान और सुरक्षा पर भी गंभीर आघात है।
ऐसे मामलों में पीड़िता को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, उसकी शिकायत को गंभीरता से सुनना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
परिवार को न्याय की उम्मीद, पुलिस की आगे की कार्रवाई पर निगाहें
फिलहाल आयुषी पांडे का परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। परिवार की मांग है कि पीड़िता का बयान उचित तरीके से दर्ज किया जाए, कथित 40 गोलियां खिलाने की घटना की गहन जांच हो और हत्या के प्रयास से संबंधित धारा 109 BNS जोड़ने की मांग पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए।
परिजनों का कहना है कि उन्हें पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा है, ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके और पीड़िता को न्याय मिल सके।
यह मामला केवल एक नवविवाहिता और उसके परिवार की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की वैवाहिक सुरक्षा, दहेज उत्पीड़न के खिलाफ कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और पुलिस जांच की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।
अब सभी की निगाहें मीरा-भाईंदर पुलिस की आगे की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
मीरा-भाईंदर से रिपोर्ट।


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