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बनारस को 'मिर्जापुर' बनाने की तैयारी में थे हथियार तस्कर
शहर के रिहायशी इलाके में बाकायदा अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी
बनारस को 'मिर्जापुर' बनाने की तैयारी में थे हथियार तस्कर, पिता-पुत्र चला रहे थे अवैध असलहा फैक्ट्री; पुलिस मुठभेड़ में तीन गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच की टीम पर तस्करों ने की फायरिंग, सिपाही अमित शुक्ला को लगी तीन गोलियां; सामने घाट के किराए के मकान में चल रहा था हथियार बनाने का कारोबार, भारी मात्रा में तमंचे, पिस्टल, कारतूस और उपकरण बरामद
वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में अपराधियों ने फिल्मी अंदाज में अवैध हथियारों का कारोबार खड़ा करने की कोशिश की। लंका थाना क्षेत्र के सामने घाट स्थित शिवाजी नगर कॉलोनी में किराए के मकान में संचालित हो रही अवैध असलहा फैक्ट्री का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। शुरुआती जांच के अनुसार, इस फैक्ट्री का संचालन पिता-पुत्र की जोड़ी कर रही थी। गिरोह पिछले करीब तीन महीनों से हथियार बनाने और उनकी तस्करी की तैयारी में जुटा था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने क्राइम ब्रांच की टीम पर फायरिंग कर दी, जिसमें सिपाही अमित शुक्ला घायल हो गए। बाद में पुलिस ने घेराबंदी और मुठभेड़ के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
इस पूरे मामले ने इसलिए भी सनसनी फैला दी है, क्योंकि शहर के रिहायशी इलाके में बाकायदा अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने बिहार से हथियार बनाने के उपकरण मंगवाए थे और किराए के मकान को अवैध हथियार निर्माण के ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
तीन महीने पहले शुरू किया था अवैध हथियारों का कारोबार
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी अंजनी कुमार झा ने अपने पिता विमल कांत झा के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार की शुरुआत की थी। बताया जा रहा है कि करीब तीन महीने पहले बिहार से हथियार बनाने के उपकरण मंगवाए गए थे। इसके बाद सामने घाट स्थित मकान में अवैध असलहा फैक्ट्री स्थापित कर हथियारों का निर्माण शुरू किया गया।
फैक्ट्री में देशी तमंचों के साथ पिस्टल बनाने का काम भी किया जा रहा था। गिरोह तैयार हथियारों को करीब 35 हजार रुपये में बेचने की तैयारी में था। हथियारों के निर्माण से लेकर उनकी सप्लाई तक के लिए गिरोह ने अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दे रखी थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस दौरान कितने हथियार तैयार किए गए और उनकी सप्लाई किन-किन लोगों तक की गई।
मुखबिर की सूचना पर क्राइम ब्रांच ने की कार्रवाई
अवैध हथियारों के निर्माण और तस्करी की गतिविधियों की जानकारी पुलिस को मुखबिर के माध्यम से मिली थी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की। टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां मौजूद संदिग्धों को पकड़ने का प्रयास किया गया। इस दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ लिया, लेकिन तीसरे आरोपी ने पुलिस टीम पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी।
अचानक हुई फायरिंग से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान क्राइम ब्रांच के सिपाही अमित शुक्ला को तीन गोलियां लग गईं। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। साथी सिपाही को घायल देखकर पुलिस टीम ने मोर्चा संभाला और उन्हें तत्काल सुरक्षा एवं बैकअप उपलब्ध कराया। इसी दौरान आरोपियों ने मौके का फायदा उठाया और फरार हो गए।
सिपाही अमित शुक्ला को लगी तीन गोलियां, पुलिस ने शुरू की घेराबंदी
अपने साथी पर हुए हमले के बाद पुलिस टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए तत्काल घेराबंदी शुरू कर दी। क्राइम ब्रांच और पुलिस की अन्य टीमों ने संभावित ठिकानों पर तलाश अभियान चलाया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की तलाश के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसके बाद तीनों को घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। सभी को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घायल सिपाही अमित शुक्ला को भी उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिसकर्मी पर हुई फायरिंग की घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।
अंजनी कुमार झा निकला गैंग का मुख्य संचालक, पिता भी था शामिल
पुलिस पूछताछ में गिरोह के संचालन से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच के अनुसार, गैंग का मुख्य संचालक अंजनी कुमार झा था, जो अपने पिता विमल कांत झा के साथ मिलकर अवैध हथियारों की फैक्ट्री चला रहा था। गिरोह के अन्य सदस्यों में राजू तिवारी, राज विश्वकर्मा और अमन मिश्रा के नाम भी सामने आए हैं।
बताया जा रहा है कि अंजनी कुमार झा नौवीं कक्षा तक पढ़ा है। कम उम्र और सीमित शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बावजूद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अवैध हथियार निर्माण और तस्करी का नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश की। पुलिस अब गिरोह के प्रत्येक सदस्य की भूमिका की जांच कर रही है।
सामने घाट के शिवाजी नगर में किराए के मकान से भारी बरामदगी
पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सामने घाट स्थित शिवाजी नगर कॉलोनी के एक मकान में छापेमारी की। तलाशी के दौरान पुलिस को वहां अवैध हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों का बड़ा जखीरा मिला। इसके अलावा कई अवैध देशी तमंचे, पिस्टल, सैकड़ों जिंदा कारतूस और खोखे भी बरामद किए गए।
बरामदगी से यह स्पष्ट हुआ कि मकान का इस्तेमाल केवल हथियार रखने के लिए नहीं, बल्कि उनके निर्माण के लिए भी किया जा रहा था। पुलिस अब बरामद हथियारों और उपकरणों की तकनीकी जांच के साथ यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फैक्ट्री में कितने समय से हथियार तैयार किए जा रहे थे।
35 हजार रुपये में हथियार बेचने की थी तैयारी
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह तैयार हथियारों को करीब 35 हजार रुपये में बेचने की योजना बना रहा था। इसके लिए आरोपियों ने तस्करी और सप्लाई का नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की थी। गिरोह के सदस्य हथियारों को जरूरतमंद खरीदारों तक पहुंचाने के लिए आपसी संपर्क और भरोसेमंद लोगों का सहारा ले रहे थे।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हथियारों की खरीद-फरोख्त में कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इस गिरोह का नेटवर्क वाराणसी के बाहर दूसरे जिलों या राज्यों तक फैला हुआ था।
काशी के रिहायशी इलाके में अवैध फैक्ट्री मिलने से मचा हड़कंप
वाराणसी के रिहायशी इलाके में अवैध हथियार फैक्ट्री का संचालन सामने आने के बाद पूरे शहर में चर्चा तेज हो गई है। धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान रखने वाले शहर के बीचोंबीच इस तरह का अवैध कारोबार संचालित होना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीर मामला माना जा रहा है।
पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। जांच का मुख्य फोकस हथियार बनाने के उपकरणों की सप्लाई, तैयार हथियारों के खरीदारों, तस्करी के रास्तों और गिरोह से जुड़े अन्य संभावित लोगों पर है।
फिलहाल पुलिस की इस कार्रवाई को अवैध हथियारों के कारोबार के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि, गिरोह के नेटवर्क और हथियारों की सप्लाई से जुड़े सभी पहलुओं का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।


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