गांवों में साकार हो रहा है पंचायतों का समग्र कायाकल्प

इससे प्रत्येक ग्रामीण परिवार को उनके घर पर ही मानक के अनुरूप स्वच्छ पेयजल सुलभ हो रहा है।

हर्षिता यादव  Picture
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उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप जनपद बलरामपुर में सरयू नदी के तटवर्ती क्षेत्रों के विकास हेतु एक सुनियोजित कार्ययोजना लागू की गई है। इसके अंतर्गत नदी की भौगोलिक परिधि में स्थित 25 ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच को नई गति प्रदान की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दशकों से उपेक्षित रहे इन ग्रामीण अंचलों में जीवन स्तर को सुधारना और आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाना है।

जनपद बलरामपुर के ये तटवर्ती गांव लंबे समय से बाढ़, कटान और मौसमी जलभराव जैसी प्रतिकूल स्थितियों का सामना करते रहे हैं। इन चुनौतियों के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन द्वारा समेकित विकास मॉडल तैयार किया गया है। चिह्नित 25 पंचायतों में प्रत्येक गांव की भौगोलिक और सामाजिक आवश्यकताओं के आधार पर प्राथमिकताओं का निर्धारण हुआ है, ताकि विकास का वास्तविक लाभ अंतिम छोर पर स्थित ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे।

विकास कार्यों को धरातल पर समयबद्ध रूप से पूरा कराने के लिए बहुस्तरीय वित्तीय संरचना स्थापित की गई है। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर लगभग 35 लाख रुपये, जिला स्तर पर 30 लाख रुपये, तहसील स्तर पर 20 लाख रुपये, ब्लॉक स्तर पर 15 लाख रुपये तथा अन्य विभागीय स्तरों पर 10 लाख रुपये तक की धनराशि का प्रावधान किया गया है। यह विकेंद्रीकृत वित्तीय व्यवस्था निर्माण कार्यों में गति लाने का ठोस आधार बनी है। वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता निर्बाध रखने के लिए केंद्रीय एवं राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के साथ विभिन्न केंद्रीय व प्रांतीय योजनाओं का अभिसरण किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा बजट की उपलब्धता को प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी महत्वपूर्ण परियोजना में संसाधनों का अभाव आड़े न आए और स्वीकृत धनराशि का सदुपयोग पूर्ण गुणवत्ता के साथ हो।

तटवर्ती क्षेत्रों में आवागमन की सुगमता के लिए सुदृढ़ ग्रामीण सड़क नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। नदी कछार के प्रमुख मजरों को मुख्य पक्के मार्गों से जोड़ने के साथ गांवों के भीतरी रास्तों पर इंटरलॉकिंग, सी.सी. रोड और व्यवस्थित जल निकासी नालियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे मानसून के दिनों में उत्पन्न होने वाले जलभराव और संपर्क विच्छेद की समस्या का स्थायी समाधान होगा। शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत हर घर नल से जल पहुंचाने का कार्य प्राथमिकता पर संचालित है। तटवर्ती भूजल संदूषण और जलजनित बीमारियों से ग्रामीणों को सुरक्षित रखने हेतु उच्च क्षमता वाले ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इससे प्रत्येक ग्रामीण परिवार को उनके घर पर ही मानक के अनुरूप स्वच्छ पेयजल सुलभ हो रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत इन सभी 25 ग्राम पंचायतों को ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से संतृप्त करने का सघन अभियान जारी है। सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण, व्यक्तिगत शौचालयों का सुदृढ़ीकरण, सोकपिट और कचरा पृथक्करण केंद्रों की स्थापना की जा रही है। इससे नदी के निकटवर्ती गांवों में जनस्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वच्छता का उच्च स्तर कायम करने में मदद मिल रही है। प्राथमिक शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार के उद्देश्य से ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों का सर्वांगीण विकास कराया जा रहा है। विद्यालयों में सुरक्षित चारदीवारी, बालक-बालिकाओं हेतु पृथक शौचालय, शुद्ध पेयजल, विद्युतीकरण, टाइलीकरण और आधुनिक फर्नीचर की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही प्राथमिक स्तर पर डिजिटल शिक्षा के विस्तार हेतु स्मार्ट क्लास और पुस्तकालयों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक सुलभ कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्रों तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण, मातृ-शिशु सुरक्षा और आपातकालीन प्राथमिक उपचार की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। नदी के जलस्तर में वृद्धि के दौरान संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु जिला प्रशासन द्वारा विशेष सचल चिकित्सा दलों की तैनाती की गई है।

सरयू नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में भूमि कटान और बाढ़ के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए तटबंधों की मरम्मत, जल निकासी मार्गों की सफाई और तटीय क्षेत्रों में वृहद पौधरोपण किया जा रहा है। मृदा संरक्षण और जल प्रबंधन के इन संयुक्त प्रयासों से कृषि योग्य भूमि का क्षरण रुकेगा और तटवर्ती किसानों की फसलों को अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखा जा सकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने हेतु राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूहों को सक्रिय किया जा रहा है। महिलाओं को पारंपरिक हस्तशिल्प, कृषि प्रसंस्करण, डेयरी और कुटीर उद्योगों से जोड़कर तकनीकी प्रशिक्षण के साथ वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए साधन विकसित हो रहे हैं और पारिवारिक आय में वृद्धि दर्ज हो रही है।

किसानों की समृद्धि के लिए राष्ट्रीय सरयू नहर परियोजना की उप-शाखाओं के जल का समुचित वितरण सुनिश्चित करते हुए उन्नत कृषि, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्नत बीजों, कृषि रक्षा रसायनों और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन पर बल दिया जा रहा है, ताकि उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। ग्राम पंचायतों के दैनिक प्रशासनिक कार्यों और नागरिक सेवाओं को पारदर्शी बनाने हेतु ‘ग्राम सचिवालय’ व्यवस्था को प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया गया है। पंचायत भवनों में कंप्यूटर, इंटरनेट और पंचायत सहायकों की उपस्थिति से ग्रामीणों को खतौनी, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र तथा पेंशन योजनाओं की सुविधाएं गांव में ही सुलभ हो रही हैं, जिससे तहसील और ब्लॉक स्तर की अनावश्यक भागदौड़ समाप्त हुई है।

जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं की समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु कठोर निगरानी तंत्र लागू किया गया है। विकास कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए जियो-टैगिंग और डिजिटल पोर्टल का उपयोग हो रहा है। नियमित औचक निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण और खुली बैठकों में सोशल ऑडिट की व्यवस्था से वित्तीय शुचिता और निर्माण कार्यों की दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित की जा रही है।

प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के समन्वय से जनपद बलरामपुर की इन 25 ग्राम पंचायतों में संचालित यह अभियान न केवल बुनियादी ढांचे का कायाकल्प कर रहा है, बल्कि सामाजिक समानता और आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। प्रशासनिक तत्परता और जनसहभागिता के इस संगम से सरयू तट के ये गांव आत्मनिर्भर ग्राम्य जीवन के सशक्त मॉडल के रूप में उभर रहे हैं।

ग्राम पंचायतों के दैनिक प्रशासनिक कार्यों और नागरिक सेवाओं को पारदर्शी बनाने हेतु ‘ग्राम सचिवालय’ व्यवस्था को प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया गया है। पंचायत भवनों में कंप्यूटर, इंटरनेट और पंचायत सहायकों की उपस्थिति से ग्रामीणों को खतौनी, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र तथा पेंशन योजनाओं की सुविधाएं गांव में ही सुलभ हो रही हैं, जिससे तहसील और ब्लॉक स्तर की अनावश्यक भागदौड़ समाप्त हुई है।

जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं की समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु कठोर निगरानी तंत्र लागू किया गया है। विकास कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए जियो-टैगिंग और डिजिटल पोर्टल का उपयोग हो रहा है। नियमित औचक निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण और खुली बैठकों में सोशल ऑडिट की व्यवस्था से वित्तीय शुचिता और निर्माण कार्यों की दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के समन्वय से जनपद बलरामपुर की इन 25 ग्राम पंचायतों में संचालित यह अभियान न केवल बुनियादी ढांचे का कायाकल्प कर रहा है, बल्कि सामाजिक समानता और आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। प्रशासनिक तत्परता और जनसहभागिता के इस संगम से सरयू तट के ये गांव आत्मनिर्भर ग्राम्य जीवन के सशक्त मॉडल के रूप में उभर रहे हैं
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सूचना अधिकारी, जनपद बलरामपुर/
डॉ0 सीमा गुप्ता, से0नि0 सहा0 निदेशक सूचना

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