भाषा विश्वविद्यालय की शोधार्थी पूजा यादव का आईसीएसएसआर फेलोशिप के लिए चयन
उत्तर प्रदेश में विरासत पर्यटन पर शोध को मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
संवाददाता प्रगति यादव
लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की शोधार्थी पूजा यादव का भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) की डॉक्टोरल फेलोशिप 2026-27 के लिए अनंतिम चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में खुशी का माहौल है। शिक्षकों और सहपाठी शोधार्थियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके शोध कार्य की सफलता की कामना की।
पूजा यादव डॉ. पूनम चौधरी के निर्देशन में पीएचडी कर रही हैं। उनका शोध विषय ‘म्यूजियम, राज्य नीति और उत्तर प्रदेश में विरासत पर्यटन का विकास (1950-2015)’ है। शोध के माध्यम से वह यह समझने का प्रयास कर रही हैं कि इस अवधि में उत्तर प्रदेश के संग्रहालयों, सरकारी नीतियों और विरासत पर्यटन के बीच किस तरह संबंध विकसित हुआ और इसका प्रदेश के पर्यटन पर क्या प्रभाव पड़ा।
आईसीएसएसआर की डॉक्टोरल फेलोशिप सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध को प्रोत्साहित करने वाली प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फेलोशिप है। पूजा यादव का चयन उनके शोध प्रस्ताव की अकादमिक गुणवत्ता और विषय की प्रासंगिकता को दर्शाता है। फेलोशिप मिलने से उन्हें अपने शोध को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक अकादमिक एवं शोध संसाधन उपलब्ध होंगे।
कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने पूजा यादव को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों की ऐसी उपलब्धियां न केवल विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाती हैं, बल्कि अन्य विद्यार्थियों को भी गंभीर और गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रेरित करती हैं।
इतिहास विभाग के शिक्षकों ने भी पूजा यादव को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि उनका शोध उत्तर प्रदेश के इतिहास, संग्रहालयों और विरासत पर्यटन के अध्ययन में उपयोगी योगदान देगा।
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