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मलिहाबाद: पांच दिन पहले बनी सड़क उखड़ने लगी, निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद विकासखंड के ग्राम रामनगर में सड़क निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
मलिहाबाद, लखनऊ। राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद विकासखंड के ग्राम रामनगर में सड़क निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में करीब पांच दिन पहले ही डामर सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन निर्माण के कुछ ही दिनों बाद सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी है। सड़क की बदहाल स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संबंधित जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीण प्रकाश, बबलू, हेमनाथ, रिशु, दशरथ, हीरालाल, प्रशांत, शैलेंद्र, आशीष गौतम, सुनीता, आकाश, कपिल और सतीश समेत दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया। ग्रामीणों ने मौके पर सड़क से उखड़ रही डामर की परत और बजरी दिखाते हुए निर्माण कार्य में कथित अनियमितता का आरोप लगाया है।
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520 मीटर के एस्टीमेट में 300 मीटर सड़क बनाने का आरोप
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में एक और गंभीर अनियमितता का आरोप लगाते हुए बताया कि शासन की ओर से सड़क निर्माण के लिए 520 मीटर का एस्टीमेट जारी किया गया था, जबकि ठेकेदार ने कथित तौर पर महज 300 मीटर सड़क का ही निर्माण कराया है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब एस्टीमेट 520 मीटर का था तो शेष सड़क का निर्माण क्यों नहीं कराया गया? इस मामले में ग्रामीणों ने पूरे कार्य की जांच और एस्टीमेट के अनुसार निर्माण कराने की मांग की है।
ठेकेदार का जवाब भी बना चर्चा का विषय
ग्रामीण प्रकाश के अनुसार, जब उन्होंने सड़क की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदार से शिकायत की तो कथित तौर पर ठेकेदार ने जवाब दिया कि सड़क जैसी बनाई गई है, वैसी ही बनेगी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क को हाथ लगाने भर से डामर और बजरी उखड़ रही है, जो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।
100 साल बाद गांव में बनी सड़क, पांच दिन में ही
ग्रामीणों का कहना है कि गांव बसने के करीब 100 साल बाद पहली बार सड़क निर्माण के रूप में विकास कार्य हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें कच्चे और कीचड़ भरे रास्तों से निजात मिलेगी, लेकिन निर्माण के महज पांच दिन बाद ही सड़क की हालत खराब होने लगी। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के बाद रास्ते में फिसलन और कीचड़ की समस्या बढ़ गई है। स्कूली बच्चों को आने-जाने में परेशानी हो रही है और कई बार बच्चे रास्ते में फिसलकर चोटिल भी हो रहे हैं।
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ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने, 520 मीटर के स्वीकृत एस्टीमेट और मौके पर हुए निर्माण की माप कराने तथा मानकों के अनुरूप दोबारा गुणवत्तापूर्ण सड़क बनवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर पांच दिन पहले बनी सड़क की परत क्यों उखड़ने लगी? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाएगी? और यदि एस्टीमेट के मुकाबले कम सड़क बनी है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीणों को अब संबंधित विभाग और प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।
ग्रामीण प्रकाश, बबलू, हेमनाथ, रिशु, दशरथ, हीरालाल, प्रशांत, शैलेंद्र, आशीष गौतम, सुनीता, आकाश, कपिल और सतीश समेत दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया। ग्रामीणों ने मौके पर सड़क से उखड़ रही डामर की परत और बजरी दिखाते हुए निर्माण कार्य में कथित अनियमितता का आरोप लगाया है।
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520 मीटर के एस्टीमेट में 300 मीटर सड़क बनाने का आरोप
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में एक और गंभीर अनियमितता का आरोप लगाते हुए बताया कि शासन की ओर से सड़क निर्माण के लिए 520 मीटर का एस्टीमेट जारी किया गया था, जबकि ठेकेदार ने कथित तौर पर महज 300 मीटर सड़क का ही निर्माण कराया है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब एस्टीमेट 520 मीटर का था तो शेष सड़क का निर्माण क्यों नहीं कराया गया? इस मामले में ग्रामीणों ने पूरे कार्य की जांच और एस्टीमेट के अनुसार निर्माण कराने की मांग की है।
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ठेकेदार का जवाब भी बना चर्चा का विषय
ग्रामीण प्रकाश के अनुसार, जब उन्होंने सड़क की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदार से शिकायत की तो कथित तौर पर ठेकेदार ने जवाब दिया कि सड़क जैसी बनाई गई है, वैसी ही बनेगी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क को हाथ लगाने भर से डामर और बजरी उखड़ रही है, जो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।
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100 साल बाद गांव में बनी सड़क, पांच दिन में ही
बदहाल
ग्रामीणों का कहना है कि गांव बसने के करीब 100 साल बाद पहली बार सड़क निर्माण के रूप में विकास कार्य हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें कच्चे और कीचड़ भरे रास्तों से निजात मिलेगी, लेकिन निर्माण के महज पांच दिन बाद ही सड़क की हालत खराब होने लगी। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के बाद रास्ते में फिसलन और कीचड़ की समस्या बढ़ गई है। स्कूली बच्चों को आने-जाने में परेशानी हो रही है और कई बार बच्चे रास्ते में फिसलकर चोटिल भी हो रहे हैं।
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ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने, 520 मीटर के स्वीकृत एस्टीमेट और मौके पर हुए निर्माण की माप कराने तथा मानकों के अनुरूप दोबारा गुणवत्तापूर्ण सड़क बनवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर पांच दिन पहले बनी सड़क की परत क्यों उखड़ने लगी? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाएगी? और यदि एस्टीमेट के मुकाबले कम सड़क बनी है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीणों को अब संबंधित विभाग और प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।
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