दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश के साथ इन देवी-देवताओं की भी होती है पूजा, जानिए अलग-अलग परंपराओं का धार्मिक महत्व
धन, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना से देशभर में मनाया जाता है दीपोत्सव, कहीं मां काली तो कहीं कुबेर और हनुमान जी की आराधना का है विशेष विधान
स्वतंत्र प्रभात।
दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने, मिठाइयां बांटने और घरों को सजाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विविधता और सदियों पुरानी परंपराओं का अनूठा संगम भी है। इस दिन देशभर में करोड़ों श्रद्धालु मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। हालांकि, भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में दीपावली के अवसर पर कई अन्य देवी-देवताओं की आराधना की भी विशेष परंपरा है। कहीं मां काली की पूजा होती है, तो कहीं धन के देवता कुबेर और शक्ति एवं भक्ति के प्रतीक हनुमान जी का स्मरण किया जाता है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मां लक्ष्मी का प्राकट्य समुद्र मंथन से बताया गया है। उनका स्वरूप कमल पर विराजमान, हाथों में कमल धारण किए हुए और दिव्य आभा से युक्त वर्णित है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी ऐसे लोगों के यहां निवास करती हैं, जो धर्म का पालन करते हैं, परिश्रम करते हैं और सदाचार का जीवन जीते हैं। यही वजह है कि दीपावली पर घरों की साफ-सफाई, सजावट और दीप प्रज्ज्वलन के साथ उनकी विशेष पूजा की जाती है।
लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन का विशेष महत्व
दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करना भी सदियों पुरानी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण और पूजन से की जाती है। उन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि गणेश जी की आराधना से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में शुभता का संचार होता है। यही कारण है कि दीपावली की पूजा में लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
बंगाल में मां काली की आराधना
देश के पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में दीपावली के अवसर पर मां काली की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु मां काली की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। मां काली को शक्ति, साहस और दुष्ट शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। काली पूजा के अवसर पर मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष आयोजन होते हैं। इस परंपरा के माध्यम से शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया जाता है।
धन और वैभव के लिए कुबेर पूजन
धन के देवता भगवान कुबेर की पूजा भी दीपावली के अवसर पर की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में कुबेर को धन-संपत्ति और खजाने का संरक्षक माना गया है। कई परिवारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी के साथ कुबेर देवता का पूजन किया जाता है। श्रद्धालु उनसे आर्थिक उन्नति, व्यापार में प्रगति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
गुजरात में हनुमान जी की पूजा की परंपरा
गुजरात के कुछ क्षेत्रों में दीपावली से एक दिन पहले हनुमान जी की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। हनुमान जी को भक्ति, शक्ति, साहस और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु उनकी आराधना कर जीवन में संकटों से मुक्ति और आत्मबल की कामना करते हैं।
इस प्रकार दीपावली का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का प्रतीक है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा के विधान भले ही अलग हों, लेकिन सभी का उद्देश्य सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करना है।


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