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मुख्यमंत्री की आर्थिक सहायता में बड़ा खेल! चार साल बाद भी धर्म को नहीं मिली 1.25 लाख की मदद, डीएम ने लिया संज्ञान
लखनऊ। सरकारी योजनाओं के तहत जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के दावों के बीच मलिहाबाद क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम रामपुर बस्ती, थाना मलिहाबाद निवासी धर्म पुत्र स्वर्गीय लल्लू का आरोप है कि पिता की नदी में डूबने से मौत के बाद शासन की ओर से मिलने वाली 1.25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता चार साल बीत जाने के बावजूद उन्हें नहीं मिली।
पीड़ित के मुताबिक, वर्ष 2021 में नदी में डूबने से उनके पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से परिवार के बच्चों को प्रति व्यक्ति 1.25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई थी। धर्म का कहना है कि उनके दो भाइयों और एक बहन को वर्ष 2022 में सहायता राशि मिल गई, लेकिन उनके खाते में आज तक एक भी रुपया नहीं पहुंचा।
प्रधान पर गंभीर आरोप, सहायता राशि के नाम पर मांगे 20 हजार रुपये
धर्म ने अपनी शिकायत में ग्राम प्रधान रामशंकर कश्यप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सहायता राशि दिलाने के नाम पर प्रधान ने उनकी बैंक पासबुक अपने पास ले ली और उनसे 20 हजार रुपये की मांग की। रुपये देने से इनकार करने पर कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज की गई और उन्हें वहां से भगा दिया गया। इतना ही नहीं, पीड़ित ने आरोप लगाया कि उनके भाई-बहन को मिली सहायता राशि में से भी कथित तौर पर 8-8 हजार रुपये जबरन ले लिए गए।
कोषागार के रिकॉर्ड में भुगतान, फिर खाते में कहां गई रकम?
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात कोषागार के रिकॉर्ड से सामने आई है। रिकॉर्ड के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2022 को केनरा बैंक की मलिहाबाद शाखा में धर्म के खाते में 1 लाख 25 हजार रुपये भेजे जाने का उल्लेख है। लेकिन पीड़ित का दावा है कि उनके खाते में यह रकम कभी पहुंची ही नहीं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान किए जाने का जिक्र है, तो आखिर धर्म को उसकी सहायता राशि क्यों नहीं मिली? क्या भुगतान किसी दूसरे खाते में गया, बैंक स्तर पर कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई या फिर सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक भुगतान में कोई अंतर है?
डीएम ने लिया संज्ञान, पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद
मामले की शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी की ओर से पीड़ित को जल्द न्याय दिलाने की बात कही गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले की कितनी गंभीरता से जांच कराता है और चार साल से अपनी आर्थिक सहायता का इंतजार कर रहे धर्म को उनका हक कब तक मिल पाता है।
अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
- सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान दर्ज है तो पीड़ित के खाते में रकम क्यों नहीं पहुंची?
- भुगतान की वास्तविक स्थिति की जांच बैंक और कोषागार स्तर पर कब होगी?
- प्रधान पर लगाए गए 20 हजार रुपये मांगने और अन्य लाभार्थियों से रकम लेने के आरोपों की जांच कौन करेगा?
- आखिर चार साल से पीड़ित अपनी ही सरकारी सहायता राशि के लिए क्यों भटक रहा है?
अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। जरूरतमंद परिवारों के लिए जारी सरकारी सहायता में यदि कहीं भी अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होना बेहद जरूरी है।
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