करवा चौथ की रौनक, बाजार गुलजार सुहागिनों में उत्साह, खरीदारी को उमड़ीं महिलाएं

पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ मनाए जाने वाले करवा चौथ पर्व को लेकर उतरौला बाजार में रौनक बढ़ गई है

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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता
 
रमेश कुमार यादव / अनिल गुप्ता
 
बलरामपुर / उतरौला  पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ मनाए जाने वाले करवा चौथ पर्व को लेकर उतरौला बाजार में रौनक बढ़ गई है। पर्व नजदीक आते ही कपड़े, चूड़ी, शृंगार सामग्री और पूजा-पाठ का सामान बेचने वाली दुकानों पर महिलाओं की आवाजाही तेज हो गई है। सुहागिन महिलाएं व्रत की तैयारियों में जुटी हैं, वहीं दुकानदारों ने भी ग्राहकों की पसंद और जरूरत को ध्यान में रखते हुए अपनी दुकानों को आकर्षक ढंग से सजाया है। बाजार में लाल, गुलाबी और हरे रंग की चूड़ियों के साथ साड़ियां, सूट, बिंदी, सिंदूर, कंगन, मंगलसूत्र और अन्य शृंगार सामग्री महिलाओं को आकर्षित कर रही है।
 
करवा चौथ केवल उपवास रखने का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और दांपत्य संबंधों की मजबूती का प्रतीक भी माना जाता है। इसी भाव के साथ महिलाएं पर्व की तैयारियों में जुटी हैं। कोई अपनी पसंद की साड़ी और चूड़ियां खरीद रही है, तो कोई पूजा की थाली, करवा, दीपक, छलनी और अन्य आवश्यक सामग्री जुटाने में लगी है। बाजार में बढ़ती चहल-पहल से व्यापारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं।
 
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। परंपरागत रूप से कई महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला उपवास करती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
 
करवा चौथ से जुड़ी प्रचलित कथाओं में वीरवती की कथा प्रमुख है। मान्यता है कि वीरवती ने अपने पति की कुशलता के लिए व्रत रखा था। कथा के अनुसार, भाइयों की एक युक्ति के कारण उन्होंने चंद्रमा निकलने से पहले ही उसे निकला हुआ समझकर व्रत खोल लिया, जिसके बाद उनके पति पर संकट आ गया। बाद में उनकी श्रद्धा और तप के फलस्वरूप पति को जीवनदान मिलने की कथा सुनाई जाती है। यह कथा व्रत के नियमों, श्रद्धा और संकल्प के महत्व को दर्शाती है।
 
एक अन्य प्रचलित धार्मिक कथा महाभारत से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार, जब अर्जुन नीलगिरि पर्वत पर तपस्या करने गए थे, तब द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। श्रीकृष्ण ने उन्हें करवा चौथ से जुड़ी व्रत-परंपरा और धार्मिक उपायों का महत्व बताया। हालांकि, करवा चौथ की कथाओं और रीति-रिवाजों के अलग-अलग क्षेत्रीय रूप भी प्रचलित हैं।
 
करवा चौथ पर सोलह शृंगार की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं साड़ी या मनपसंद परिधान पहनकर मेहंदी लगाती हैं और चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, काजल, कंगन तथा अन्य शृंगार सामग्री से सजती-संवरती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं समूह में एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पूजा के दौरान करवा बदलने की परंपरा निभाती हैं।
 
शाम को चंद्रमा के उदय होने पर महिलाएं चंद्रदेव को जल अर्पित करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है। परिवार के सदस्य भी इस अवसर पर एक-दूसरे के सुखी जीवन की कामना करते हैं। समय के साथ इस पर्व का स्वरूप भी व्यापक हुआ है और कई परिवारों में पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए व्रत रखते हैं।
 
उतरौला बाजार में कपड़े और शृंगार की दुकानों के साथ मेहंदी लगाने वाली दुकानों तथा ब्यूटी पार्लरों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। महिलाएं पर्व से पहले मेहंदी लगवाने और सजने-संवरने की तैयारियां कर रही हैं। पूजा सामग्री की दुकानों पर करवा, दीपक, छलनी, पूजा की थाली और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध हैं।
 
दुकानदार भानु प्रताप, ब्रह्म नन्द गुप्ता,विजय पटवा आदि ने बताया कि करवा चौथ को लेकर महिलाओं की पसंद के अनुसार विभिन्न प्रकार के शृंगार और परिधान संबंधी सामान सजाए गए हैं। वहीं पूजा सामग्री विक्रेता संजय गुप्ता ने बताया कि करवा, दीपक, छलनी और पूजा की थाली जैसे सामान की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि ग्राहकों को एक ही स्थान पर आवश्यक सामग्री मिल सके।
 
पर्व को लेकर बाजार में बढ़ती भीड़ से स्थानीय दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद है। महिलाओं की खरीदारी से बाजार में रौनक बढ़ी है और दुकानदार ग्राहकों को उनकी पसंद के अनुसार सामान उपलब्ध कराने में जुटे हैं। त्योहार के रंगों, शृंगार की चमक और पूजा की तैयारियों के बीच सादुल्लानगर का बाजार करवा चौथ के उत्सवी माहौल में रंगा नजर आ रहा है।
 
करवा चौथ की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक जुड़ाव और आपसी स्नेह का संदेश भी देती है। सुहागिन महिलाएं जहां व्रत और पूजा की तैयारियां कर रही हैं, वहीं बाजार में बढ़ती हलचल पर्व के प्रति उनके उत्साह को बयां कर रही है।

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