नारी का पत्नी के रूप में उसका त्याग और समर्पण अतुल्य है करवाचौथ व्रत । शरद अग्निहोत्री

नारी सृष्टि की अनमोल धरोहर है। एक माँ के रूप में उसका वात्सल्य धरती पर अतुल्य है,

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स्वतंत्र प्रभात।
 
 ब्यूरो प्रयागराज 
 
नारी सृष्टि की अनमोल धरोहर है। एक माँ के रूप में उसका वात्सल्य धरती पर अतुल्य है, एक पत्नी के रूप में उसका त्याग और समर्पण अतुल्य है, एक पुत्री के रूप में माता- पिता के प्रति उसका स्नेह और सेवाभाव अतुल्य है। उसका सब व्रतोपवास परिजनों के लिए ही है, स्वयं के लिए कुछ नहीं क्योंकि उसने अपनों में अपने को देखा और माना है। नारी स्नेह, सेवा , समर्पण, सौजन्य, सहृदयता, साहस, संघर्षशीलता, सहनशीलता, कोमलता, त्याग, तपस्या की प्रतिमूर्ति है। वह परिवार की शक्ति और उसकी धुरी है। इतना ही नहीं जिस संसार में सभी जीव अपनी लम्बी उम्र लिप्सा में लिपटे दिखते हैं , नारी सबकी लम्बी उम्र और सुख, स्वास्थ्य हेतु कठिन व्रतोपवास करती है और खुद को पति के पूर्व ही संसार से विदा होने की कामना करती है । क्या यह कहीं और दिख सकता है? धन्य है भारतीय नारी और उसकी दार्शनिक चिन्तनधारा! आइए, नारी को पहचानें उन्हें उचित सम्मान दें।
 
सेवा, समर्पण, त्याग की, है जगत् में सानी नहीं,
उपवास-व्रत अपनों के हित,निज हित कभी जानी नहीं।
गौरवमयी पहचान तेरी, स्वयं की पहचान कर,
शुभकामना श्रद्धा सहित, तू सत् प्रतिष्ठा प्राप्त कर।।
 
 
 
( शरद अग्निहोत्री  इफको फूलपुर प्रयागराज।)

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