गांधी शिल्प बाजार में देशभर के कारीगरों के 200 स्टॉल, मंत्री जेपीएस राठौर ने किया शुभारंभ
चार नवंबर तक चलेगी 10 दिवसीय प्रदर्शनी, आठ उत्कृष्ट हस्तशिल्पी सम्मानित; चिकनकारी परिधान, जूट बैग और हस्तनिर्मित खिलौने बने आकर्षण
लखनऊ। पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और देशभर के कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में 10 दिवसीय राष्ट्रीय ‘गांधी शिल्प बाजार’ का आयोजन किया जा रहा है। 26 अक्टूबर से चार नवंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रदेश के सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर ने किया। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से उत्तर प्रदेश राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास निगम लिमिटेड की ओर से इसका आयोजन किया गया है।
उद्घाटन समारोह में मंत्री जेपीएस राठौर ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के तहत स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहित कर रही हैं। गांधी शिल्प बाजार जैसे आयोजन कारीगरों और ग्राहकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और शिल्पकारों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिल सकता है। उन्होंने कारीगरों की आजीविका मजबूत करने के लिए ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया।
200 स्टॉल पर देशभर के हस्तशिल्प उत्पाद
प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों ने करीब 200 स्टॉल लगाए हैं। यहां हस्तनिर्मित मोमबत्तियां, कृत्रिम आभूषण, सॉफ्ट टॉयज, पर्यावरण अनुकूल जूट और पेपर बैग, हथकरघा वस्त्र तथा लखनवी चिकनकारी के परिधान आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आगंतुकों को शिल्पकारों के उत्पाद सीधे खरीदने का अवसर मिल रहा है।
सहकारिता मंत्री ने हस्तकला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले आठ उत्कृष्ट हस्तशिल्पियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। प्रदर्शनी में आगंतुकों और युवाओं के लिए सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं।
जन शिक्षण संस्थान के प्रशिक्षुओं के उत्पादों की सराहना
केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के अधीन संचालित जन शिक्षण संस्थान, कानपुर देहात और लखनऊ के प्रशिक्षित लाभार्थियों की ओर से तैयार उत्पाद भी प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें चिकनकारी परिधान, जूट बैग, खिलौने और कृत्रिम आभूषण शामिल हैं। अतिथियों ने इन उत्पादों की सराहना की। करवाचौथ की पूर्व संध्या पर संस्थान से जुड़ी महिलाओं ने मेहंदी कला का प्रदर्शन भी किया। इस अवसर पर संस्थान की ओर से मंत्री को लखनवी चिकनकारी से तैयार ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) स्मृति चिह्न भेंट किया गया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास निगम के अध्यक्ष नवलेश प्रताप सिंह, प्रबंध निदेशक अब्बास, क्षेत्रीय पार्षद रामकृष्ण यादव, वस्त्र मंत्रालय के सहायक निदेशक रजा आलम और रवि कुमार गौड़, जन शिक्षण संस्थान कानपुर देहात के निदेशक इमरान खान, साक्षरता निकेतन के निदेशक सौरभ कुमार खरे और गोमती नगर केंद्र के निदेशक अनिल कुमार श्रीवास्तव सहित कई अधिकारी, गणमान्य नागरिक और हस्तशिल्पी मौजूद रहे।


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