लखनऊ विश्वविद्यालय के हैकाथॉन में ‘क्रिप्टोनिक्स’ ने मारी बाजी, 6 हजार रुपये का जीता पुरस्कार
92 टीमों ने कराया पंजीकरण, 15 सर्वश्रेष्ठ टीमों के बीच हुआ मुकाबला; एआई और ओपन-सोर्स तकनीक से विद्यार्थियों ने पेश किए नवाचारी समाधान
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की ओर से हैकाथॉन ‘हैक्टोबरफेस्ट हैक डे-2026’ का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ओपन-सोर्स तकनीक और सॉफ्टवेयर विकास पर आधारित परियोजनाओं के जरिए वास्तविक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत किए। 92 पंजीकृत टीमों में से चयनित 15 टीमों ने अंतिम मुकाबले में अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता में खुशी कुशवाहा के नेतृत्व वाली टीम ‘क्रिप्टोनिक्स’ ने पहला स्थान हासिल किया। टीम ने अपने प्रोजेक्ट ‘लीश- द एआई गॉट हैक्ड, द मनी डिड नॉट’ के लिए 6,000 रुपये का नकद पुरस्कार जीता। टीम में किनजल गोस्वामी, अंबर गुप्ता और छवि गुप्ता शामिल रहीं।
काव्या नागरिया के नेतृत्व वाली टीम ‘टेक टाइटन्स’ ने ‘एफआरए इंटेलिजेंस वर्कस्टेशन’ परियोजना के लिए दूसरा स्थान प्राप्त किया। टीम को 4,000 रुपये का पुरस्कार मिला। इसमें दिव्यांशु दुबे, हर्षित सिंह और हिमांशु शेखर शामिल रहे। वहीं, नमन शक्ति के नेतृत्व वाली टीम ‘नोवाकोर’ ने क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की निगरानी और पहचान पर आधारित परियोजना ‘वस्पट्रेस’ के लिए तीसरा स्थान हासिल किया। टीम को 2,000 रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके सदस्य शिवम वर्मा, नेहा जायसवाल और निलांशा पाण्डेय रहे।
तकनीकी दक्षता के आधार पर हुआ मूल्यांकन
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के समन्वयक डॉ. हिमांशु पाण्डेय ने बताया कि 92 टीमों के पंजीकरण के बाद तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर 15 श्रेष्ठ टीमों को अंतिम प्रस्तुतीकरण के लिए चुना गया। निर्णायक मंडल में ‘कोड माई बिजनेस’ के संस्थापक मोहम्मद रिजवान, सॉफ्टवेयर डेवलपर मोहम्मद बशीर अहमद और ‘जेन टेक लिमिटेड’ के सॉफ्टवेयर इंजीनियर मिर्जा फैसल शामिल रहे। निर्णायकों ने परियोजनाओं का मूल्यांकन तकनीकी दक्षता, नवाचार, उपयोगिता और प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया।
आयोजन अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के डीन प्रो. सत्येंद्र पाल सिंह और विभाग समन्वयक डॉ. हिमांशु पाण्डेय के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इसके सफल संचालन में डॉ. रवि कृष्ण पाण्डेय और ई. मारुति मौर्य का योगदान रहा। छात्र समन्वयक के रूप में आकाश कुमार यादव और आकाश सिंह ने जिम्मेदारी निभाई। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को नई तकनीकों पर काम करने, टीम भावना विकसित करने और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान तैयार करने का अवसर मिला।


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