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रजत मुकुट और रुद्राक्ष से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य शृंगार, जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य आयोजन में शामिल होने और भगवान के मनोहारी स्वरूप के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। तड़के मंदिर के कपाट खुलने के बाद पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का अभिषेक किया गया।
पंचामृत से हुआ बाबा महाकाल का अभिषेक
मंदिर के कपाट खुलने के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर से आरती की गई।
रजत मुकुट और रुद्राक्ष से हुआ दिव्य शृंगार
पूजन के बाद बाबा महाकाल को रजत मुकुट धारण कराया गया और रुद्राक्ष से उनका मनोहारी शृंगार किया गया। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती की गई। आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। पूरा परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा।
रात से ही दर्शन के लिए लगी कतारें
बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन पाने के लिए श्रद्धालु रात से ही कतारों में लगने लगे थे। बड़ी संख्या में भक्तों ने आरती में शामिल होकर अपने आराध्य के दर्शन किए। इस दौरान मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
विशेष परंपरा के साथ होती है भस्म आरती
श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपरा है। परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन करना विशेष पुण्यदायी होता है।
Read More नपाध्यक्ष विनय जायसवाल ने आयोजित किया फलाहार कार्यक्रम, मां दुर्गा से नगर की खुशहाली की कामनाबाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भक्त इस अलौकिक दर्शन को अपने लिए सौभाग्य और आस्था का विशेष क्षण मानते हैं।
स्वतंत्र प्रभात।


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