महर्षि वाल्मीकि जयंती पर लाइव चित्रकला शिविर, कलाकारों ने कैनवास पर उकेरे रामायण के प्रसंग
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से संस्कृति विभाग के अंतर्गत दो दिवसीय लाइव चित्रकला शिविर का आयोजन किया गया
लखनऊ। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से संस्कृति विभाग के अंतर्गत दो दिवसीय लाइव चित्रकला शिविर का आयोजन किया गया। सोमवार को कैसरबाग स्थित लाल बारादरी भवन परिसर में शिविर के पहले दिन कलाकारों ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान और रामायण के विभिन्न प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से साकार किया।
इस आयोजन का उद्देश्य कला के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और महापुरुषों के जीवन-दर्शन को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा और अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात के निर्देशन में आयोजित शिविर में दस कलाकारों को आमंत्रित किया गया। अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा और उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्रा की रूपरेखा के अनुरूप कलाकारों को 2.5 × 3 फीट आकार के कैनवास और एक्रिलिक रंग उपलब्ध कराए गए।
कलाकारों ने इन प्रसंगों को चित्रों में उकेरा
विनीत पाण्डेय ने रामायण में वर्णित क्रौंच पक्षी की घटना और उससे उत्पन्न करुणा को चित्रित किया।
मोहन मावा ने रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की प्रेरक जीवन यात्रा को दर्शाया।
मनोज कुमार गौंड ने वन में रामायण की रचना करते महर्षि वाल्मीकि का चित्र बनाया।
मैनाज बानो ने महर्षि वाल्मीकि के साथ राम, लक्ष्मण और सीता से जुड़े प्रसंगों को चित्रित किया।
अश्वनी कुमार प्रजापति ने वन में क्रौंच पक्षी और अन्य जीव-जंतुओं के साथ महर्षि वाल्मीकि को दर्शाया।
फौजदार कुमार ने रामायण की रचना और भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंगों को कैनवास पर उतारा।
विनोद कुमार सिंह ने रामायण की रचना के माध्यम से भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप की भावाभिव्यक्ति की।
नेहा कुमारी ने उत्तरकांड, लव-कुश और रामायण की रचना से संबंधित प्रसंगों को चित्रित किया।
मनोज कुमार हंसराज ने महर्षि वाल्मीकि के प्रथम श्लोक की भावभूमि पर आधारित चित्र बनाया।
सिद्धार्थ देव ने वन में क्रौंच पक्षी और अन्य जीव-जंतुओं के साथ महर्षि वाल्मीकि का चित्रण किया।
इन कलाकृतियों के माध्यम से कलाकारों ने महर्षि वाल्मीकि की संवेदनशीलता, सृजनशीलता और भारतीय साहित्य एवं संस्कृति में उनके योगदान को कलात्मक अभिव्यक्ति दी।
Read More 22 अक्टूबर का पंचांग: भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास है गुरुवार, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकालमहर्षि वाल्मीकि जयंती पर राज्य ललित कला अकादमी की ओर से इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर, लखनऊ में उनके जीवन और कृतित्व पर आधारित विशाल रंगोली भी बनाई गई।
दो दिवसीय चित्रकला शिविर 27 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। दूसरे दिन कलाकार अपनी कलाकृतियों को अंतिम रूप देंगे। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और कला के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।


Comments