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22 अक्टूबर का पंचांग: भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास है गुरुवार, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
द्वादशी तिथि पर पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व, जानिए सूर्योदय, सूर्यास्त और दिशाशूल का समय
स्वतंत्र प्रभात।
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ, यात्रा और नए कार्यों की शुरुआत से पहले तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी ली जाती है। पंचांग के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 को गुरुवार के दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी। गुरुवार भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंदों की सहायता करने से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।
द्वादशी तिथि और नक्षत्र का समय
पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि रात 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र सुबह 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, जबकि शोभन योग शाम 4 बजकर 18 मिनट तक प्रभावी रहेगा। बव करण दोपहर 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस दिन सूर्य तुला राशि और चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे।
22 अक्टूबर के शुभ और अशुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं में शुभ मुहूर्त को मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं, राहुकाल और अन्य अशुभ माने जाने वाले समय में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
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शुभ मुहूर्त: सुबह 11:16 बजे से दोपहर 12:01 बजे तक
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राहुकाल: दोपहर 1:27 बजे से 2:53 बजे तक
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गुलिक काल: सुबह 9:10 बजे से 10:36 बजे तक
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यमगण्ड काल: सुबह 6:30 बजे से 7:56 बजे तक
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
22 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 32 मिनट पर होगा। चंद्रमा दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर उदित होगा और अगले दिन रात 1 बजकर 22 मिनट पर अस्त होगा।
गुरुवार को किस दिशा में रहेगा दिशाशूल?
पंचांग के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारणवश इस दिशा में यात्रा करना आवश्यक हो, तो परंपरागत मान्यताओं के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।
पंचांग में बताए गए मुहूर्त और समय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना के अनुसार समय में अंतर संभव है।


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