फिल्म ‘सूर्या’ के खिलाफ कानपुर में डॉक्टरों का हल्लाबोल, पोस्टर जलाकर जताया आक्रोश; यूपी में रिलीज रोकने की मांग

आईएमए की आपात बैठक में फिल्म के दृश्यों पर जताई कड़ी आपत्ति, निर्माता से सार्वजनिक माफी और विवादित संवाद हटाने की उठाई आवाज

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कानपुर। फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ में चिकित्सक समुदाय के कथित आपत्तिजनक चित्रण को लेकर कानपुर में डॉक्टरों का गुस्सा फूट पड़ा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), कानपुर शाखा ने मंगलवार को आपातकालीन आम सभा आयोजित कर फिल्म के कुछ दृश्यों और संवादों पर कड़ी नाराजगी जताई। बैठक के बाद चिकित्सकों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए फिल्म के पोस्टर जलाए और बैनर-तख्तियां लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
 
आईएमए भवन परेड में शाम पांच बजे आयोजित बैठक में एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि चिकित्सक समुदाय मानव जीवन की रक्षा और जनस्वास्थ्य की सेवा के लिए निरंतर समर्पित रहता है। ऐसे में किसी फिल्म में डॉक्टरों को कथित तौर पर अपमानजनक या नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करना उनके सामाजिक सम्मान और चिकित्सक-मरीज के बीच भरोसे को प्रभावित कर सकता है।
 
आईएमए कानपुर ने फिल्म में चिकित्सकों के चित्रण पर आपत्ति जताते हुए संबंधित पक्षों के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं। एसोसिएशन ने फिल्म से डॉक्टरों के खिलाफ कथित अपमानजनक दृश्यों और संवादों को तत्काल हटाने, निर्माता की ओर से चिकित्सा समुदाय से सार्वजनिक माफी मांगने तथा संबंधित यूट्यूब वीडियो को हटाने की मांग की।
 
इसके साथ ही आईएमए ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की कि फिल्म के कथित आपत्तिजनक चित्रण को देखते हुए प्रदेश में इसकी रिलीज पर रोक लगाने पर विचार किया जाए। एसोसिएशन का कहना है कि रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और तथ्यों के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी है।
 
 बैठक में चिकित्सकों ने कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच संबंध केवल इलाज तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह विश्वास, संवेदनशीलता और मानवीय सहयोग पर आधारित होता है। किसी पूरे पेशे को नकारात्मक छवि में दिखाने से समाज में गलत संदेश जा सकता है। एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी पेशे से जुड़े विषयों को प्रस्तुत करते समय उसके व्यापक सामाजिक प्रभावों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
 
आम सभा के बाद आईएमए के पदाधिकारियों और सदस्यों ने फिल्म के कथित आपत्तिजनक चित्रण के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पोस्टर जलाकर तथा विरोध संबंधी तख्तियां और बैनर लेकर चिकित्सकों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से संबंधित दृश्यों की समीक्षा करने और चिकित्सक समुदाय की गरिमा का सम्मान करने की मांग की।
 
आईएमए कानपुर ने मीडिया और आम जनता से भी अपील की कि चिकित्सा पेशे से जुड़े मामलों में तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास एवं सम्मान के रिश्ते को बनाए रखने में सहयोग किया जाए।
 
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों के सम्मान, प्रतिष्ठा और सुरक्षित कार्य वातावरण से जुड़े मुद्दों को उचित मंचों पर उठाया जाता रहेगा। अब देखना होगा कि फिल्म निर्माताओं और संबंधित अधिकारियों की ओर से आईएमए की इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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