जन औषधि केंद्र की दवाओं पर सवाल, मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की सलाह!

सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों और निजी मेडिकल स्टोर के बीच कमीशन के खेल की लोगों ने जताई आशंका, जांच की उठी मांग

हर्षिता यादव  Picture
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सितारगंज। सरकार की ओर से आम जनता को सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खोले गए जन औषधि केंद्रों की उपयोगिता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सितारगंज उप जिला चिकित्सालय में उपचार कराने पहुंचे नानकमत्ता क्षेत्र के एक बुजुर्ग परिवार के मरीज को जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने के बाद कथित तौर पर निजी मेडिकल स्टोर से दवा लाने की सलाह दिए जाने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने जन औषधि केंद्र से खरीदी गई दवा को नकली बताते हुए बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर लाने को कहा। इस घटना के बाद लोगों ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाएं लिखने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
 
लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने आने वाले मरीजों को जन औषधि केंद्र से दवा लेने के बजाय निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की सलाह क्यों दी जाती है। कुछ लोगों ने सरकारी चिकित्सकों और निजी अस्पतालों अथवा मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच दवाओं को लेकर कथित कमीशन के लेनदेन की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस तरह के आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
 
जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने के बाद दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचा मरीज
जानकारी के अनुसार, नानकमत्ता क्षेत्र से एक बुजुर्ग परिवार उपचार कराने के लिए सितारगंज स्थित उप जिला चिकित्सालय पहुंचा था। यहां मरीज ने चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने मरीज का परीक्षण करने के बाद पर्चे पर दवाएं लिख दीं। इसके बाद परिजन दवाएं खरीदने के लिए अस्पताल के पास स्थित जन औषधि केंद्र पहुंचे और वहां से पर्चे के अनुसार दवाएं लेकर वापस चिकित्सक के पास पहुंच गए। परिजनों का आरोप है कि दवाएं देखने के बाद चिकित्सक ने उन्हें नकली बताते हुए बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदकर लाने को कहा। चिकित्सक की इस कथित टिप्पणी से मरीज और उसके परिजन असमंजस में पड़ गए। उनका सवाल था कि जब सरकार ने आम लोगों को सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र खुलवाए हैं, तो वहां से खरीदी गई दवाओं को लेकर इस तरह की बात क्यों कही जा रही है।
 
कमीशन के खेल की आशंका, जांच की मांग
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जन औषधि केंद्र से मिलने वाली दवाएं निर्धारित गुणवत्ता की हैं, तो मरीजों को उन्हें इस्तेमाल करने से पहले ही निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की सलाह देने के पीछे क्या कारण है? लोगों ने आशंका जताई कि कहीं कुछ चिकित्सकों और निजी मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच दवाओं की बिक्री को लेकर कमीशन का कोई खेल तो नहीं चल रहा है।
 
लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की कोई व्यवस्था चल रही है, तो यह मरीजों के हितों के साथ खिलवाड़ होगा। हालांकि, किसी चिकित्सक या मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कमीशन लेने या देने के आरोप की पुष्टि करने के लिए ठोस साक्ष्य और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। फिलहाल इस मामले में कमीशन के लेनदेन का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
 
सरकारी योजना का लाभ मरीजों तक पहुंचाने की मांग
जन औषधि केंद्रों की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य लोगों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को उपचार के दौरान दवाओं पर अधिक खर्च न करना पड़े। ऐसे में यदि मरीजों को सरकारी अस्पताल में उपचार कराने के बाद निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए कहा जाता है, तो योजना की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
 
लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जन औषधि केंद्र से खरीदी गई संबंधित दवाओं के नमूनों की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि उनकी गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि मरीज को निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की सलाह किस आधार पर दी गई।
 
लोगों की मांग है कि यदि दवाओं की गुणवत्ता में कोई कमी पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि बिना किसी ठोस आधार के मरीजों को जन औषधि केंद्र की दवाओं के प्रति भ्रमित किया जा रहा है या निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों की भी जांच होनी चाहिए। इससे मरीजों का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और जन औषधि योजना पर बना रह सकेगा।

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