मंच कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन

हर्षिता यादव  Picture
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लखनऊ, राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उत्तर प्रदेश एवं उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में उर्दू अकादमी, गोमती नगर, लखनऊ के ‘उर्दू अकाॅदमी सभागार’ में मंच कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया।
 
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा, आई.ए.एस. ने किया, मुख्य अतिथि डॉ. आर. के. स्वर्णकार, आई.पी.एस. रहे। विषिष्ट अतिथि के रूप में उर्दू अकादमी के सचिव, शौकत अली उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके पष्चात वन्देमातरम् की प्रस्तुति श्रीमती अनीता मिश्रा द्वारा की गयी।
 
कुशल संचालन डाॅ. अखिलेष कुमार मिश्रा एवं डाॅ0 राहुल अवस्थी ने किया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन संस्थान की महामंत्री डाॅ0 सीमा गुप्ता द्वारा किया गया। 
 
कार्यक्रम में जिन कवियों ने मंच को ऊंचाई प्रदान की उनमें डाॅ. हरिओम, आई.ए.एस., डॉ. कलीम कैसर, गोरखपुर, डॉ. राहुल अवस्थी, बरेली, डॉ. सरला शर्मा ‘अस्मा’, लखनऊ, डॉ. सुधा मिश्रा, लखनऊ, चंद्रदेव दीक्षित ‘चंद्र’, लखनऊ, अनुराग मिश्र ‘गैर’, लखनऊ, सफीर रे, वन्दना त्रिवेदी आदि। 
 
काव्यांश अग्रलिखित है:-
हम अजब युग में पल रहे हैं यहाँ,
अपने अपनों को छल रहे हैं यहाँ,
इतनी नीची नजर से मत देखो,
हम तुम्हारा तो कल रहे हैं यहाँ। 
-डॉ. कलीम कैसर
मुझे क्यूँ चाँद का धोखा हुआ है,
अभी तू छत पा क्या आया हुआ है।
किसी बच्चे के हाथों में थमा दो,
खिलौना देर से मचला हुआ है।
-अनुराग मिश्र गैर
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हुजूम-ए-गम से शिकस्त-ए-दिल है उदास वीरान सी ये दुनियाँ,
अजाब-ए-हिज्राँ सता रहा है, मुझे सतावें मिरी ही सखियाँ
मिजाज-ए-आशिक मिसाल-ए-शबनम, सजल हुए हैं नयन हमारे
विसाल-ए-जानाँ कि आरजू में, सजन न आए मैं जागूँ रतियाँ। 
-सफीर रे
आप-से, तुम से, तू से निकले हैं,
हम अदब के उजू से निकले हैं, 
बेतकल्लुफ तकल्लुफी इतनी!
आप क्या लखनऊ से निकले हैं। 
-डॉ. राहुल अवस्थी 
वो लिहाज अपनी मुहब्बत का तो इतना रक्खे, 
मुझसे बिछड़े तो खयाल अच्छे से खुद का रक्खे।
एक पल के लिए आजा कि तेरी फुरकत में, 
एक अरसा हुआ इन आँखों में दरिया रक्खे।
-डॉ. सरला शर्मा ‘अस्मां’
जिंदगी है नशा जिंदगी प्यार है ,
जिंदगी जुत्सजू इक इंतजार है,
जिंदगी दो दिलों का है संगम यहां-
है कभी जीत तो ये कभी हार है।
-चन्द्र देव दीक्षित ‘चन्द्र’
अक्स आँखों में उतरना भी अजब होता है।
ख्वाब में रोज का मिलना भी अजब होता है।
इश्क के राज जमाने को बताएं कैसे 
प्यार में दिल का धड़कना भी अजब होता है।
-डॉ. सुधा मिश्रा
 
इस अवसर पर सभागार में विषाल संख्या में साहित्य प्रेमी श्रोतागण उपस्थित रहे। संस्थान के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने भी उपस्थित पूरे मनोयोग से कार्यक्रम को सफल बनाया। धन्यवाद ज्ञापन रेनू वर्मा ने किया। कार्यक्रम का समापन डाॅ0 शोभा दीक्षित ‘भावना’ श्रीमती राजश्री दुबे, मीना गौतम,द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगान से हुआ।
 
 

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