हेलीकॉप्टर हादसों में जीवन गंवाते श्रद्धालु 

हैलीकॉप्टर सेवा दे रही कंपनियों द्वारा बरती जा रही अनियमितता और भारी लापरवाही को अनावृत कर दिया है।

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मनोज कुमार अग्रवाल 
 
भारत एक धर्म परायण देश है यहां वर्ष पर्यन्त धार्मिक अनुष्ठान पूजा स्नान पर्व त्यौहार व यात्राओं का सिलसिला जारी रहता है। जैसे - जैसे विज्ञान की तरक्की हो रही है धार्मिक स्थलों की यात्रा जो कालांतर में पथरीली पहाड़ियों से पद यात्रा करते हुए बहुत जटिल और दुर्गम परिस्थितियों में की जाती रहीं अब यातायात के आधुनिक परिवहन साधनों के जरिए की जाने लगीं है इसी के चलते अब लोगों के लिए हेली सर्विस धार्मिक स्थलों की सुगम यात्रा कराने लगी है।
 
लेकिन इनमें सुरक्षा इंतजाम और नियमों का उल्लंघन लगातार दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। हाल ही में 30 अक्टूबर को हुए हादसे में जोशीमठ इलाके में धार्मिक पर्यटन कर रहे चौपर सवार छह श्रद्धालुओं की दुखद मौत ने एक बार फिर हैलीकॉप्टर सेवा दे रही कंपनियों द्वारा बरती जा रही अनियमितता और भारी लापरवाही को अनावृत कर दिया है। 
 
भारत में धार्मिक पर्यटन जैसे चारधाम यात्रा, वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा के दौरान पिछले कुछ वर्षों में कई दुखद हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हुई हैं। हिमालयी क्षेत्रों का अचानक बदलता मौसम, खराब दृश्यता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां इन हादसों का मुख्य कारण रही हैं।आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अकेले उत्तराखंड में साल 2016 से 2026 के बीच 12 हेलीकॉप्टर हादसे हो चुके हैं, जिनमें 21 लोगों की जान गई है।
 
उत्तराखंड के केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के रूट पर सबसे ज्यादा हादसे दर्ज किए गए हैं। आपको बता दें कि 30 अक्टूबर 2026 जोशीमठ/बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा 'ट्रांस भारत एविएशन' का एक निजी हेलीकॉप्टर खराब मौसम और बर्फबारी के बीच चमोली जिले में हाथी पर्वत (चाई गांव) के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट सहित 6 लोगों की मौत हो गई।
 
15 जून 2025 केदारनाथ घाटी आर्यन एविएशन का बेल 407 हेलीकॉप्टर केदारनाथ से गुप्तकाशी लौटते समय गौरीकुंड (गौरीमाई खर्क) के पास घने बादलों के कारण पहाड़ी से टकरा गया। इस हादसे में पायलट और एक बच्चे समेत 7 लोगों की जान चली गई।
 
18 अक्टूबर 2022 केदारनाथ  धाम से उड़ान भरने के महज 5-6 सेकंड बाद ही एक हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी और खराब विजिबिलिटी के कारण क्रैश हो गया, जिसमें 7 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। मई 2025  देहरादून से हर्षिल यमुनोत्री मार्ग जा रहा एक और बेल 407 हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकराया, जिसमें 6 पर्यटकों की मौत हो गई थी।
 
जम्मू-कश्मीर माता वैष्णो देवी यात्रा नवंबर 2015 के हादसे में माता वैष्णो देवी के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं को ले जा रहा एक निजी हेलीकॉप्टर कटरा में टेक-ऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। शुरुआती जांच में पता चला था कि रोटर (पंखे) से एक गिद्ध के टकराने के कारण हेलीकॉप्टर में आग लग गई थी। इस हादसे में एक महिला पायलट समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी।
 
2026 जोशीमठ (बदरीनाथ मार्ग) ट्रांस भारत एविएशन खराब मौसम और बर्फबारी से प्रभावित दृश्यता के चलते पांच श्रद्धालुओं और एक पायलट की मौत हो गई। 2025 गौरीकुंड सोनप्रयाग (केदारनाथ मार्ग) आर्यन एविएशन घने बादल और कम दृश्यता के कारण छह तीर्थयात्रियों एक बच्चा और एक पायलट की मौत हो गई थी। 8 मई 2023 को हर्षिल (यमुनोत्री मार्ग) पर खराब मौसम के कारण पहाड़ी से टकरा कर चौपर गिरने से पांच महिला श्रद्धालुओं और पायलट की मौत हो गई। 
 
18 अक्टूबर 2022 को केदारनाथ घाटी आर्यन एविएशन के चौपर में तकनीकी खराबी और कोहरा के चलते छल श्रद्धालु और एक पायलट की मौत हो गई। अप्रैल 2018 में केदारनाथ हैलीपेड पर लेंडिंग के दौरान वायुसेना के मालवाहक चोपर के क्रश हो जाने से एक मौत व तीन जख्मी हुए। 23 नवंबर 2015 कटरा सांझीछत वैष्णो देवी पर पक्षी (गिद्ध) का टकराना और आग लगना छह श्रद्धालुओं और एक महिला पायलट का जीवन लील गया। 
 
सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदम सिर्फ कागजो पर चल रहे हैं। लगातार हो रहे हादसों के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने सुरक्षा नियमों को काफी कड़ा कर दिया है। अब खराब मौसम की स्थिति में उड़ानों को तुरंत स्थगित करने का दावा किया जाता है, हेलीकॉप्टरों के अंदर इन-कैब कैमरे  अनिवार्य किए जा रहे हैं, और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के पूरे बेड़े  को ग्राउंड करने जैसी सख्त कार्रवाई की जा रही है। 
 
इस के बावजूद हेली हादसे बता रहे हैं कि तमाम नियम कानून और निर्देश सिर्फ काग़ज़ पर चल रहे हैं और एविएशन कंपनी अधिक लाभ कमाने के लालच में असामान्य परिस्थितियों में भी चौपर उड़ान करा पायलट और श्रद्धालु यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रही है।पिछले सत्र में राज्यसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच पूरे भारत में कुल 12 बड़े हेलीकॉप्टर हादसे हुए हैं, जिनमें कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है।
 
इन आँकड़ों से पता चलता है कि उत्तराखंड में सबसे ज्यादा हादसे सामने आ रहे हैं। कुल 12 बड़े हादसों में से 7 दुर्घटनाएं अकेले उत्तराखंड में हुई हैं, और देश भर में हुई 30 मौतों में से 21 मौतें यानि करीब 70% इसी राज्य में हुई हैं।जबकि अन्य राज्यों में इसी अवधि में महाराष्ट्र में 4 हेलीकॉप्टर क्रैश हुए जिनमें 7 लोगों की जान गई, और छत्तीसगढ़ में 1 दुर्घटना हुई जिसमें 2 लोगों की मौत हुई।
 
उत्तराखंड में  (2016 से 2026) पिछले 10 वर्षों (2016-2026) के दौरान अकेले उत्तराखंड में लगभग 13 हेलीकॉप्टर घटनाएं जिनमें जानलेवा हादसे और इमरजेंसी लैंडिंग शामिल हैं  जिनसे वहां कुल 27 से अधिक लोगों की जान गई है। सरकार को इन तमाम हादसों से सबक लेना चाहिए और एविएशन कंपनियों को नियमों का पालन करने और मनमानी पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। 

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