इनके बयान ही काफी है इनके पतन के लिए
जब-जब इन्होंने पीएम मोदी या उनके परिवार पर घृणित टिप्पणियां की हैं, तब-तब जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है।
मनोज कुमार अग्रवाल
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित पटना में एक कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण के दौरान कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर एसआईआर से जुड़ा हर व्यक्ति जेल भेजा जाएगा। तभी एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने खड़े होकर कहा, जब तक कड़ा विद्रोह नहीं होगा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा रहे। खड़गे ने शुरुआती शब्द नहीं सुने और केवल बाद वाला वाक्य सुनकर कहा, 'मोदी का बाप' भी जाएगा। उन्होंने तीन बार यह वाक्य दोहराया। वहीं, सभागार में मौजूद अन्य कांग्रेसियों ने संबंधित कार्यकर्ता की जमकर पिटाई कर दी और बाहर निकाल दिया। खड़गे के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
देश के राजनीतिक मंच पर जिस तरह का माहौल बनता जा रहा है, वह चिंता पैदा करने वाला है। कई प्रकार की हो रही कार्रवाईयों के अलावा छोटे-बड़े नेताओं द्वारा अपने विरोधियों के खिलाफ कई बार इस तरह की बयानबाज़ी की जाने लगी है, जो मर्यादा की हद पार कर जाती है। लोकतंत्र में आपसी विचारधारक विरोध होना स्वाभाविक है परन्तु यदि ऐसे विरोध नफ़रत और दुश्मनी में बदलता दिखाई दे तो वह पूरे प्रबंध के लिए घातक साबित हो सकता है।
निचले स्तर पर तो बहुत बार ऐसा कुछ दिखाई देता है परन्तु यदि यह ऊपरी स्तर तक पहुंच जाए और ऐसे दृश्य अक्सर देखने को मिलने लग जाएं तो यह पूरे राजनीतिक प्रबंध के लिए नुकसानदायक साबित नहीं होंगे, बल्कि समूचे ताने-बाने पर इसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप में देखा जाने लगेगा। इस संबंधी बड़े विवाद उस समय भी पैदा होता है, जब बड़े नेता मर्यादा से बाहर हो जाते हैं। ऐसा कुछ लगभग सभी पार्टियों के बड़े-छोटे नेताओं द्वारा किया जाता रहा है।
आपको बता दें कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा है कि खड़गे ने प्रधानमंत्री के प्रति जिस अमर्यादित और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया है, वह कांग्रेस के वैचारिक दिवालियापन को दर्शाता है। राजनीति में विरोध की भी एक गरिमा होती है, लेकिन सार्वजनिक मंच से स्वर्गीय परिजनों को भाषणों में घसीटना ही अब राहुल गांधी और समूचे विपक्ष का असली संस्कार बन चुका है।
गृहमंत्री अमित शाह ने खड़गे के बयान पर कहा, कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम के पिता के बारे में अभद्र टिप्पणी कर सारी मर्यादाएं तार-तार कर दी हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी अभद्रता की सीमाएं पार करती जा रही है। 12 वर्षों में लगातार मिल रही चुनावी हार से कांग्रेस में हताशा व निराशा इतनी बढ़ चुकी है कि अब उसके पास न कोई नीति बची है, न कोई मुद्दा, बस गाली-गलौज की राजनीति बची है। जब-जब इन्होंने पीएम मोदी या उनके परिवार पर घृणित टिप्पणियां की हैं, तब-तब जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है।
खड़गे के बोल कोई पहली दफा नहीं बिगड़े, अतीत में जाएं तोज अप्रैल, 2026 में असम में खड़गे ने कहा, अगर जहरीले सांप आरएसएस और भाजपा को खत्म नहीं किया गया, तो ये किसी को सुरक्षित नहीं रहने देंगे। अक्तूबर, 2024 में कर्नाटक की जनसभा में भाजपा को आतंकवादियों की पार्टी करार दिया। नवंबर, 2022 में गुजरात में खड़गे ने हर चुनाव मोदी के चेहरे पर लड़ने को लेकर कहा था, क्या पीएम के रावण की तरह 100 सिर हैं।
खड़गे हो, राहुल गांधी या सोनिया गांधी हो कांग्रेस के उपरोक्त नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उनके माता-पिता को लेकर एक बार नहीं अनेक बार अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है। इन नेताओं की भाषा से प्रधानमंत्री मोदी को कोई राजनीतिक हानि तो नहीं हुई लेकिन खड़गे और गांधी परिवार की संकीर्ण सोच को अवश्य जगजाहिर कर दिया है
आपको पता है कि पिछले लम्बे समय से 'वोट चोरी' के मामले पर जिस तरह बहुत बार आपे से बाहर होते रहे हैं दरअसल इनमें दूषित मानसिकता घर किए हैं कांग्रेसी नेता राहुल गांधी द्वारा बहुत ओछी बयानबाज़ी की जाती रही है, वह कई बार मर्यादा से बाहर जाती दिखाई तो देती ही है परन्तु उससे उनके अंदर पैदा हो रही बौखलाहट का भी भली-भांति पता चल जाता है। पिछले 12 वर्ष से कांग्रेस को पार्टी के तौर पर बड़ी ऐसी राजनीतिक हार का मुंह देखना पड़ा है, जिसकी उनको उम्मीद नहीं थी, जिस कारण वह हर प्रयास अपने अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए जल्दबाज़ी में दिखाई देते हैं, परन्तु जिस तरह का व्यवहार बड़े कांग्रेसी नेताओं ने धारण कर लिया है, उससे उनको कोई बड़ी प्राप्ति न होती दिखाई देने के साथ उनकी निराशा सिर चढ़ कर बोलती नज़र आ रही है।
इसी कड़ी में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिखाई गई बौखलाहट को देखा जा सकता है। खड़गे पार्टी के बड़े नेता ही नहीं, अपितु उन्हें परिपक्व और समझदार नेता भी माना जाता है, आप समझ सकते हैं कि देश के प्रधानमंत्री के स्वर्गीय पिता संबंधी इस्तेमाल की गई ऐसी शब्दावली किसी भी तरह शोभनीय नहीं कही जा सकती। इसके साथ जहां राजनीतिक पार्टियों के भीतर कड़वाहट बढ़ती है, वहीं निम्न स्तर तक भी ऐसा माहौल पैदा हो जाता है।
इस संबंध में बड़े भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तो कहा है कि जब किसी पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता ही भाषा की मर्यादा भूल जाता है तो उसके कार्यकर्ताओं से किस तरह सलीके की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करें, नीतियों पर सवाल उठाएं, सरकार की आलोचना करें, परन्तु व्यक्तिगत मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए।
निःसंदेह राजनीतिक पार्टियों के छोटे-बड़े नेताओं द्वारा ऐसी बयानबाज़ी देश के माहौल को और गंदा करने में सहायक हो सकती है, जिससे सभी पार्टियों को सचेत होने की ज़रूरत होगी। पंजाब में भी पिछले कुछ समय से एक-दूसरे के खिलाफ निजी कड़वाहट पैदा करने वाली की जा रही बयानबाज़ी ने माहौल में पहले ही बेहद भड़काहट पैदा की हुई है और अब जब चुनाव निकट आ रहे हैं तो ऐसी भड़काहट राज्य के लिए और भी नुकसानदेह सिद्ध हो सकती है। हम सभी बड़े-छोटे नेताओं को इस पक्ष से एक स्तर पर रह कर बयानबाज़ी तथा क्रियान्वयन की अपील करते हैं, ताकि चुनाव के समय माहौल को और खराब होने से बचाया जा सके।कांग्रेस के नेता और उनके पतन का कारण बन रहे हैं।
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